1100 साल पुराना जैन मंदिर फिर होगा तैयार: विदिशा में ASI की बड़ी तैयारी, दो साल से ज्यादा चलेगा काम

Manya Jain | Sootr Creatives | Nov 02, 2026, 15:25 IST
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विदिशा के 1100 साल पुराने जैन मंदिर का होगा संरक्षण, ASI फिर से संवारेगा ऐतिहासिक धरोहर
विदिशा के 1100 साल पुराने जैन मंदिर का होगा संरक्षण, ASI फिर से संवारेगा ऐतिहासिक धरोहर

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में 1100 साल पुराने जैन मंदिर को नया रूप मिलने वाला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसके संरक्षण की तैयारी कर रहा है। इसके लिए मंदिर को सावधानी से खोला जाएगा। फिर हर पत्थर को सुरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद सभी पत्थरों को उनकी सही जगह पर लगाया जाएगा।

यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है। इसकी बनावट और पुरानी नक्काशी इसे खास बनाती है। मंदिर का कुछ हिस्सा प्राकृतिक चट्टान काटकर बनाया गया है। वहीं, बाकी हिस्सा पत्थरों से तैयार किया गया है। इसे 9वीं-10वीं सदी का प्रतिहार कालीन स्मारक माना जाता है।

मंदिर का संरक्षण करना आसान नहीं होगा। इसके आसपास गहरी खाई है। यहां काम करने के लिए जगह भी कम है। ऐसे में ASI को काफी सावधानी बरतनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में दो साल से ज्यादा समय लग सकता है।

पहले मंदिर के हर पत्थर पर लगाए जाएंगे निशान

मंदिर के जीर्णोद्धार का काम उसे खोलने से शुरू होगा। लेकिन इससे पहले हर पत्थर की पहचान की जाएगी। सभी पत्थरों पर अलग-अलग निशान लगाए जाएंगे। इससे पता चलेगा कि कौन-सा पत्थर कहां लगा था।

मंदिर की नक्काशी का भी पूरा रिकॉर्ड तैयार होगा। इसके लिए हाथ से जानकारी लिखी जाएगी। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया को Documentation कहा जाता है। इसका मकसद मंदिर के हर हिस्से की जानकारी सुरक्षित रखना है। मंदिर को दोबारा खड़ा करते समय इन रिकॉर्ड की मदद ली जाएगी। इससे पुराने पत्थरों और उनकी नक्काशी को सही जगह लगाया जा सकेगा।

विदिशा ग्यारसपुर जैन मंदिर
विदिशा ग्यारसपुर जैन मंदिर

मंदिर के नीचे बनेगा नया प्लेटफॉर्म

मंदिर जिस जगह बना है, वहां की जमीन कमजोर बताई गई है। इसलिए ASI पहले इसके नीचे नया प्लेटफॉर्म बनाएगा।

यह प्लेटफॉर्म मंदिर के पुराने ढांचे को सहारा देगा। इसके बाद मंदिर को सावधानी से खोला जाएगा। फिर पुराने पत्थरों को सुरक्षित तरीके से दोबारा लगाया जाएगा।

योजना के मुताबिक, मंदिर को नए प्लेटफॉर्म पर फिर से बनाया जाएगा। कोशिश रहेगी कि मंदिर की पुरानी बनावट और ऐतिहासिक हिस्से सुरक्षित रहें।

दो साल से ज्यादा चल सकता है काम

मंदिर के संरक्षण का काम दो साल से ज्यादा चल सकता है। सबसे पहले मंदिर के ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इसके बाद एक-एक पत्थर को सावधानी से हटाया जाएगा।

हर पत्थर का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद उसे सुरक्षित रखा जाएगा। फिर तय योजना के मुताबिक मंदिर को दोबारा बनाया जाएगा।

यह काम सामान्य मरम्मत से काफी अलग है। इसमें मंदिर के हर पुराने हिस्से की पहचान करनी होगी। साथ ही, उसे सुरक्षित भी रखना होगा। मंदिर की नक्काशी और असली बनावट को बचाना भी बड़ी चुनौती होगी।

काम पूरा होने के बाद मंदिर को फिर से दर्शकों के लिए खोला जाएगा। हालांकि, अभी इसकी कोई तय तारीख सामने नहीं आई है।

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल लोक के बाद अब कालभैरव लोक बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। भैरवगढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री कालभैरव मंदिर परिसर में करीब 164 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना और दर्शन के लिए आने-जाने की व्यवस्था को आसान बनाना है।
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दशकों से मंदिर को संरक्षण का इंतजार था

यह प्रतिहार काल का मंदिर लंबे समय से संरक्षण का इंतजार कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, 1930 में तत्कालीन ग्वालियर रियासत ने भी इसे बचाने की कोशिश की थी।

हालांकि, उस समय इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हो पाया। इसके बाद भी मंदिर के संरक्षण का इंतजार जारी रहा।

अब ASI ने मंदिर को बचाने के लिए नई योजना बनाई है। इसके तहत मंदिर को खोला जाएगा। फिर पत्थरों की पहचान कर उन्हें दोबारा जोड़ा जाएगा।

इसलिए यह काम सिर्फ मंदिर की मरम्मत तक सीमित नहीं है। इसका मकसद इसकी पुरानी बनावट और ऐतिहासिक पहचान को बचाना भी है।

चट्टान में तराशा गया है मंदिर का कुछ हिस्सा

विदिशा का यह जैन मंदिर अपनी बनावट के लिए भी खास है। इसका कुछ हिस्सा प्राकृतिक चट्टान को काटकर बनाया गया है। वहीं, कुछ हिस्से पत्थरों को जोड़कर तैयार किए गए हैं।

ऐसे मंदिर का संरक्षण करना आसान नहीं है। इसके लिए काफी सावधानी बरतनी होगी। मंदिर के आसपास गहरी खाई है। साथ ही, काम करने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं है।

ऐसे में पत्थरों को हटाना और दोबारा सही जगह लगाना चुनौती होगी। इसलिए हर पत्थर का रिकॉर्ड रखना जरूरी है। इससे मंदिर को दोबारा बनाते समय पुरानी बनावट समझने में मदद मिलेगी।

विदिशा ग्यारसपुर जैन मंदिर
विदिशा ग्यारसपुर जैन मंदिर

आम लोगों के लिए फिलहाल बंद है मंदिर

यह मंदिर काफी समय से आम लोगों के लिए बंद है। संरक्षण का काम पूरा होने तक इसे खोलने की योजना नहीं है।

मिली जानकारी के मुताबिक, पहले नया प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। इसके बाद मंदिर को सुरक्षित तरीके से खोलने और फिर से खड़ा करने का काम होगा।

इस पूरी प्रक्रिया में दो साल से ज्यादा समय लग सकता है। काम पूरा होने के बाद मंदिर को फिर से आम लोगों के लिए खोला जा सकता है।

क्यों खास है यह संरक्षण कार्य?

विदिशा का यह मंदिर मध्य प्रदेश की पुरानी धरोहरों में शामिल है। करीब 1100 साल पुराने मंदिर में प्रतिहार काल की कला दिखती है।

ऐसे पुराने मंदिर सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं रखते। इनसे उस समय की कला, निर्माण शैली और इतिहास का पता चलता है।

समय पर संरक्षण नहीं होने से इनकी पुरानी बनावट खराब हो सकती है। नक्काशी और पत्थरों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए हर पत्थर का रिकॉर्ड बनाना जरूरी है। इससे उन्हें सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

ASI की यह योजना मंदिर को दोबारा खड़ा करने का अहम कदम है। इससे आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर को देख सकेंगी।

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