मध्यप्रदेश में कुपोषण की तस्वीर : 33% बच्चे कम वजन, 8 साल से नहीं बढ़ी आंगनवाड़ी की पोषण राशि
Ramanand Tiwari | Feb 24, 2026, 23:49 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में कुपोषण का मुद्दा गंभीर बना हुआ है। 33% बच्चे कम वजन के हैं, वहीं आंगनवाड़ी की पोषण राशि 8 साल से जस की तस है। इस पर विधानसभा में सवाल उठाए गए हैं।
BHOPAL.मध्यप्रदेश में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई जारी है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंता बढ़ा रही है। प्रदेश में 33% बच्चे कम वजन और 19% बच्चे दुबलापन की श्रेणी में हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आंकड़े इतने गंभीर हैं, तो आंगनवाड़ी केंद्रों में मिलने वाली पूरक पोषण आहार की राशि पिछले आठ वर्षों से क्यों नहीं बढ़ाई गई?
प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में सामान्य श्रेणी के बच्चों को आज भी सिर्फ 8 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। वहीं अति गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए यह राशि 12 रुपए प्रतिदिन प्रति हितग्राही तय है। गौर करने वाली बात यह है कि यह दर वर्ष 2017 में तय की गई थी। उसके बाद से अब तक कोई वृद्धि नहीं हुई।
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सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि पूरक पोषण आहार की दर का निर्धारण भारत सरकार करती है। राज्य सरकार के स्तर पर इस राशि को बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। यानी जब तक केंद्र स्तर पर निर्णय नहीं होगा, तब तक राशि बढ़ने की संभावना नहीं दिखती।
चुरहट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। उन्होंने सवाल किया कि पिछले दस वर्षों में बच्चों को कुपोषण से बचाने और आंगनवाड़ी केंद्रों में उपस्थिति बढ़ाने के लिए राशि में बढ़ोतरी क्यों नहीं की गई? साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार इस राशि को कम से कम दोगुना करने पर विचार करेगी?
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने लिखित जवाब में बताया: पूरक पोषण आहार की दर भारत सरकार तय करती है। राज्य सरकार के पास राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस जवाब से साफ है कि फिलहाल राज्य स्तर पर पहल की संभावना कम है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार प्रदेश की स्थिति इस प्रकार है: 35.7% बच्चे ठिगनापन से प्रभावित,33% बच्चे कम वजन ,19% बच्चे दुबलापन की श्रेणी में,हालांकि NFHS-4 की तुलना में कुछ सुधार दर्ज हुआ है: ठिगनापन में 1.6% सुधार,कम वजन में 2.3% सुधार, दुबलेपन में 2.6% सुधार यानी सुधार तो हुआ है, लेकिन आंकड़े अब भी गंभीर हैं।
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आज महंगाई के दौर में 8 रुपए या 12 रुपए प्रतिदिन में संतुलित और गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराना कितना व्यावहारिक है? जब कुपोषण के आंकड़े अब भी दो अंकों में हैं, तो क्या पोषण बजट पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है? प्रदेश में कुपोषण की लड़ाई जारी है, लेकिन संसाधनों में ठहराव नीति और प्राथमिकताओं पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
आंगनवाड़ी में अब भी 8 और 12 रुपए का पोषण
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दर तय करती है केंद्र सरकार
विधानसभा में उठा मुद्दा
सरकार का लिखित जवाब क्या कहता है?
प्रदेश में कुपोषण की मौजूदा स्थिति
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