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News In Short
विवाद: महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
आरोप: मंदिर प्रशासन वीआईपी और विशेष वर्ग को प्रवेश देता है, जबकि आम श्रद्धालुओं को रोका जाता है।
हाईकोर्ट का निर्णय: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, यह मामला व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा बताया है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: याचिकाकर्ता ने समान प्रवेश व्यवस्था की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया है।
संवैधानिक समानता: यह मामला आर्टिकल 14 (संवैधानिक समानता) के दायरे में आ गया, जिसका फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा।
News In Detail
महाकालेश्वर मंदिर गर्भगृह में प्रवेश को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि मंदिर प्रशासन कुछ चुनिंदा वीआईपी और खास लोगों को गर्भगृह में जाने की इजाजत देता है, जबकि आम श्रद्धालुओं को प्रवेश से रोका जाता है। इसी वजह से याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री पहले हाईकोर्ट गए थे और अब उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पहुंचे हैं।
दरअसल, इसी मुद्दे पर पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में यह मांग की गई थी कि सभी श्रद्धालुओं के लिए समान व्यवस्था हो और जिला कलेक्टर को इस मामले में निर्देश दिए जाएं।
लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि यह मामला आस्था से जुड़ा है। मंदिर की व्यवस्था (Ujjain Mahakaleshwar Management) तय करना जिला प्रशासन का काम है। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सूत्र Knowledge
- जानकारी के मुताबिक, महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश को लेकर कोई लिखित, सार्वजनिक और समान नीति नहीं है।
- अनुमति पूरी तरह विवेकाधीन है, जिससे भेदभाव की गुंजाइश बनी रहती है।
- यही कारण है कि मामला अब संवैधानिक समानता (Article 14) के दायरे में पहुंच गया है।
अभी क्या है वीआईपी दर्शन की व्यवस्था
महाकालेश्वर मंदिर (गर्भगृह में VIP की एंट्री) में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था है। आप इसे ऑनलाइन बुकिंग या काउंटर से बुक कर सकते हैं। वीआईपी दर्शन में एक अलग कतार होती है, जिससे आप करीब से दर्शन कर सकते हैं। लेकिन गर्भगृह में प्रवेश के लिए कलेक्टर की अनुमति जरूरी होती है।
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बुकिंग प्रक्रिया
वीआईपी दर्शन टिकट की कीमत ₹250 प्रति व्यक्ति है।
टिकट बुक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाएं।
मंदिर पहुंचकर त्रिनेत्र कंट्रोल रूम में फॉर्म भरें, जिसमें दान का विवरण भी मांगा जा सकता है।
ऑफलाइन काउंटर पर भी टिकट मिल सकती है, लेकिन भीड़भाड़ में ऑनलाइन बुकिंग ज्यादा सुविधाजनक है।
​दर्शन नियम
- दर्शन के लिए नंदी हॉल या गणेश मंडपम में से एक चुनें।
- पारंपरिक वस्त्र पहनकर आएं – पुरुष धोती-कुर्ता और महिलाएं साड़ी या सलवार पहनें।
- स्लॉट से 45 मिनट पहले मंदिर पहुंचें और अपनी आईडी साथ लाएं।
- गर्भगृह में वीआईपी के लिए विशेष प्रवेश है, आम श्रद्धालुओं को वहां जाने की अनुमति नहीं है।
समय और शुल्क
मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है, VIP स्लॉट दिनभर उपलब्ध। शीघ्र दर्शन ₹500 तक हो सकता है। सावन जैसे उत्सवों में पहले बुक करें।
सूत्र Expert
अधिवक्ता चर्चित शास्त्री का कहना है कि देश के कई बड़े शिव मंदिरों में सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह (महाकाल मंदिर गर्भगृह) में जाकर जल अर्पित करने की परंपरा है। अगर महाकाल मंदिर में कुछ खास लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है, तो आम लोगों को रोकना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें यही सवाल उठाया गया है।
काफी बढ़ गई भक्तों की संख्या
महाकाल लोक (ujjain mahakaleshwar jyotirlinga) बनने के बाद उज्जैन में भक्तों की संख्या काफी बढ़ गई है। लेकिन 2023 के बाद मंदिर समिति ने गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
उस समय कहा गया था कि सावन खत्म होने के बाद पुरानी व्यवस्था लागू हो जाएगी, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। गर्भगृह में प्रवेश को लेकर ये मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
अब भक्त सिर्फ गणेश मंडपम और नंदी हॉल से ही बाबा महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं, जबकि दूर-दूर से आए भक्तों का मन हमेशा ये होता है कि वे बाबा महाकाल को पास से देख सकें। अब ये सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही बताएगा कि भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश का अधिकार मिलेगा या नहीं।
आगे क्या
- यदि सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करता है, तो गर्भगृह में प्रवेश पर समान नीति बनानी पड़ सकती है।
- वीआईपी व्यवस्था पर रोक लग सकती है।
- फैसला आने से देश के अन्य बड़े मंदिरों की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है।
Documents
हाईकोर्ट का आदेश (याचिका निरस्तीकरण)
सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिका
निष्कर्ष (Conclusion)
यह मामला केवल गर्भगृह प्रवेश का नहीं, बल्कि आस्था में समानता और संवैधानिक अधिकारों की परीक्षा है। अब फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है कि धर्मस्थलों में नियम समान होंगे या विवेकाधीन।
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