कुक्षी सिंचाई परियोजना का दायरा बढ़ा, 75 हजार हेक्टेयर जमीन को मिलेगा सिंचाई का पानी
Pawan Modiya | Aug 11, 2026, 21:27 IST
कुक्षी परियोजना
धार जिले की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर काम तेज हुआ है। यह परियोजना चार तहसील के 247 गांवों की 75 हजार हेक्टेयर जमीन को नर्मदा के पानी से सींचेगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- धार जिले की कुक्षी माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है।
- इससे लाभान्वित गांवों की संख्या बढ़कर 247 हो गई है।
- परियोजना की लागत भी बढ़कर 2,717 करोड़ रुपए हो गई है।
- चिखल्दा गांव के पास संपवेल और पंप हाउस का निर्माण शुरू हुआ है।
- परियोजना से चार तहसीलों की 75 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा।
योजना को कब मिली थी मंजूरी
संपवेल-नहर का निर्माण शुरू
बैकवाटर से बचाव की तैयारी
किसानों को मिलेंगे तीन फायदे
अफसर बोले- तय समय में पूरा होगा प्रोजेक्ट
क्यों जरूरी है यह योजना
साथ ही स्थायी भूमि अधिग्रहण की जरूरत भी कम होती है। यही वजह है कि यह परियोजना क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही है। इससे धार के दूरदराज गांवों में खेती को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण कई सालों से ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा। इनका मकसद नर्मदा के पानी को दूरदराज के खेतों तक पहुंचाना है। कुक्षी परियोजना भी इसी कड़ी का हिस्सा है।
इस इलाके में जमीन ऊंची-नीची होने के कारण पारंपरिक नहर बनाना आसान नहीं है। ऐसे में पंप से पानी ऊपर उठाकर पाइपलाइन से पहुंचाना बेहतर तरीका माना गया। परियोजना पूरी होने के बाद इलाके की खेती सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रहेगी। किसान साल में एक से ज्यादा फसल भी ले सकेंगे। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
जरूरी FAQ
इस परियोजना से धार जिले की कुक्षी, डही, मनावर और गंधवानी तहसीलों के 247 गांवों को फायदा मिलेगा। इन गांवों की करीब 75 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को नर्मदा के पानी से सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
परियोजना की कुल लागत कितनी है और यह कैसे बढ़ी?
परियोजना की शुरुआती लागत 2,117 करोड़ रुपए तय की गई थी। साल 2022 में परियोजना के विस्तार के बाद इसमें और गांव जुड़े, जिसके बाद लागत बढ़कर 2,717 करोड़ रुपए हो गई।
बैकवाटर से निर्माण कार्य को बचाने के लिए क्या तैयारी की गई है?
नर्मदा का बढ़ता जलस्तर निर्माण स्थल तक न पहुंचे, इसके लिए एजेंसी ने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची मिट्टी की दीवार बनाई है, ताकि काम बिना रुकावट जारी रह सके।
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