MP में कैदियों के लिए बदले नियम: खाने में नखरे किए तो खुद बनाना पड़ेगा भोजन
Manya Jain | Jun 13, 2026, 18:57 IST
madhyapradesh prison new rules laws changed
जेलों में 1968 से चले आ रहे पुराने नियम अब बदल गए हैं। 132 जेलों के 48 हजार कैदियों के टॉयलेट, कपड़े और खाने की व्यवस्था में नए और सख्त नियम लागू होंगे।
समझें क्या है पूरा मामला
- साल 1968 से चले आ रहे पुराने नियमों की जगह अब नए नियम लागू होंगे।
- कैदियों के टॉयलेट, खाना पकाने, कपड़े धोने और उनकी कैटेगरी को बदला है।
- खाने पर भेदभाव की आपत्ति करने वाले कैदी को खुद सबके लिए खाना बनाना होगा।
- प्रदेश की 132 जेलों में बंद करीब 48 हजार कैदियों पर यह नियम लागू होंगे।
58 साल बाद क्यों बदला मैन्युअल
राज्य सरकार ने कारागार अधिनियम (Prisons Act), 1894 की धारा 59 की शक्तियों का उपयोग करते हुए यह संशोधन लागू किया है।
खाने में आपत्ति की तो खुद बनाओ
उसे सभी कैदियों के लिए खाना बनाना होगा। यह नियम जाति या धर्म के आधार पर खाने में भेदभाव रोकने के लिए बनाया गया है।
रसोई में काम करेंगे सिर्फ स्वस्थ कैदी
रोटी बनाने की भी एसओपी तय
सुबह का नाश्ता बनाने वाले कैदियों को तय समय से पहले बैरक से निकलने की अनुमति मिलेगी। इसके लिए मुख्य प्रहरी की मंजूरी जरूरी होगी।
हर सेल में टॉयलेट अनिवार्य
दिव्यांग कैदियों के लिए हर वार्ड में वेस्टर्न सीट का शौचालय होगा। हर शौचालय के बाहर पानी की टंकी और साबुन रहेगा।
आदतन अपराधी की नई परिभाषा
अगर कोई व्यक्ति लगातार पांच साल में अलग-अलग मौकों पर दो से अधिक बार सजा पा चुका है और वह सजा अपील में रद्द नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। इस पांच साल की गिनती में जेल में बिताया वक्त नहीं जोड़ा जाएगा।
कपड़े और स्वच्छता के नए नियम
48 हजार कैदी, क्षमता से ज्यादा
उत्तरप्रदेश और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ऐसा तीसरा राज्य है जहां जेलें सबसे ज्यादा भरी हुई हैं।
सरकार की मंशा क्या है
FAQ
- MP जेल मैन्युअल में क्या बड़े बदलाव हुए हैं?
1968 से चले आ रहे जेल मैन्युअल में टॉयलेट, खाना, कपड़े और कैदियों की कैटेगरी के नियम बदले गए हैं। हर सेल में शौचालय अनिवार्य हुआ और रोटी बनाने की एसओपी पहली बार तय हुई। यह बदलाव कारागार अधिनियम 1894 की धारा 59 के तहत लागू हुए हैं। - अगर कोई कैदी खाना खाने से मना करे तो क्या होगा?
अगर कोई कैदी भेदभाव के आधार पर बिना कारण खाने से मना करता है तो उसे सभी कैदियों के लिए खाना बनाने की ड्यूटी पर लगाया जाएगा। यह नियम जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए बनाया गया है। - MP में कितने कैदी हैं और जेलों की क्षमता क्या है?
प्रदेश की 132 जेलों में करीब 48 हजार कैदी बंद हैं जबकि कुल क्षमता करीब 30 हजार है। लगभग 50 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं। UP और बिहार के बाद MP में जेलें सबसे ज्यादा भरी हुई हैं।
MP के कॉलेजों में काउंसलर जरूरी: 6 से 8 जुलाई के बीच शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग
New Education Policy 2020 से बदल रहा पढ़ाई का तरीका, जानिए बड़े बदलाव
एनटीए का बड़ा फैसला: अब नीट यूजी री-एग्जाम में मिलेगा 15 मिनट एक्सट्रा समय
21 जून को नीट री-एग्जाम: वायुसेना विमानों की निगरानी में होगी परीक्षा
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari