एमपी हाईकोर्ट में जजों की सिंगल बेंच बढ़ी, लंबित 482 याचिकाओं का जल्द होगा निपटारा, वकीलों और आमजन को बड़ी राहत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रोस्टर में बड़ा बदलाव किया है। अब 482 CrPC और जमानत याचिकाओं का तेजी से निपटारा होगा। नए बदलावों से वकीलों और आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।

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Neel Tiwari
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JABALPUR HIGHCOURT NEW ROASTER

Photograph: (the sootr)

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JABALPUR. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रिंसिपल सीट से वकीलों और आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। स्टेट बार एसोसिएशन की मांग पर हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2025 से रोस्टर में आंशिक बदलाव किया है। 

हाईकोर्ट में सिंगल बेंच की संख्या बढ़ा दी गई है। जजों को नए प्रकार के मामलों का कार्यभार सौंपा गया है। इससे पुराने मामलों की सुनवाई तेजी से हो सकेगी।

जिला स्तर से आने वाली जमानत और 482 से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा भी होगा। यह आदेश चीफ जस्टिस की स्वीकृति के बाद प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (न्यायिक) द्वारा जारी किया गया।

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नई सिंगल बेंच का गठन: मामलों में तेजी लाने का बड़ा कदम

रोस्टर में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। हाईकोर्ट ने कई जजों को नए केस सौंपे हैं।

जस्टिस विवेक कुमार सिंह (कोर्ट हॉल-25):

  • सभी रिट याचिकाएं ये जस्टिस सुनेंगे।

  • सिविल और आपराधिक मामले भी देखेंगे।

  • खास तौर पर सौंपे गए प्रकरणों पर सुनवाई होगी।

जस्टिस संदीप नटवरलाल भट्ट (कोर्ट हॉल-06):

  • रिट याचिकाएं (सेवा मामलों को छोड़कर, 2017 तक) ये देखेंगे।

  • जिला जबलपुर के MCRC जमानत मामले संभालेंगे।

  • विशेष रूप से सौंपे गए प्रकरणों पर ध्यान देंगे।

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जस्टिस अचल कुमार पालीवाल (कोर्ट हॉल-14):

  • कटनी, मंडला, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, रीवा आदि जिलों के जमानत मामले देखेंगे।

  • खास मामलों का निपटारा भी करेंगे।

जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल (कोर्ट हॉल-15):

  • भोपाल, छिंदवाड़ा, छतरपुर, दमोह, बालाघाट आदि जिलों के जमानत मामले सुनेंगे।

  • इन्हें विशेष रूप से सौंपे गए प्रकरण भी दिए गए हैं।

जस्टिस देवनारायण मिश्रा (कोर्ट हॉल-09):

  • सागर, सतना, शहडोल, सीधी, टीकमगढ़ सहित कई जिलों के जमानत मामले देखेंगे।

  • अन्य जिलों के पुराने लंबित जमानत मामलों की सुनवाई भी करेंगे।

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी (कोर्ट हॉल-19):

  • अनूपपुर, जबलपुर, मंडला, खंडवा, भोपाल आदि जिलों के MCRC (जमानत छोड़कर) देखेंगे।

  • इन्हीं जिलों की आपराधिक रिट याचिकाएं भी सुनेंगे।

  • विशेष रूप से सौंपे गए प्रकरणों पर सुनवाई होगी।

जस्टिस हिमांशु जोशी (कोर्ट हॉल-17):

  • रीवा, सागर, सतना, शहडोल, सीधी, पन्ना आदि जिलों के MCRC (जमानत छोड़कर) देखेंगे।

  • इन जिलों की आपराधिक रिट याचिकाएं भी सुनेंगे।

  • अन्य जिलों के लंबित MCRC मामलों की सुनवाई करेंगे।

जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसन (कोर्ट हॉल-21):

  • सभी प्रथम अपीलें इनके पास होंगी।

  • विविध सिविल व विविध अपीलें भी देखेंगे।

  • विशेष प्रकरणों पर सुनवाई होगी।

डिवीजन बेंच में भी बदलाव

डिवीजन बेंच-IV अब जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी.पी. शर्मा की नई संयोजन बेंच होगी। यह बेंच अब वर्ष 2022 तक की सभी आपराधिक अपीलें सुनेगी। इसके साथ ही वैवाहिक प्रथम अपीलें, और अन्य विशेष मामलों की सुनवाई भी करेगी।

यदि किसी कारण से DB-I, DB-II, DB-III या DB-IV अनुपलब्ध रहती हैं, तो उनके मामलों को अन्य डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

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482 याचिकाओं पर बड़ा बदलाव

इस नए रोस्टर का एक खास पहलू है। अब जस्टिस हिमांशु जोशी और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी सिर्फ धारा 482 CrPC से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे।

  • धारा 482 के तहत वे याचिकाएं आती हैं जिनमें FIR रद्द करने की मांग होती है।

  • लगाई गई धाराओं को चुनौती देने के मामले भी इसी श्रेणी में आते हैं।

  • ट्रायल को खत्म करने की मांग भी इन याचिकाओं में होती है।

पहले जमानत और FIR रद्द करने वाले मामले एक ही जज सुनते थे। इससे अक्सर मामलों में देरी होती थी। लेकिन अब जमानत और 482 CrPC दोनों के लिए अलग-अलग बेंच होंगी। इससे इन मामलों का निपटारा जल्दी होगा।

वकीलों के लिए यह बहुत बड़ा बदलाव है। दोनों प्रकार के मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए सुनवाई में तेजी आएगी। हाईकोर्ट के सूत्रों के अनुसार ड्रॉपबॉक्स सुविधा जो बंद थी, वह अब फिर से शुरू हो गई है। सोमवार से ड्रॉप बॉक्स में मेंशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे कानूनी प्रक्रिया में सुधार होगा।

क्या बदलेगा इस नए रोस्टर सिस्टम से?

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच संख्या बढ़ने से मामलों की बैकलॉग कम होगी। जमानत और 482 याचिकाओं में पहले से भी तेज सुनवाई संभव होगी। अलग-अलग जिलों के मामलों को व्यवस्थित तरीके से बांटा गया है। जिससे जिलेवार आधार पर न्याय वितरण अधिक सुव्यवस्थित होगा।

यह बदलाव हाईकोर्ट के कामकाज को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे वकीलों को राहत मिलेगी। न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों लोगों को भी समय पर सुनवाई का लाभ मिलेगा।

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