एमपी के इस गांव में आधे से ज्यादा लड़के कुंवारे, लड़की देने को कोई तैयार नहीं, जानें चौंकाने वाली वजह

Vikram Jain | Mar 29, 2025, 20:56 IST
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mandla pipartola village water scarcity marriage issues
सांकेतिक फोटो

मंडला के पीपरटोला गांव में कुंवारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां युवाओं की शादियां नहीं हो पा रही हैं। इस गांव में कोई भी लड़की देने को तैयार नहीं हो रहा है। जानें आखिर क्यों इस गांव के युवकों की नहीं हो पा रही शादी...

भीषण गर्मी पड़ने से पहले ही मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में जल संकट गहराने लगा है। साथ ही पानी की किल्लत कई लोगों के लिए परेशानी भी खड़ी कर रही है। मंडला जिले के पीपरटोला गांव में पानी की गंभीर समस्या ने न केवल यहां के जीवन को मुश्किल बना दिया है, बल्कि शादी के मामलों को भी प्रभावित कर दिया है। इस गांव में कुंवारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पानी की कमी के कारण लड़कियां इस गांव शादी के तैयार नहीं हैं। रिश्ते ठुकराए जा रहे हैं। इस गांव के लोग पानी के लिए 1 किलोमीटर दूर स्थित हालोन नदी से पानी भरने पर मजबूर हैं। प्रशासन से कई बार शिकायत की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।

पीपरटोला गांव में पानी के लिए संघर्ष

मंडला जिले के बिछिया विधानसभा क्षेत्र के पीपरटोला गांव में पानी की किल्लत इतनी गंभीर है कि गांव के आधे से ज्यादा युवक कुंवारे हैं। इसका कारण गांव में पानी का भारी संकट है। गांव में किसी भी युवक की शादी के लिए रिश्ते आते हैं, लेकिन जब पानी के बारे में पूछा जाता है, तो रिश्ते की बात ही रुक जाती है। गांव के लोग नदी से रेत के बीच से पानी निकालकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यहां शादी हुई तो उनकी बेटी प्यासी मर जाएगी। यही नहीं, जो लोग शादीशुदा हैं उनकी पत्नियां भी घर और गांव छोड़कर जाने को मजबूर हैं। युवाओं के लिए शादी के लिए रिश्ते तो आते हैं लेकिन पानी की परेशानी कैंसिल हो जाते हैं।

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युवक कुंवारे और महिलाएं घर छोड़ने को मजबूर

ग्रामीणों बताते हैं कि एक हजार लोगों से अधिक की आबादी वाले गांव में पानी की किल्लत बढ़ते जा रही है। गांव के लोग 1 किलोमीटर दूर हालोन नदी से रेत के बीच छानकर पानी भरने के मजबूर हैं। इस गांव के लोग कई साल से घाट से नीचे उतरकर झिरिया से छने हुए पानी को भरकर ला रहे हैं। इसी समस्या के कारण इस गांव के लड़कों को कोई अपनी बेटी नहीं देना चाहता। लड़का कितना ही सुंदर या होशियार क्यों हो जल संकट के कारण रिश्ते के लिए लोग इस गांव में बेटी ब्याहने डरते हैं। ये ऐसी समस्या है, जिससे गांव के युवा सालों से जूझ रहे हैं।

पानी की किल्लत से शादी के रिश्ते हो रहे प्रभावित

ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव में युवाओं के लिए शादी के रिश्ते तो कई बार आए लेकिन सभी ने कहा कि इस गांव में पानी की किल्लत हम अपनी बेटी की शादी नहीं करेंगे। अगर शादी कर दी तो तो वो प्यास से मर जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि पूरे गांव में जलसंकट है। कई घरों की महिलाएं भी घर और अपने पति को छोड़कर जाने को मजबूर हैं।

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नल-जल योजना के बाद भी पानी की समस्या

बड़ी बात ये भी है कि पीपरटोला गांव में नल-जल योजना के तहत नल तो लगे हैं, लेकिन वे धूल खा रहे हैं। इसके कारण लोग 1 किलोमीटर दूर घाट से पानी भरने के लिए जाते हैं, जिससे उनका पूरा दिन सिर्फ पानी लाने में ही निकल जाता है। इस समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है और महिलाएं दिनभर पानी लाने में व्यस्त रहती हैं, जिससे घर के अन्य कामकाज पर भी असर पड़ता है।

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जिम्मेदारों ने नहीं दिखाई गंभीरता

ग्रामीणों ने इस समस्या को सरपंच, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों तक से कई बार उठाया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिला है। अब मीडिया की सक्रियता के बाद पीएचई अधिकारी ने जल्द ही पानी मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है। गांव के लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान दे और उन्हें जल्द राहत मिले। यह केवल पीपरटोला गांव की समस्या नहीं है, बल्कि मंडला जिले के कई अन्य गांवों में भी पानी की गंभीर किल्लत है।

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5 मुख्य बिंदुओं से समझें पूरा मामला

✅ पानी की किल्लत: पीपरटोला गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि युवक कुंवारे हैं और महिलाएं घर छोड़ने को मजबूर हैं।

✅ रिश्ते प्रभावित: गांव में पानी की कमी के कारण शादी के रिश्ते भी टूट रहे हैं, क्योंकि लोग पानी के बारे में पूछते ही रिश्ते ठुकरा देते हैं।

✅ 1 किलोमीटर दूर से पानी लाना: ग्रामीणों को पानी के लिए 1 किलोमीटर दूर घाट से पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका पूरा दिन बर्बाद हो जाता है।

✅ नल-जल योजना की असफलता: गांव में नल लगे हैं, लेकिन वे काम नहीं कर रहे, जिससे पानी की समस्या और बढ़ गई है।

✅ प्रशासन का आश्वासन: शिकायतों के बाद पीएचई अधिकारी ने पानी मुहैया कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

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