मीनाक्षी नामांकन विवाद पर सुप्रीम सुनवाई कल, कांग्रेस बोली- रिजल्ट घोषित न करें
Amresh Kushwaha | Jun 11, 2026, 14:30 IST
मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट कल सुनवाई करेगा, जबकि कांग्रेस ने परिणाम रोकने की मांग की है।
मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में इस समय कानूनी और राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तुरंत कोई अंतरिम आदेश देने के बजाय सुनवाई को कल यानी शुक्रवार के लिए टाल दिया है।
आज यानी 11 जून को कोर्ट में कांग्रेस और चुनाव आयोग दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह कानूनी जंग अब किस मोड़ पर खड़ी है।
गुरुवार को जैसे ही इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई, कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के सामने दलील रखी। सिंघवी ने कहा कि इस मामले पर आज ही फैसला आना जरूरी है। सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि नामांकन वापसी की समयसीमा आज दोपहर 03 बजे समाप्त हो रही है, इसलिए समय बेहद कम है।
इस पर चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उन्हें इस याचिका की प्रति (कॉपी) ही उपलब्ध नहीं कराई गई है। आयोग के वकीलों ने याचिका का अध्ययन करने के लिए कोर्ट से कुछ समय मांगा था।
इसके जवाब में सिंघवी ने बीच का रास्ता निकालते हुए कोर्ट से अपील की कि भले ही सुनवाई कल की जाए, लेकिन तब तक चुनाव आयोग को परिणाम घोषित करने से रोका जाए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में कानून और प्रक्रियाएं पहले से ही तय हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
कांग्रेस इस मामले को लेकर कितनी गंभीर और आक्रामक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को ही कानूनी घेराबंदी शुरू कर दी थी।
कांग्रेस ने रात के ठीक एक बजकर 48 मिनट पर डिजिटल माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि अधिकारी का फैसला पूरी तरह से गैर-कानूनी, मनमाना और राजनीतिक दल से ग्रसित है। इसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।
अदालती लड़ाई के साथ-साथ इस मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप भी ले लिया है। देश की राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की आपात बैठक चल रही है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के तमाम विधायक आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराने वाले हैं।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग की रहस्यमयी चुप्पी ने कांग्रेस खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों से आ रही जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग इस मामले में कोई भी कदम उठाने से पहले गहन कानूनी राय ले रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि आयोग कोई त्वरित निर्णय नहीं लेता है, तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो जाएगा।
यदि कांग्रेस को कोर्ट या चुनाव आयोग से कोई राहत नहीं मिलती है, तो मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा का एकतरफा कब्जा हो जाएगा। भाजपा के दो उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्विरोध निर्वाचन पहले से ही सुरक्षित माना जा रहा है। ऐसे में मीनाक्षी नटराजन के बाहर होते ही तीसरी सीट भी बिना किसी चुनावी मुकाबले के भाजपा की झोली में चली जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष और आक्रोश साफ देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में मीडिया से बात करते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े किए।
सिंघार ने कहा कि यदि चुनाव आयुक्त चाहते तो कल ही इस विषय पर अपना अंतिम निर्णय दे सकते थे। नामांकन स्वीकार करना या खारिज करना आयोग का विशेषाधिकार है। वहीं, जब आयोग हरियाणा और गुजरात के चुनावों में हस्तक्षेप कर सकता है, तो मध्य प्रदेश के मामले में उसने चुप्पी क्यों साध रखी है?
सिंघार ने झारखंड का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां भाजपा उम्मीदवार को वैध घोषित कर दिया गया, जबकि मीनाक्षी नटराजन के मामले को लटका कर रखा गया है।
उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग एक रबर स्टैंप की तरह काम कर रहा है। साथ ही, रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने न्याय में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि कोर्ट आज ही फैसला सुना देता तो बेहतर होता।
मंगलवार, 9 जून की सुबह नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई थी। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और रजनीश अग्रवाल ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने मीनाक्षी के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने भी शिकायत की थी। भाजपा की ओर से एडवोकेट संकेत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देकर नामांकन रद्द करने की मांग रखी थी।
शाम करीब 5:30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नामांकन रद्द करने का फैसला सुनाया था। फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था।
भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर कुल 6 आपत्तियां दर्ज कराई है।
यह मामला नया नहीं है। साल 2022 में तेलंगाना में एक महिला ने कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उसी मामले में मीनाक्षी नटराजन का नाम भी सामने आया था।
इसके बाद 2022 से 2025 के बीच उस महिला ने विभिन्न स्तरों पर शिकायतें और याचिकाएं दाखिल कीं। जून 2026 में जब राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, तब यह पुराना मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है।
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आज यानी 11 जून को कोर्ट में कांग्रेस और चुनाव आयोग दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह कानूनी जंग अब किस मोड़ पर खड़ी है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई तीखी बहस
इस पर चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उन्हें इस याचिका की प्रति (कॉपी) ही उपलब्ध नहीं कराई गई है। आयोग के वकीलों ने याचिका का अध्ययन करने के लिए कोर्ट से कुछ समय मांगा था।
इसके जवाब में सिंघवी ने बीच का रास्ता निकालते हुए कोर्ट से अपील की कि भले ही सुनवाई कल की जाए, लेकिन तब तक चुनाव आयोग को परिणाम घोषित करने से रोका जाए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में कानून और प्रक्रियाएं पहले से ही तय हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
आधी रात को खटखटाया गया था कोर्ट का दरवाजा
कांग्रेस ने रात के ठीक एक बजकर 48 मिनट पर डिजिटल माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि अधिकारी का फैसला पूरी तरह से गैर-कानूनी, मनमाना और राजनीतिक दल से ग्रसित है। इसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति से मिलेंगे कांग्रेस विधायक
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग की रहस्यमयी चुप्पी ने कांग्रेस खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों से आ रही जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग इस मामले में कोई भी कदम उठाने से पहले गहन कानूनी राय ले रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि आयोग कोई त्वरित निर्णय नहीं लेता है, तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो जाएगा।
बिना लड़े तीनों सीटें जीतने की तैयारी में भाजपा
नेता प्रतिपक्ष सिंघार का तीखा हमल
सिंघार ने कहा कि यदि चुनाव आयुक्त चाहते तो कल ही इस विषय पर अपना अंतिम निर्णय दे सकते थे। नामांकन स्वीकार करना या खारिज करना आयोग का विशेषाधिकार है। वहीं, जब आयोग हरियाणा और गुजरात के चुनावों में हस्तक्षेप कर सकता है, तो मध्य प्रदेश के मामले में उसने चुप्पी क्यों साध रखी है?
सिंघार ने झारखंड का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां भाजपा उम्मीदवार को वैध घोषित कर दिया गया, जबकि मीनाक्षी नटराजन के मामले को लटका कर रखा गया है।
उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग एक रबर स्टैंप की तरह काम कर रहा है। साथ ही, रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने न्याय में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि कोर्ट आज ही फैसला सुना देता तो बेहतर होता।
कब और कैसे रद्द हुआ नामांकन?
शाम करीब 5:30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नामांकन रद्द करने का फैसला सुनाया था। फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था।
भाजपा ने क्या आरोप लगाए?
- पहली आपत्ति यह थी कि नामांकन के पेज पांच, छह और सात पर सत्यापन मोहर अस्पष्ट है।
- दूसरी यह कि आपराधिक मामलों से जुड़े जरूरी कॉलम में जानकारी दर्ज नहीं की गई।
- तीसरी आपत्ति में आय विवरण वाले हिस्से में चुनाव आयोग के तय प्रारूप से छेड़छाड़ का आरोप था।
- चौथी बात यह कि नामांकन पत्र और शपथपत्र (Affidavit) में संपत्ति के कुल मूल्य में अंतर पाया गया।
- सबसे बड़ा आरोप यह था कि फॉर्म-26 में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित शिकायत की जानकारी छिपाई गई है।
- वहीं, छठवीं आपत्ति यह थी कि अधूरी और गलत जानकारी देने की वजह से नटराजन का नामांकन रद्द किया जाए।
2022 से शुरू हुई यह कानूनी उलझन
इसके बाद 2022 से 2025 के बीच उस महिला ने विभिन्न स्तरों पर शिकायतें और याचिकाएं दाखिल कीं। जून 2026 में जब राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, तब यह पुराना मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है।
FAQ
- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द किया गया?
भाजपा उम्मीदवारों और पार्टी नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने 6 आपत्तियां दर्ज कराईं। सबसे बड़ा आरोप यह था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने फॉर्म-26 यानी चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में चल रहे मामले की जानकारी नहीं दी। रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नामांकन रद्द करने का फैसला दिया। - यदि मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली तो क्या होगा?
आज यानी 11 जून 2026 को नाम वापसी का आखिरी दिन है। अगर सुप्रीम कोर्ट समय रहते कोई हस्तक्षेप नहीं करता, तो मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो जाएंगे। इस स्थिति में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की नौबत ही नहीं आएगी।
मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद: कांग्रेस देर रात पहुंची सुप्रीम कोर्ट
मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद, नाम वापसी का आखिरी दिन, SC जाएगी कांग्रेस
मीनाक्षी का नामांकन रद्द: अब एमपी के कांग्रेस विधायक राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार
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