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New in Short
सीएम हेल्पलाइन पर अफसरों की बेरुखी के कारण चार लाख 38 हजार शिकायतें लंबित हैं।
शिकायतों के समाधान के लिए समय सीमा तय है, लेकिन इसे भी अनदेखा किया जा रहा है।
समाधान न होने के कारण आमजन को एल-1 से एल-4 तक शिकायत दर्ज करनी पड़ती है।
ऑनलाइन शिकायतों पर कार्रवाई न करने वाले जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होती है।
प्रावधान होने के बावजूद कार्रवाई सीमित और फौरी होने से अधिकारियों पर यह बेअसर है।
News in Detail
BHOPAL. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन मध्य प्रदेश सरकार की सबसे अहम ऑनलाइन सेवा है। आमजन भी इस पर अपनी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी शिकायत दर्ज करा सकता है। पोर्टल पर आने वाली शिकायतों की निगरानी ब्लॉक से लेकर विभाग मुख्यालय तक होती है। जब कहीं सुनवाई नहीं होती, तब लोग इस ऑनलाइन सेवा पर गुहार लगाते हैं।
शिकायतों के समाधान की समयावधि तय है। वहीं, दंड के प्रावधानों की कसावट भी नाकाफी नजर आ रही है। इसी वजह से इतनी अहम ऑनलाइन सेवा अफसरों के उदासीन रवैए का शिकार हो रही है। इस सेवा की अनदेखी करने पर अर्थदंड या वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई का दायर भी बहुत सीमित है। लेवल 1 से लेवल 4 तक 4.38 लाख शिकायतें अटकी हुई हैं और लोग समाधान की आस लगाए बैठे हैं।
4.38 लाख शिकायतों का अंबार
सीएम हेल्पलाइन पर वर्ष 2025 में आई शिकायतों में से चार लाख 38 हजार अटकी ही रह गईं हैं। इनमें से 98 हजार से ज्यादा शिकायतों को अधिकारियों ने पोर्टल पर खोलकर देखना भी जरूरी नहीं समझा। वहीं एक लाख 74 हजार शिकायतें 100 दिन से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं।
संभाग स्तर यानी लेवल -3 और विभागीय प्रमुख सचिव स्तर यानी लेवल -4 पर दो लाख 75 हजार शिकायतों का निपटारा नहीं किया जा सका है। यानी विभाग की सबसे छोटी इकाई से लेकर विभागीय मुख्यालय तक शिकायतें अबूझ पहेली की तरह अटकी पड़ी हैं।
अपनी समस्याओं का हल तलाशने वाली जनता को बार- बार शिकायत करनी पड़ रही है। वहीं तहसील से लेकर विभाग स्तर के अधिकारी जिम्मेदार होकर भी बेफिक्र हैं। वेतन वृद्धि रोकने या छोटे- मोटे जुर्माने की कार्रवाई इतनी कम होती है कि अधिकारियों में इसका खौफ नहीं नजर नहीं आता।
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सीएम के निर्देशों का भी नहीं असर
लंबित शिकायतों का आंकड़ा चार लाख 38 हजार तक पहुंच चुका है, जिनमें से एक लाख 57 हजार शिकायतें 50 दिनों से भी अधिक समय से अटकी हुई हैं। कई शिकायतें तो वर्षों से बिना समाधान के लंबित हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बावजूद, वर्ष 2025 में भी पूरी शिकायतों का समाधान नहीं हो सका है। जिम्मेदारी तय करने के नाम पर चंद अफसरों पर 100- 200 रुपए के जुर्माने की कार्रवाई हुई है। कार्रवाई इतनी मामूली होने की वजह से अधिकारी इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवा को अनदेखा करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
विभागों में भी शिकायतों का पहाड़
प्रदेश के 55 जिलों में विभिन्न विभागों की चार लाख 38 हजार 929 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से एक लाख 57 हजार 693 शिकायतें 50 दिन से अधिक समय से पेंडिंग हैं। इस स्थिति से साफ है कि नए मामलों के आने के साथ समाधान की गति बेहद धीमी हो गई है।
जनवरी महीने में तीन लाख 34 हजार 10 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से केवल 91 हजार 935 का ही समाधान हुआ, जबकि दो लाख 42 हजार 75 शिकायतें अब भी लंबित हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन डैशबोर्ड के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न विभागों में शिकायतों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
राजस्व विभाग में 93 हजार 140 शिकायतें लंबित हैं, जिनमें 47 हजार 884 मामले 50 दिन से अधिक पुराने हैं। गृह विभाग में 50 हजार 241, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 42 हजार 463, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 61 हजार 444 और लोक स्वास्थ्य विभाग में 33 हजार 648 शिकायतें लंबित हैं।
इन शिकायतों पर नहीं सुनवाई
कोलार के महाबली नगर में रहने वाली प्रीति सक्सेना की शिकायत 15 साल से समाधान का इंतजार कर रही है। 2010 में प्रीति सक्सेना ने रोहित गृह निर्माण सहकारी संस्था से प्लॉट खरीदने के बावजूद रजिस्ट्री न होने की शिकायत की थी। आज तक उन्हें न तो सीएम हेल्पलाइन से समाधान मिला और न जनसुनवाई में चक्कर काटने पर कार्रवाई हुई।
ग्वालियर में मोनू उर्फ भारत सिंह का जमीन को लेकर भाईयों से विवाद चल रहा है। वे जमीन पर हक दिलाने के लिए 300 से ज्यादा शिकायत कर चुके हैं लेकिन पुलिस और राजस्व विभाग उनकी समस्या का निराकरण नहीं कर पाया है।
लश्कर, ग्वालियर के रहने वाले शिवरतन सिंह ने बेटे की सगाई टूटने के बाद संबंधी पक्ष द्वारा राशि वापस न लौटाने की शिकायत की है। उनके खिलाफ पुलिस ने झूठा केस दर्ज किया था। उनकी कई शिकायतों के बाद भी उन्हें समाधान नहीं मिला है।
डिंडौरी के गीधा गांव के आदिवासी मजदूर भोला राठौर ने सीएम हेल्पलाइन पर प्रसूति सहायता योजना का लाभ न मिलने पर शिकायत दर्ज कराई थी। जुलाई 2025 में उन्हें योजना से अपात्र बता दिया गया। शिकायत 90 दिन से ज्यादा अटकी रही तो उन्हें दोबारा अपील करनी पड़ी।
जुर्माना लगा फिर भी सुधार नहीं
सीएम हेल्पलाइन पर आई शिकायतों को नजरअंदाज करने पर हाल ही में डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने वित्त शाखा प्रमुख, निर्वाचन शाखा, परिवहन विभाग, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, सीईओ जनपद पंचायत डिंडौरी, उर्जा विभाग, मनरेगा प्रभारी पर एक-एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने दिसम्बर 2025 में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों को अनदेखा करने पर जल संसाधन अधिकारी, जल निगम, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग के अधिकारी, मैरिज सर्टिफिकेट ने देने पर ग्राम पंचायत भ्याना के सचिव को वेतन रोकने और जुर्माने का नोटिस जारी किया है।
महीने की रेटिंग में 54 जिले फिसड्डी
सीएम हेल्पलाइन की निगरानी राजधानी स्तर से की जाती है। सीएम डेशबोर्ड की जिला ग्रेडिंग के आंकड़े अधिकारियों की बेरुखी बयां कर रहे हैं। जनवरी 2026 की ग्रेडिंग में ग्रुप A में शामिल 28 जिलों में से केवल सीहोर को ही C रेटिंग मिली है। जबकि बाकी 27 जिलों की रेटिंग D रही है।
वहीं ग्रुप B में शामिल सभी 27 जिलों की रेटिंग D रही है। यही स्थिति विभागों की रही है। पशुपालन विभाग को जनवरी में B रेटिंग मिली है।
वहीं वाणिज्यिक कर विभाग, ऊर्जा विभाग, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग और लोक सेवा प्रबंधन विभाग की रेटिंग C रही जबकि शेष 48 जिलों को D रेटिंग मिली है। रेटिंग में फिसड्डी जिलों की इतनी अधिक संख्या सीएम हेल्पलाइन पर अधिकारियों के उदासीन रवैए को उजागर करने वाली है।
निष्कर्ष
प्रदेश में बढ़ती शिकायतों की संख्या और उनका समाधान न हो पाना सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। यदि विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई और शिकायतों के वास्तविक समाधान पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी महत्वाकांक्षी योजना भी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाएगी।
जबावदारी तय कर हो रही कार्रवाई
सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों पर मुख्यालय स्तर से मॉनिटरिंग हो रही है। हर स्तर पर जबावदारी तय है। विभाग और जिलावार ग्रेडिंग भी होती है। जिलास्तर पर भी अधिकारियों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
-नीरज मंडलोई, महानिदेशक, राज्य लोकसेवा अभिकरण मध्य प्रदेश
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