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मध्य प्रदेश में बीते कुछ समय से पुल, डैम और ब्रिज टूटने की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। हाल ही में 22 फरवरी को जबलपुर के शहपुरा के पास रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा गिरना इसी घटिया निर्माण और लापरवाही का प्रमाण है। प्रदेश के कई जिलों में आज भी ऐसे सैकड़ों पुल अस्तित्व में हैं, जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं।
राज्य की सड़कों पर कई सारे पुल, नदी और नालों पर बने हैं। ये न सिर्फ अपना निर्धारित समय पूरी कर चुके हैं, बल्कि देखभाल की कमी के कारण जर्जर भी हो गए हैं। ये पुल कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 250 से अधिक पुल जर्जर हालत में हैं। इनसे रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। मरम्मत के दावों और कागजी कार्यवाहियों के बीच, ये स्ट्रक्चर फेलियर जनता की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।
50 साल पुराने हो चुके पुल
मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 253 पुल जर्जर हालत में हैं। इनमें से 46 पुलों को बेहद खतरनाक माना गया है। स्टेट हाइवे पर पुलों की औसत उम्र 40 साल से ज्यादा है। कई पुल तो 50 साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं।
कभी भी ढह सकते हैं
इन पुलों से रोजाना हजारों वाहन गुजर रहे हैं। इनमें भारी वाहन व यात्री बसें भी शामिल हैं। सामान्यत: पुल की उम्र 30 से 40 साल होती है। कई पुलों में लगा सरिया बाहर आ गया है। ये स्ट्रक्चर फेलियर है। सीमेंट कवरिंग खत्म हो चुकी है। पानी के संपर्क में आने से एप्रोच रोड भी खराब हो गई है। ये कभी भी अचानक ढह सकते हैं।
एमपीआरडीसी के एमडी क्या बोले?
कुछ पुल तो ऐसे हैं जिनके पास ही टोल प्लाजा लगे हैं। वहां से वाहनों से सुरक्षित यात्रा के नाम पर टोल लिया जा रहा है। एमपीआरडीसी ने अपनी रिपोर्ट में इन पुलों को खराब और बहुत खराब श्रेणी में रखा है।
एमपीआरडीसी के एमडी भरत यादव ने बताया कि इन जर्जर पुलों के निर्माण और मरम्मत के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। कुछ पुलों पर काम शुरू हो चुका है। जबकि कुछ में टेंडर प्रक्रिया चल रही है। तीन से चार महीने में सभी पुलों की मरम्मत हो जाएगी।
जर्जर हुआ पुल
पिपरिया- नर्मदापुरम मार्ग पर स्थित सेमरी हरचंद में एक 45 मीटर लंबा जर्जर पुल है। ये पुल राज्य हाइवे-67 पर है, जहां भारी वाहन और बसें रोज गुजरती हैं। यह पुल एमपीआरडीसी की सूची में Very Poor यानी बहुत खराब हालत में है। इस पुल का निर्माण नाले पर हुआ है और यह अब बहुत जर्जर हो चुका है।
पुल के ऊपर की रैलिंग भी टूट चुकी है। बीचोबीच कई जगह सीमेंट और लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। बारिश के दौरान इस नाले में पानी का बहाव बढ़ जाता है। इससे पुल की नींव कमजोर हो गई है। इस पुल से माखननगर और आसपास के कई गांवों के वाहन गुजरते हैं। वहीं कई सारे यात्री वाहन भी इस मार्ग से पचमढ़ी जाते हैं।
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12 साल पहले बाढ़ में हुआ क्षतिग्रस्त
गुना-नजीराबाद-भोपाल मार्ग के बारे में भी एक गंभीर समस्या सामने आई है। यह रास्ता ग्राम गुंजारी से गुजरता है, जो भोपाल से करीब 95 किलोमीटर दूर है। यहां का पुल जो मकसूदनगढ़-बैरसिया मार्ग (स्टेट हाइवे-23) पर है, 12 साल पहले बाढ़ में क्षतिग्रस्त गो गया था। इस पुल के ऊपर जो सीमेंट के पैनल थे, वे बह गए हैं। पुल पूरी तरह से खराब हो चुका है।
एमपीआरडीसी ने इस पर चेतावनी बोर्ड तो लगा दिया, लेकिन कोई सुधार नहीं किया है। इस मार्ग से गुना, अशोक नगर, सिरोंज और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग रोजाना आते-जाते हैं। पुल की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि रैलिंग भी गायब हो चुकी है। साथ ही स्लैब भी जर्जर हो गए हैं।
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