Lok Sabha election में कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम से पहले राजकुमार पटेल और भागीरथ प्रसाद भी दे चुके थे ऐसा ही झटका
Jitendra Shrivastava | May 05, 2024, 17:16 IST
thesootr
मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में ऐन वक्त पर पार्टी उम्मीदवार के दल बदलने का झटका कांग्रेस को साल 2009 से ही लग रहा है। इसके बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व इसका उपाए नहीं तलाश सका है...
मारुतराज, BHOPAL. एमपी लोकसभा चुनाव ( Lok Sabha election ) में कांग्रेस उम्मीदवार रहे अक्षय कांति बम के नामांकन फॉर्म लेने की घटना ने भले ही लोगों को आश्चर्य में डाल दिया हो, लेकिन मध्य प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कांग्रेस के उम्मीदवार इस तहर के झटके पहले भी पार्टी को दे चुके हैं। बम की तरह सबसे पहला झटका कांग्रेस को साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मिला था। इसके बाद दूसरा बम फूटा था साल 2014 के लोकसभा चुनाव में। क्या था पूरा मामला आइए आपको बताते हैं विस्तार से…
मध्य प्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव 2009 में कांग्रेस ने राजकुमार पटेल को उम्मीदवार बनाया था। इस सीट से बीजेपी की सुषमा स्वाराज चुनाव लड़ रही थीं। पटेल ने नामांकन फॉर्म जमा करने के अंतिम दिन अपना फॉर्म जमा किया था। पटेल का फॉर्म बाद में निरस्त हो गया और एक तरह से सुषमा स्वाराज को वॉक ओवर मिल गया था। फॉर्म रिजेक्शन की वजह नामांकन पत्र फॉर्म ए की मूल प्रति न जमा किया जाना बताया गया था। 2004 से केंद्र में सरकार चला रही कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका था। बाद में एके अंटोनी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने राजकुमार पटेल को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि, बाद में उनकी पार्टी में वापसी हो गयी थी।
ये खबर भी पढ़ें...
Lok Sabha Election : विदिशा, गुना और राजगढ़ सीट पर अब गुरिल्ला वॉर का दौर शुरू
कांग्रेस पर दूसरा बम गिरा था साल 2014 के चुनाव में। मध्य प्रदेश की भिंड दतिया लोकसभा सीट से कांग्रेस ने नौकरशाह रहे भागीरथ प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था। प्रसाद 2009 का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से लड़ चुके थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने हार के बाद भी प्रसाद को 2014 के चुनाव में एक बार फिर उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने टिकट की घोषणा होने के बाद दूसरे दिन ही बीजेपी जॉइन कर ली थी। मोदी की लहर पर सवार बीजेपी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि तो थी ही, लेकिन कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था। मनमोहन सिंह की सरकार तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में थी। प्रसाद ने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
देश में चल रहे लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने इंदौर लोकसभा सीट से अक्षय कांति बम को उम्मीदवार बनाया था। नाम वापसी के अंतिम दिन बम ने अपना फॉर्म वापस ले लिया। अक्षय कांति के नाम वापस लेने के साथ ही इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस की दावेदारी पूरी तरह से खत्म हो गई और एक तरह से बीजेपी उम्मीदवार शंकर लालवानी को वॉक ऑवर मिल गया। हालांकि, कांग्रेस नोटा पर वोट देने की अपील कर रही है, लेकिन इसका चुनाव परिणाम पर असर होने की उम्मीद कम ही है।
पटेल का हुआ था फॉर्म रिजेक्ट
मध्य प्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव 2009 में कांग्रेस ने राजकुमार पटेल को उम्मीदवार बनाया था। इस सीट से बीजेपी की सुषमा स्वाराज चुनाव लड़ रही थीं। पटेल ने नामांकन फॉर्म जमा करने के अंतिम दिन अपना फॉर्म जमा किया था। पटेल का फॉर्म बाद में निरस्त हो गया और एक तरह से सुषमा स्वाराज को वॉक ओवर मिल गया था। फॉर्म रिजेक्शन की वजह नामांकन पत्र फॉर्म ए की मूल प्रति न जमा किया जाना बताया गया था। 2004 से केंद्र में सरकार चला रही कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका था। बाद में एके अंटोनी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने राजकुमार पटेल को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि, बाद में उनकी पार्टी में वापसी हो गयी थी।
ये खबर भी पढ़ें...
Lok Sabha Election : विदिशा, गुना और राजगढ़ सीट पर अब गुरिल्ला वॉर का दौर शुरू
टिकट मिलने के बाद बीजेपी जॉइन कर ली
कांग्रेस पर दूसरा बम गिरा था साल 2014 के चुनाव में। मध्य प्रदेश की भिंड दतिया लोकसभा सीट से कांग्रेस ने नौकरशाह रहे भागीरथ प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था। प्रसाद 2009 का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से लड़ चुके थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने हार के बाद भी प्रसाद को 2014 के चुनाव में एक बार फिर उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने टिकट की घोषणा होने के बाद दूसरे दिन ही बीजेपी जॉइन कर ली थी। मोदी की लहर पर सवार बीजेपी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि तो थी ही, लेकिन कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था। मनमोहन सिंह की सरकार तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में थी। प्रसाद ने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
2024 का बम कांड…
देश में चल रहे लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने इंदौर लोकसभा सीट से अक्षय कांति बम को उम्मीदवार बनाया था। नाम वापसी के अंतिम दिन बम ने अपना फॉर्म वापस ले लिया। अक्षय कांति के नाम वापस लेने के साथ ही इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस की दावेदारी पूरी तरह से खत्म हो गई और एक तरह से बीजेपी उम्मीदवार शंकर लालवानी को वॉक ऑवर मिल गया। हालांकि, कांग्रेस नोटा पर वोट देने की अपील कर रही है, लेकिन इसका चुनाव परिणाम पर असर होने की उम्मीद कम ही है।
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj