एमपी में हर घंटे कैंसर से 5 से ज्यादा मौतें! रोज 200 से ज्यादा लोग हो रहे शिकार, सटीक निगरानी के लिए कोविन जैसे पोर्टल की मांग

Aman Vaishnav | Sootr Creatives | Nov 07, 2026, 08:24 IST
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मध्य प्रदेश में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने सही समय पर स्क्रीनिंग और मरीजों के सटीक रिकॉर्ड के लिए विशेष पोर्टल बनाने की जरूरत बताई है।
मध्य प्रदेश में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने सही समय पर स्क्रीनिंग और मरीजों के सटीक रिकॉर्ड के लिए विशेष पोर्टल बनाने की जरूरत बताई है।

मध्य प्रदेश में कैंसर की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। कैंसर रजिस्ट्री के 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्य में हर दिन औसतन 242 नए मरीज सामने आ रहे हैं। साथ ही करीब 133 लोग रोजाना इस गंभीर बीमारी की वजह से दम तोड़ रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि प्रदेश में हर घंटे 10 लोग कैंसर के शिकार हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार साल 2021 में नए मरीजों की संख्या 79 हजार 871 थी। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 88 हजार 297 पहुंच गया है। यानी चार सालों में नए मामलों और मौतों में 10.5% का इजाफा हुआ है।

हालांकि यह पूरी हकीकत नहीं है। क्योंकि कैंसर के सभी मरीजों का सटीक डेटा उपलब्ध ही नहीं है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि अभी तक हर मरीज का डेटा एक जगह जुटाने की व्यवस्था नहीं है।

देश भर में कैंसर के मामले: क्या कहते हैं आंकड़े?

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री के 2025 के अनुमान के मुताबिक, पूरे देश में हर साल 15.69 लाख नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। इससे पहले साल 2021 में यह अनुमान 14.26 लाख मरीजों का था।

देश में प्रमुख कैंसर के मामले इस तरह सामने आए हैं...

  • पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer in Men): 81 हजार 219 मरीज
  • महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer in Women): 2 लाख 32 हजार 832 मरीज
  • महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer in Women): 85 हजार 241 मरीज
  • महिलाओं में ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer in Women): 49 हजार 644 मरीज
भारत में कैंसर के मामले
भारत में कैंसर के मामले

मध्य प्रदेश में अभी कैसे जुटाया जा रहा है मरीजों का रिकॉर्ड?

राज्य में कैंसर मरीजों का हिसाब रखने के लिए नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (National Cancer Registry Program) के तहत दो तरीकों से काम चल रहा है।

1. हॉस्पिटल बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (HBCR)

इसमें उन मरीजों का पूरा ब्योरा रखा जाता है जो किसी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचते हैं। यह जानकारी ICMR को भेजी जाती है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अस्पताल में इलाज का तरीका कैसा है। मरीज किस तरह के कैंसर से जूझ रहे हैं। मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था अभी भोपाल सहित 19 मेडिकल कॉलेजों में चल रही है। बाकी जिलों का सही रिकॉर्ड इसमें शामिल नहीं हो पाता।

2. पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (PBCR)

यह व्यवस्था किसी खास शहर या जिले में रहने वाले हर कैंसर मरीज और इस बीमारी से होने वाली हर मौत का रिकॉर्ड रखती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और डेथ रजिस्ट्रेशन दफ्तरों से जानकारी जुटाई जाती है। इससे पता चलता है कि उस इलाके में कौन सा कैंसर ज्यादा फैल रहा है। मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था फिलहाल सिर्फ भोपाल में ही लागू है।

​मध्य प्रदेश में कैसे जुटाया जाता है कैंसर मरीजों का रिकॉर्ड?​
​मध्य प्रदेश में कैसे जुटाया जाता है कैंसर मरीजों का रिकॉर्ड?​

कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित करना क्यों है जरूरी?

जन स्वास्थ्य अनुसंधान वैज्ञानिक और ऑन्को एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल श्रीवास्तव का कहना है कि, कैंसर से लड़ाई सिर्फ अस्पतालों के कमरों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए जरूरी है कि सरकार कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित करे।

  • जैसे टीबी और एड्स के हर मरीज की निगरानी होती है, वैसे ही हर कैंसर मरीज की भी ट्रैकिंग हो सकेगी।
  • सभी सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और रेडियोलॉजिस्ट को एक नेटवर्क से जोड़ा जाना चाहिए।
  • कोरोना के समय बने कोविन पोर्टल (CoWIN Portal) की तरह कैंसर मरीजों के लिए भी एक अलग पोर्टल बनना चाहिए। इससे गांव से लेकर शहर तक का सही डेटा मिल सकेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यों को इस पर फैसला लेने को कहा है। देश के 17 राज्य इसे अधिसूचित बीमारी घोषित कर भी चुके हैं। जब पक्का डेटा होगा तभी सरकार सही नीतियां बना पाएगी।

उम्र के हिसाब से कराएं जांच, बच सकती है जान

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती जांच ही कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। शरीर में खून की कोई गांठ दिखे, पुराना घाव न भरे या कहीं से असामान्य खून बहे, तो उसे बिल्कुल अनदेखा न करें।

उम्र के हिसाब से इन बातों का ध्यान रखें...

30 साल की उम्र में जरूरी सावधानियां

  • महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए हर 3 साल में पैप स्मीयर Pap Smear या डॉक्टर की सलाह पर HPV Test करवाएं। दोनों रिपोर्ट सामान्य आने पर यह जांच हर 5 साल में कराई जा सकती है।
  • तंबाकू या गुटखा खाने वाले पुरुष और महिलाएं नियमित रूप से अपने मुंह की जांच जरूर कराएं।
  • शरीर में कोई भी बिना दर्द वाली गांठ या असामान्य ब्लीडिंग दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
कैंसर की जांच
कैंसर की जांच

40 साल की उम्र में जरूरी सावधानियां

  • महिलाएं नियमित रूप से ब्रेस्ट की क्लिनिकल जांच करवाएं। डॉक्टर की सलाह से मैमोग्राफी (Mammography) पर बात करें। साथ ही सर्वाइकल जांच जारी रखें।
  • परिवार में पहले किसी को कम उम्र में कैंसर रहा हो, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर जरूरी सलाह जरूर लें।

50 साल से अधिक उम्र में जरूरी सावधानियां

  • महिलाएं अपनी मैमोग्राफी और सर्वाइकल कैंसर की जांच समय पर कराती रहें।
  • बड़ी आंत के कैंसर की पहचान के लिए पुरुष और महिलाएं FIT या कोलोनोस्कोपी जांच कराएं।
  • जो लोग लंबे समय से बीड़ी या सिगरेट पी रहे हैं, वे डॉक्टर की सलाह पर लो-डोज सीटी स्कैन करवाएं।
FAQ

1. मध्य प्रदेश में हर रोज कैंसर के कितने नए मामले और मौतें दर्ज हो रही हैं?

कैंसर रजिस्ट्री के 2025 के आंकड़ों के हिसाब से मध्य प्रदेश में रोज औसतन 242 नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं और करीब 133 मरीजों की मौत हो रही है। इस तरह हर घंटे 10 नए मरीज जुड़ रहे हैं और 5 से ज्यादा लोगों की जान जा रही है।

2. कैंसर के मरीजों के लिए कोविन जैसे पोर्टल की मांग क्यों उठ रही है?

अभी मध्य प्रदेश के सिर्फ 19 मेडिकल कॉलेजों में अस्पताल आधारित और सिर्फ भोपाल में आबादी आधारित डेटा दर्ज होता है। ग्रामीण और अन्य शहरी इलाकों का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल पाता है। कोविन जैसे पोर्टल से हर मरीज का सही डेटा एक जगह मिलेगा, जिससे सरकार को दवाएं और अस्पताल की सुविधाएं तय करने में आसानी होगी।

3. कैंसर से बचने के लिए किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

शरीर में किसी भी तरह की गांठ, लंबे समय तक न भरने वाला घाव, मुंह में लंबे समय तक रहने वाला छाला और बिना किसी वजह के होने वाले असामान्य रक्तस्राव को कभी अनदेखा न करें। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
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