एमपी गजब: क्रांतिसूर्य टंट्या भील यूनिवर्सिटी में 140 पद खाली, फिर भी चल रही पढ़ाई!
Sanjay Dhiman | Feb 24, 2026, 23:29 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्यप्रदेश के खरगोन स्थित क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय में 140 पद खाली पड़े हैं, बावजूद इसके विश्वविद्यालय में सभी कोर्स चल रहे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
News in Short
- खरगोन की क्रांतिसूर्य टंट्या भील यूनिवर्सिटी में सभी 140 स्वीकृत पद खाली पड़े हैं।
- विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने लिखित में यह जानकारी दी।
- बिना स्थाई प्रोफेसरों के ही यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स चल रहे।
- यूनिवर्सिटी फिलहाल अतिथि विद्वानों के भरोसे है, भर्ती की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं।
- यह विश्वविद्यालय खरगोन सहित पांच जिलों के 80 सरकारी कॉलेजों का संचालन करता है।
News in Detail
हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान विधायक झूमा सोलंकी ने उच्च शिक्षा विभाग से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि आदिवासियों के जननायक के नाम पर बनी इस यूनिवर्सिटी का हाल क्या है? जवाब में जो आंकड़े सामने आए, उसने सरकार की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह खबरें भी पढ़ें...
मशीन खराब, लेकिन चोरी के आरोप पर उतारे महिला के कपड़े, जबलपुर के समदड़िया मॉल में शर्मनाक घटना
टोल वसूली पर सुरक्षा की गारंटी नहीं, एमपी के जर्जर पुल Poor श्रेणी में, कभी भी बन सकते हैं खतरा
विधानसभा में गूंजा खाली पदों का शोर
इस यूनिवर्सिटी में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के 80 पद स्वीकृत हैं। सह प्राध्यापक (Associate Professor) के 40 पद और प्राध्यापक (Professor) के 20 पद खाली हैं। यानी जमीन पर हकीकत यह है कि कागजों में तो पद हैं, लेकिन क्लास में प्रोफेसर की कुर्सी खाली पड़ी है। सरकार ने यह भी साफ नहीं किया कि इन खाली पदों को आखिर कब तक भरा जाएगा।
बिना प्रोफेसर कैसे चल रहे हैं इतने सारे कोर्स?
जब सरकारी पदों पर भर्ती ही नहीं हुई, पूरी यूनिवर्सिटी का बोझ प्रतिनियुक्ति पर आए प्रोफेसर व अतिथि विद्वानों (Guest Faculty) के कंधों पर है। जानकारों का कहना है कि बिना स्थाई स्टाफ के किसी भी यूनिवर्सिटी का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। यह छात्रों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ जैसा है।
पांच जिलों के 80 कॉलेजों की जिम्मेदारी
इसे यूजीसी (UGC) अधिनियम 1956 की धारा 2F के तहत मान्यता भी मिल चुकी है। लेकिन मान्यता मिलने और पद भरने में जमीन-आसमान का अंतर दिख रहा है। इतने बड़े क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाली यूनिवर्सिटी में जब मुखिया और स्थाई स्टाफ ही न हो, तो परीक्षाओं और रिजल्ट्स की व्यवस्था कैसे सुधरेगी?
यह खबरें भी पढ़ें...
इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर एमपी कांग्रेस का विधानसभा में प्रदर्शन
मुंबई में कल भाजपा का राष्ट्रीय प्रशिक्षण, नजर एमपी के नेताओं पर
शिक्षा व्यवस्था पर उठते बड़े सवाल
क्या सिर्फ बिल्डिंग बना देने से शिक्षा का स्तर सुधर जाएगा? क्या अतिथि विद्वानों के भरोसे इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी का संचालन लंबे समय तक संभव है? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब खरगोन और आसपास के जिलों के हजारों छात्र आज सरकार से मांग रहे हैं।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari