नवरात्रि के दूसरे दिन बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में विशेष श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ी भक्तों की भीड़
Kaushiki | Sept 23, 2025, 09:09 IST
mahakal-bhasm-aarti-navratri-shringar
नवरात्रि के दूसरे दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का देवी स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान, भक्तों ने पंचामृत अभिषेक और फूलों, चंदन व रजत मुकुट से सजे बाबा महाकाल के दिव्य रूप के दर्शन किए..
मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में नवरात्रि का उत्साह चरम पर है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, मंगलवार की सुबह तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए।
नवरात्रि के दूसरे दिन, महाकाल भस्म आरती का आयोजन विशेष श्रृंगार के साथ किया गया, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर भगवान महाकाल को एक अनूठे और आकर्षक देवी स्वरूप में श्रृंगार में सजाया गया। यह विशेष श्रृंगार न केवल धार्मिक महत्व रखता है।
![73a03064-5f39-4977-a411-ce4f87c017e9_1758594073-310908]()
मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पारंपरिक पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया।
बाबा का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से किया गया, जो पूजन का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस पवित्र अनुष्ठान के दौरान, नंदी हॉल में स्थित नंदी जी का भी स्नान और पूजन किया गया, जो महाकाल मंदिर में एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
ये खबर भी पढ़ें...नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए लगाएं चीनी का भोग, जानें पूजा के नियम
मंगलवार तड़के हुई भस्म आरती के लिए, त्रिनेत्रधारी भगवान महाकाल को एक अद्भुत रूप में सजाया गया। पुजारियों ने भगवान का श्रृंगार उतारने के बाद पंचामृत पूजन और कपूर आरती की। इसके बाद, बाबा महाकाल को चंदन का त्रिपुण्ड, रुद्राक्ष की माला और रजत मुकुट अर्पित किया गया।
भगवान को रजत का चंद्र, त्रिशूल और भांग भी चढ़ाई गई जो उनके स्वरूप का अभिन्न अंग है। विशेष रूप से नवरात्रि के दूसरे दिन बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के लिए एक विशेष आकर्षण था।
उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित फूलों की माला भी पहनाई गई। यह विशेष श्रृंगार भक्तों के बीच उत्साह और श्रद्धा का संचार करता है और वे इस अद्वितीय रूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
ये खबर भी पढ़ें...क्या कलश स्थापना के बिना अधूरी है नवरात्रि की पूजा, जानें बिना कलश के मां दुर्गा को कैसे करें प्रसन्न
जब भगवान महाकाल का श्रृंगार पूरा हो गया, तब झाल-मंजीरे और डमरू की ध्वनि के साथ महाकाल भस्म आरती शुरू हुई। इस दौरान, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
यह भस्म अर्पित करने के बाद, भगवान अपने निराकार रूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दिव्य क्षण को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।
फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया, जिससे यह पूरा आयोजन और भी शुभ हो गया। महाकाल भस्म आरती एक ऐसा अनुभव है जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
ये खबर भी पढ़ें...
पूजा-पाठ के बाद क्यों जरूरी है आरती करना? जानें इसके धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण
नवरात्रि 2025 के रंग में रंगे भक्त : मैहर में भक्तों का सैलाब, देवी मंदिरों में लगे आस्था के मेले
नवरात्रि के दूसरे दिन, महाकाल भस्म आरती का आयोजन विशेष श्रृंगार के साथ किया गया, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर भगवान महाकाल को एक अनूठे और आकर्षक देवी स्वरूप में श्रृंगार में सजाया गया। यह विशेष श्रृंगार न केवल धार्मिक महत्व रखता है।
73a03064-5f39-4977-a411-ce4f87c017e9_1758594073-310908
पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन
बाबा का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से किया गया, जो पूजन का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस पवित्र अनुष्ठान के दौरान, नंदी हॉल में स्थित नंदी जी का भी स्नान और पूजन किया गया, जो महाकाल मंदिर में एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
ये खबर भी पढ़ें...नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए लगाएं चीनी का भोग, जानें पूजा के नियम
देवी स्वरूप में महाकाल का श्रृंगार
भगवान को रजत का चंद्र, त्रिशूल और भांग भी चढ़ाई गई जो उनके स्वरूप का अभिन्न अंग है। विशेष रूप से नवरात्रि के दूसरे दिन बाबा महाकाल का देवी स्वरूप में श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के लिए एक विशेष आकर्षण था।
उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित फूलों की माला भी पहनाई गई। यह विशेष श्रृंगार भक्तों के बीच उत्साह और श्रद्धा का संचार करता है और वे इस अद्वितीय रूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
ये खबर भी पढ़ें...क्या कलश स्थापना के बिना अधूरी है नवरात्रि की पूजा, जानें बिना कलश के मां दुर्गा को कैसे करें प्रसन्न
भस्म आरती और भक्तों की उमड़ी भीड़
यह भस्म अर्पित करने के बाद, भगवान अपने निराकार रूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दिव्य क्षण को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।
फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया, जिससे यह पूरा आयोजन और भी शुभ हो गया। महाकाल भस्म आरती एक ऐसा अनुभव है जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
ये खबर भी पढ़ें...
पूजा-पाठ के बाद क्यों जरूरी है आरती करना? जानें इसके धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण
नवरात्रि 2025 के रंग में रंगे भक्त : मैहर में भक्तों का सैलाब, देवी मंदिरों में लगे आस्था के मेले
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari