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Photograph: (the sootr)
News in Short
- 2025 में मध्य प्रदेश में 54 टाइगर मौतों का गंभीर मामला
- हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने केंद्र, राज्य और NTCA को नोटिस जारी किया
- पोचिंग, करंट और सड़क-रेल हादसे, मौतों की बड़ी वजह बताए गए
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सर्वाधिक अप्राकृतिक मौतें सामने आईं
- इस मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को तय
INTRO
मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती बाघों की मौतों ने अब न्यायपालिका को भी चिंतित कर दिया है। साल 2025 में 54 बाघों की मौत के आंकड़े को गंभीर मानते हुए मप्र हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से जवाब तलब किया है।
News in detail
जिस जंगल की पहचान कभी बाघों की दहाड़ से होती थी, वहां अब बाघों की मौत का आंकड़ा गूंज रहा हैं। “टाइगर स्टेट” कहलाने वाला मध्य प्रदेश आज खुद सवालों के घेरे में है। अगर देश का सबसे बड़ा टाइगर हब ही बाघों को नहीं बचा पा रहा, तो फिर उनकी सुरक्षा का भरोसा आखिर कहां किया जाए?
दुनिया भर में इस समय कुल 5,421 बाघ मौजूद हैं, जिनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं। भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी मध्य प्रदेश में दर्ज है, जहां 785 टाइगर मौजूद बताए जाते हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टाइगर हब और “टाइगर स्टेट” कहा जाता है। लेकिन इतने बड़े संरक्षण दावों के बावजूद लगातार सामने आ रही मौतों ने इस पहचान को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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हाईकोर्ट की नाराजगी और सख्त रुख
भोपाल के वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने गहरी नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की अदालत ने माना कि अगर सबसे ज्यादा टाइगर वाले राज्य में ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। इसी आधार पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
प्रोजेक्ट टाइगर के बाद सबसे डरावना रिकॉर्ड
याचिका में कहा गया है कि 1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी एक राज्य में एक ही वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में टाइगर मौतें दर्ज की गई हैं। जनवरी 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक 54 बाघों की मौत को अब तक का सबसे भयावह वार्षिक आंकड़ा बताया गया है, जिसने वन्यजीव संरक्षण की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट ने उजागर की कड़वी सच्चाई
16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 54 बाघों की मौत हुई है, जो प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद किसी एक राज्य में दर्ज की गई सबसे ज्यादा वार्षिक मौतें हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बाघों की बढ़ती संख्या के सरकारी दावों के पीछे पोचिंग, करंट लगने, रेल और सड़क हादसों के साथ-साथ कई रहस्यमयी मौतों की सच्चाई छिपी हुई है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर सबसे बड़े सवाल
दुनिया में सबसे अधिक टाइगर घनत्व वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार यहां करीब 57 प्रतिशत टाइगर मौतें अप्राकृतिक रही हैं। शिकार, करंट और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई इन मौतों ने यह साफ कर दिया है कि सबसे सुरक्षित माने जाने वाले रिजर्व भी बाघों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
इलेक्ट्रोक्यूशन और संदिग्ध घटनाएं बढ़ीं
हाल ही में उमरिया जिले के चंदिया रेंज में बिजली लाइन के पास एक टाइगर का शव मिलने से इलेक्ट्रोक्यूशन की आशंका जताई गई। इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जंगलों और रिजर्व क्षेत्रों के आसपास फैली अव्यवस्थित बिजली लाइनें बाघों के लिए जानलेवा बनती जा रही हैं। कई मामलों में समय पर जांच और जवाबदेही तय न होने के आरोप भी सामने आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय पोचिंग नेटवर्क का खुलासा
पोचिंग के खतरे की गंभीरता उस समय और बढ़ गई जब वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और एमपी टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने अंतरराष्ट्रीय तस्कर यांगचेन लखुंगपा को गिरफ्तार किया। यह आरोपी इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस में वांछित था और उसका नेटवर्क भारत, नेपाल, तिब्बत और चीन तक फैला हुआ था। इस गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया कि टाइगर शिकार एक संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध का रूप ले चुका है।
हर साल बढ़ती मौतें, आंकड़े खुद कहानी कहते हैं
मध्य प्रदेश में टाइगर मौतों का सिलसिला पिछले कई वर्षों से लगातार बढ़ता चला आ रहा है। वर्ष 2021 में 34 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। इसके बाद 2022 में यह संख्या बढ़कर 43 हो गई। साल 2023 में 45 टाइगर की मौत हुई, जबकि 2024 में 46 बाघों की जान गई। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 54 तक पहुंच गया, जो यह दिखाने के लिए काफी है कि हालात हर साल और ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं।
वन विभाग की स्वीकारोक्ति ने बढ़ाई चिंता
12 दिसंबर 2025 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने खुद स्वीकार किया कि करंट, सड़क और रेल हादसे तथा फील्ड अधिकारियों की लापरवाही टाइगर मौतों की बड़ी वजह हैं। यहां तक कि टाइगर रिजर्व के भीतर हड्डियां और शव मिलने की बात भी सामने आई, जो सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है।
पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुका है मामला
इससे पहले जबलपुर निवासी रामलाल महोबिया भी इसी मुद्दे को लेकर जनहित याचिका दायर कर चुके हैं। अब भोपाल के वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की याचिका को उसी मामले के साथ जोड़ा गया है। 20 जनवरी को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल वन्यजीवों का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।
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11 फरवरी की सुनवाई पर टिकी देश की निगाहें
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सभी की निगाहें 11 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टाइगर स्टेट में बाघों को सच में सुरक्षित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, या फिर हर साल बढ़ते मौतों के आंकड़े यूं ही इतिहास का हिस्सा बनते रहेंगे।
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बिजली के झटके बने बाघों के लिए सबसे घातक खतरा
ताजा मामला सागर जिले का है। इसी 28 दिसंबर को यहां की धना रेंज में करीब 8 साल के नर बाघ की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन जांच से पता चला कि बाघ का शव पास ही के बिजली के यंत्र के पास पाया गया।
अब तक 55 बाघों की मौत: क्या यह पर्याप्त चेतावनी नहीं है?
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में 2025 में अब तक 55 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से 57% मौतें अस्वाभाविक कारणों से हुई हैं। यानी या तो इन बाघों का शिकार हुआ या फिर किसी न किसी तरह के हादसों का शिकार हुए। बता दें कि शिकार से 8 मौतें और फसल सुरक्षा के लिए लगाए गए विद्युत जाल से 6 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है।
यह स्पष्ट है कि बाघों की मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, चाहे वह विद्युत झटका हो, सड़क या रेल दुर्घटनाएं हों या फिर शिकार की घटनाएं। क्या यह मूकदर्शक वन विभाग की असफलता का प्रतीक नहीं है? सवाल ये है कि क्या वन विभाग तब जागेगा, जब सारे बाघ खत्म हो जाएंगे?
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| Tiger mortality for the year 2025 | ||
| State | Count | Percent |
| Madhya Pradesh | 55 | 33.1% |
| Maharashtra | 38 | 22.9% |
| Karnataka | 14 | 8.4% |
| Kerala | 13 | 7.8% |
| Assam | 12 | 7.2% |
| Tamil Nadu | 9 | 5.4% |
| Uttarakhand | 7 | 4.2% |
| Uttar Pradesh | 4 | 2.4% |
| Tamilnadu | 3 | 1.8% |
| Andhra Pradesh | 2 | 1.2% |
| Chhattisgarh | 2 | 1.2% |
| Odisha | 2 | 1.2% |
| Rajasthan | 2 | 1.2% |
| Karnatatka | 1 | 0.6% |
| Telangana | 1 | 0.6% |
| West Bengal | 1 | 0.6% |
बाघों की बढ़ती संख्या के साथ मौतों के आंकड़े भी चढ़े
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजनाओं से सकारात्मक परिणाम मिले हैं, जिससे बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी। देश में सबसे अधिक बाघ इसी राज्य में हैं, इसलिए इसे 'टाइगर स्टेट' का दर्जा प्राप्त है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, बाघों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी मौतों के आंकड़े भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
किस साल कितने बाघों की मौत
साल 2021 - 34
साल 2022 - 43
साल 2023 - 45
साल 2024 - 46
साल 2025 - 55
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