जून में पूरा होना था जयपुर जंक्शन का 717 करोड़ का काम, नवंबर में भी अधूरा, दिवाली पर 13 दिन के लिए खुलेगा दूसरा गेट
Raghvendra Singh Rathore | Nov 02, 2026, 13:35 IST
जयपुर जंक्शन का ₹717 करोड़ का काम डेडलाइन के बाद भी अधूरा
जयपुर जंक्शन के 717 करोड़ के नवीनीकरण की डेडलाइन निकल चुकी है, लेकिन यात्रियों को अब तक सभी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। रेलवे ने जून 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य बताया था, जबकि टेंडर रिकॉर्ड में 24 जुलाई की तारीख दर्ज है। अब दिवाली की भीड़ के बीच हसनपुरा का दूसरा गेट 4 से 16 नवंबर तक केवल निकास के लिए खोला जाएगा।
जयपुर जंक्शन को आधुनिक बनाने का काम करीब चार साल से चल रहा है। रेलवे ने जून 2026 तक नवीनीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा था। यह डेडलाइन निकल चुकी है, लेकिन करीब ₹717 करोड़ की परियोजना अब भी अधूरी है। हसनपुरा की ओर बने नए स्टेशन परिसर का काम लंबे समय से अंतिम चरण में बताया जा रहा है, लेकिन यात्रियों के लिए नियमित प्रवेश की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है।
अब दिवाली और छठ पूजा पर भीड़ बढ़ने के बाद रेलवे इसी दूसरे गेट को 13 दिन के लिए खोलने जा रहा है। यहां से यात्री केवल बाहर निकल सकेंगे। स्टेशन में प्रवेश के लिए उन्हें पहले की तरह मुख्य द्वार पर ही जाना होगा। सवाल यह है कि जब रेलवे को त्योहारों पर यात्रियों की भारी भीड़ होने का पहले से अनुमान था, तो नए गेट को समय रहते पूरी तरह चालू क्यों नहीं किया गया?
जयपुर जंक्शन के पुनर्विकास का काम दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था। उस समय रेलवे ने जून 2026 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य बताया था। उत्तर पश्चिम रेलवे के जुलाई 2025 के निर्माण रिकॉर्ड में मुख्य निर्माण ठेके की समाप्ति तारीख 24 जुलाई 2026 दर्ज है।
यह टेंडर गिरधारी लाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को ₹577.77 करोड़ में दिया गया था। वहीं, पूरी पुनर्विकास परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹717 करोड़ बताई गई है। अब नवंबर शुरू हो चुका है। टेंडर में दर्ज समयसीमा को तीन महीने से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन स्टेशन का निर्माण कार्य जारी है।
हसनपुरा की ओर बन रहे नए स्टेशन भवन को लेकर रेलवे पहले भी काम जल्द पूरा होने की जानकारी दे चुका है। सितंबर 2025 में रेलवे ने बताया था कि दूसरे प्रवेश द्वार की बिल्डिंग और बेसमेंट पार्किंग का काम अंतिम चरण में है। अगस्त 2026 में भी दूसरे प्रवेश द्वार से जुड़े निर्माण कार्यों के जल्द पूरा होने की बात सामने आई थी।
रेल मंत्रालय ने अगस्त 2026 में जानकारी दी थी कि दूसरे प्रवेश द्वार की ओर बेसमेंट और पहुंच मार्ग का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, स्टेशन के अन्य हिस्सों में निर्माण जारी था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब दूसरे गेट से जुड़े कई काम महीनों पहले पूरे हो चुके थे, तो यात्रियों के लिए नियमित प्रवेश शुरू करने में देरी क्यों हो रही है?
रेलवे ने 4 से 16 नवंबर तक हसनपुरा की ओर बने दूसरे गेट को केवल निकास के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इस दौरान यात्री यहां से स्टेशन के बाहर जा सकेंगे, लेकिन प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। रेलवे का कहना है कि इससे मुख्य प्रवेश द्वार पर यात्रियों का दबाव कम होगा। यह व्यवस्था फिलहाल 13 दिन के लिए प्रस्तावित है। इसके बाद दूसरे गेट का नियमित संचालन कब शुरू होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
रेलवे को पहले से अनुमान था कि दिवाली और छठ पूजा के दौरान जयपुर जंक्शन पर रोजाना दो से ढाई लाख यात्री पहुंच सकते हैं। सामान्य दिनों में यह संख्या करीब 80 हजार से एक लाख रहती है। इसके बावजूद दूसरे गेट की पूरी सुविधा त्योहारों से पहले शुरू नहीं हो सकी। अब बढ़ती भीड़ के बीच अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है।
प्लेटफॉर्म पर बढ़ी भीड़,
जयपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म, फुट ओवरब्रिज और एस्केलेटर पर यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। कुछ यात्री सामान की एक्स-रे जांच कराए बिना भी निकलते नजर आए। इससे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जयपुर मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने यात्रियों की आवाजाही और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद होल्डिंग एरिया का काम तेज करने के निर्देश दिए गए।
रेलवे ने 4 से 16 नवंबर के बीच 150 से अधिक अतिरिक्त आरपीएफ जवानों की तैनाती, बैरिकेडिंग और सीसीटीवी से निगरानी की योजना बनाई है। होल्डिंग एरिया में यात्रियों को रोककर ट्रेन के समय के अनुसार प्लेटफॉर्म पर भेजा जाएगा। हालांकि, सवाल यह भी है कि जब त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ने का अनुमान पहले से था, तो होल्डिंग एरिया और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था पहले क्यों तैयार नहीं की गई?
जयपुर जंक्शन के पुनर्विकास में नए प्रवेश और निकास भवन, एयर कॉनकोर्स, लिफ्ट, एस्केलेटर और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। लेकिन घोषित समयसीमा निकलने के बाद भी यात्रियों को इन सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। निर्माण कार्य के कारण स्टेशन पर आवाजाही की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
फिलहाल त्योहारों की भीड़ संभालने के लिए रेलवे ने दूसरे गेट से अस्थायी निकास की योजना बनाई है। लेकिन करीब चार साल से चल रहे पुनर्विकास के बाद यात्रियों को नए स्टेशन की पूरी सुविधा कब मिलेगी, इसका जवाब अभी बाकी है।
अब दिवाली और छठ पूजा पर भीड़ बढ़ने के बाद रेलवे इसी दूसरे गेट को 13 दिन के लिए खोलने जा रहा है। यहां से यात्री केवल बाहर निकल सकेंगे। स्टेशन में प्रवेश के लिए उन्हें पहले की तरह मुख्य द्वार पर ही जाना होगा। सवाल यह है कि जब रेलवे को त्योहारों पर यात्रियों की भारी भीड़ होने का पहले से अनुमान था, तो नए गेट को समय रहते पूरी तरह चालू क्यों नहीं किया गया?
रेलवे के रिकॉर्ड में 24 जुलाई की डेडलाइन, नवंबर में भी काम जारी
यह टेंडर गिरधारी लाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को ₹577.77 करोड़ में दिया गया था। वहीं, पूरी पुनर्विकास परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹717 करोड़ बताई गई है। अब नवंबर शुरू हो चुका है। टेंडर में दर्ज समयसीमा को तीन महीने से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन स्टेशन का निर्माण कार्य जारी है।
एक साल पहले अंतिम चरण में था दूसरा गेट, अब भी प्रवेश बंद
रेल मंत्रालय ने अगस्त 2026 में जानकारी दी थी कि दूसरे प्रवेश द्वार की ओर बेसमेंट और पहुंच मार्ग का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, स्टेशन के अन्य हिस्सों में निर्माण जारी था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब दूसरे गेट से जुड़े कई काम महीनों पहले पूरे हो चुके थे, तो यात्रियों के लिए नियमित प्रवेश शुरू करने में देरी क्यों हो रही है?
भीड़ बढ़ी तो याद आया दूसरा गेट, 13 दिन मिलेगी आधी सुविधा
रेलवे को पहले से अनुमान था कि दिवाली और छठ पूजा के दौरान जयपुर जंक्शन पर रोजाना दो से ढाई लाख यात्री पहुंच सकते हैं। सामान्य दिनों में यह संख्या करीब 80 हजार से एक लाख रहती है। इसके बावजूद दूसरे गेट की पूरी सुविधा त्योहारों से पहले शुरू नहीं हो सकी। अब बढ़ती भीड़ के बीच अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है।
प्लेटफॉर्म पर बढ़ी भीड़, DRM के निरीक्षण के बाद तेज हुई तैयारी
रेलवे ने 4 से 16 नवंबर के बीच 150 से अधिक अतिरिक्त आरपीएफ जवानों की तैनाती, बैरिकेडिंग और सीसीटीवी से निगरानी की योजना बनाई है। होल्डिंग एरिया में यात्रियों को रोककर ट्रेन के समय के अनुसार प्लेटफॉर्म पर भेजा जाएगा। हालांकि, सवाल यह भी है कि जब त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ने का अनुमान पहले से था, तो होल्डिंग एरिया और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था पहले क्यों तैयार नहीं की गई?
करोड़ों की परियोजना अधूरी, देरी की जिम्मेदारी किसकी?
फिलहाल त्योहारों की भीड़ संभालने के लिए रेलवे ने दूसरे गेट से अस्थायी निकास की योजना बनाई है। लेकिन करीब चार साल से चल रहे पुनर्विकास के बाद यात्रियों को नए स्टेशन की पूरी सुविधा कब मिलेगी, इसका जवाब अभी बाकी है।
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