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मंदिरों की प्रसिद्धी के लिए जाने जाने वाली पन्ना नगरी, महलों के लिए भी जानी जाती है। पन्ना के महल और किले अपनी खूबसूरती और के भव्यता लिए मशहूर हैं। इनमें से ही एक लक्ष्मीपुर पैलेस है। बुंदेली स्थापत्य कला से बना यह महल अब काफी जर्जर हो चुका है। एक समय था जब इस महल को मशहूर डकैत के लिए एक खुली जेल में बदल दिया गया था।
लक्ष्मीपुर पैलेस होगा हेरिटेज होटल
लक्ष्मीपुर पैलेस, जो कि पन्ना राजवंश का आलीशान ठिकाना था, अब यह हेरिटेज होटल के रूप में तैयार होगा। यह महल 1880 में बना था और इसे कभी कुख्यात डकैत मूरत सिंह और उसके साथियों की खुली जेल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। अब पर्यटन विभाग इसे निजी साझेदार के साथ मिलकर हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने जा रहा है।
इस योजना के तहत विभाग प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 30 स्थानों को करोड़ों रुपए के निजी निवेश से पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करेगा।
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पर्यटन क्षेत्र में 400 करोड़ का निवेश
पर्यटन विभाग ने निजी क्षेत्र की मदद से निवेश बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत उज्जैन, नीमच, सीहोर, रायसेन, निवाड़ी और पन्ना में होटल, रिसॉर्ट और ईको-टूरिज्म गतिविधियां विकसित की जाएंगी। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं, ताकि निजी निवेशकों को इन परियोजनाओं में शामिल किया जा सके।
फरवरी में इन टेंडरों के आधार पर निवेशकों को प्रोजेक्ट दिए जाएंगे। इन योजनाओं में कुल 400 करोड़ से ज्यादा का निवेश होने की संभावना है।
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डाकू मूरत सिंह के लिए बना था खुली जेल
लक्ष्मीपुर पैलेस पन्ना से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है, और इसे पन्ना रियासत के महाराज लोकपाल सिंह जूदेव ने बनवाया था। यह महल बुंदेलखंड की स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण था। 1972 में जब कुख्यात डकैत मूरत सिंह को पुलिस ने पकड़ा था, तो उसे और उसके साथियों को इस पैलेस में खुली जेल बनाकर रखा गया था।
कुछ समय के लिए इसे कृषि महाविद्यालय भी बना दिया गया था, लेकिन बाद में इसकी सही देखभाल न होने के कारण यह बहुत ही जर्जर हालत में पहुंच गया। हालांकि, कुछ साल पहले सरकार ने इसका जीर्णोद्धार करवाया और इसे हेरिटेज प्रॉपर्टी बनाने का ऐलान किया था।
90 साल की लीज पर दिया जाएगा प्रोजेक्ट
लक्ष्मीपुर पैलेस को हेरिटेज होटल में बदलने का प्रोजेक्ट (सरकारी प्रोजेक्ट) लगभग 4.53 हेक्टेयर में शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट की लागत 10 करोड़ रुपए होगी। इसे पूरा करने के लिए चुनी गई एजेंसी को 5 साल का समय मिलेगा। प्रोजेक्ट को कुल 90 साल की लीज पर दिया जाएगा।
इनके बारे में भी जानें..
फूलन देवी
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फूलन देवी को बीहड़ में कुख्यात डाकू माना जाता है। उसे हालात और समय ने डाकू बनने पर मजबूर कर दिया था। कहा जाता है कि फूलन देवी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। इसके बाद महज 16 साल की उम्र में वह डाकू बन गई। फूलन देवी ने बलात्कार का बदला लेने के लिए राजपूत समाज के 22 लोगों को सरेआम मार डाला था।
मोहर सिंह गुर्जर
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1960 से 70 के दशक में चंबल की घाटियों में मोहर सिंह गुर्जर का आतंक बहुत ज्यादा फैला था। 1965 में माधव सिंह के साथ मिलकर मोहर सिंह ने करीब 500 लोगों का एक गिरोह बनाया था। कहा जाता है कि मोहर सिंह ने इतना डर पैदा किया था कि पुलिस को चंबल की घाटियों में घुसने से भी डर लगने लगा था। मोहर सिंह पर 80 से ज्यादा हत्याएं, 350 से ज्यादा लूट, अपहरण और डकैती के केस थे।
डाकू मलखान सिंह
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डाकू मलखान सिंह अपने खौफ के लिए जाना जाता था। 6 फीट लंबे कद और मोटी मूंछों के साथ खाकी वर्दी में मलखान ने चंबल की घाटियों में सालों तक आतंक फैलाए रखा। मलखान सिंह के गिरोह में करीब डेढ़ दर्जन लोग शामिल थे। इन पर 35 पुलिस वालों सहित 175 हत्याओं का आरोप था।
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