MGM डीन की मुश्किलें बढ़ीं! 8 करोड़ की NGS मशीन खरीद पर 3 आरोप, 15 दिन में देना होगा जवाब

Sanjay Dhiman | Oct 08, 2026, 23:41 IST
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पुरानी मशीन होते हुए नई पर 8 करोड़ क्यों? MGM डीन को आरोप पत्र, EOW भी कर रही जांच
पुरानी मशीन होते हुए नई पर 8 करोड़ क्यों? MGM डीन को आरोप पत्र, EOW भी कर रही जांच

इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज में 8 करोड़ की NGS मशीन खरीद पर विवाद बढ़ा है। डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया को विभाग ने तीन आरोपों का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है।इस मामले की जांच EOW में भी हो रही है साथ ही हाईकोर्ट में भी यह मामला चल रहा है।

मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित MGM मेडिकल कॉलेज में NGS मशीन खरीद का मामला फिर चर्चा में है। करीब 8 करोड़ रुपए की मशीन खरीदने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया को आरोप पत्र जारी किया है। इसमें मशीन खरीद से जुड़े तीन अलग-अलग आरोपों का जिक्र किया गया है।

विभाग ने डॉ. घनघोरिया को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। मामला सरकारी पैसे के इस्तेमाल और नई मशीन खरीदने की जरूरत से जुड़ा है। सबसे बड़ा सवाल पहले से मौजूद मशीन के उपयोग को लेकर उठाया गया है।

इस मामले की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW भी कर रहा है। दूसरी तरफ शिकायतकर्ता हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका लगा चुके हैं। बता दें कि डीन घनघोरिया पूर्व मंत्री गौरी शंकर शेजवार के दामाद है।

MGM मेडिकल कॉलेज के डीन को क्यों मिला आरोप पत्र?

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डीन के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत आरोप पत्र जारी किया गया है।

विभागीय जानकारी के अनुसार कार्रवाई नियम 1966 के नियम 14(3) से संबंधित है। यह नियम सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

आरोप पत्र में मशीन खरीद से जुड़ी तीन प्रमुख आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें पुरानी मशीन की जांच और सरकारी बजट से जुड़े सवाल शामिल हैं। विभाग ने वित्तीय अनुशासन के पालन को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है।

फिलहाल आरोप पत्र जारी होने का मतलब किसी आरोप का साबित होना नहीं है। डॉ. घनघोरिया को अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का अवसर मिलेगा।

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पहला आरोप: पुरानी मशीन मौजूद थी तो नई क्यों खरीद रहे थे?

इस विवाद की शुरुआत पहले से मौजूद NGS मशीन की स्थिति से होती है। MGM मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2022 से एक NGS मशीन उपलब्ध बताई गई है।

इस मशीन का नाम Illumina MiSeq Model है। NGS यानी Next Generation Sequencing तकनीक का इस्तेमाल जेनेटिक जांच में किया जाता है।

यह मशीन DNA और RNA से जुड़ी वैज्ञानिक जांच में मदद करती है। मेडिकल रिसर्च और कुछ बीमारियों की पहचान में भी यह तकनीक उपयोगी है।

विभागीय आरोप के मुताबिक पुरानी मशीन की वास्तविक स्थिति पहले जांची जानी चाहिए थी। उसकी उपयोगिता और दोबारा संचालन की संभावना का भी पूरा परीक्षण जरूरी था।

इसके बावजूद करीब 8 करोड़ रुपए की नई मशीन खरीदने की प्रक्रिया बढ़ाई गई। इसी फैसले को लेकर विभाग ने डीन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

AMC और Consumables की जांच क्यों जरूरी थी?

पुरानी मशीन दोबारा चल सकती थी या नहीं, यही जांच का अहम हिस्सा था। इसके लिए AMC और जरूरी Consumables की उपलब्धता देखी जानी चाहिए थी।

AMC का मतलब Annual Maintenance Contract यानी मशीन के रखरखाव का सालाना अनुबंध होता है। Consumables ऐसे जरूरी सामान होते हैं, जो मशीन चलाने के दौरान इस्तेमाल किए जाते हैं।

इनकी मदद से पुरानी मशीन फिर चालू होने की संभावना जांची जा सकती थी। विभागीय आरोप है कि इस विकल्प का पर्याप्त तकनीकी परीक्षण नहीं किया गया।

हालांकि पुरानी मशीन निश्चित रूप से चालू हो सकती थी, यह अभी साबित नहीं है। इसका फैसला तकनीकी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के जवाब देखने के बाद होगा।

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दूसरा आरोप: केंद्र के 4 करोड़ रुपए की जानकारी क्यों नहीं दी?

NGS मशीन खरीद विवाद का दूसरा बड़ा सवाल सरकारी फंड से जुड़ा हुआ है। विभागीय आरोप में MDRU योजना से मिलने वाली राशि का भी जिक्र किया गया है।

MDRU का मतलब Multi-Disciplinary Research Unit है। यह मेडिकल रिसर्च से जुड़ी योजना है।

आरोप पत्र के मुताबिक इस योजना में करीब 4 करोड़ रुपए की शेष राशि थी। शासन को भेजे गए प्रस्ताव में उसकी स्थिति स्पष्ट नहीं बताने का आरोप है।

इसके बावजूद राज्य सरकार से करीब 8 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मांगी गई। विभाग ने प्रस्ताव में वित्तीय जानकारी पर्याप्त स्पष्ट नहीं होने पर आपत्ति जताई है।

तीसरा आरोप: सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की स्थिति बनी

तीसरे आरोप में सरकारी संसाधनों के सही इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विभाग के मुताबिक मशीन खरीद प्रक्रिया वित्तीय अनुशासन के अनुरूप नहीं थी।

इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी बनने की स्थिति पैदा हो सकती थी। विभाग ने इस खर्च को संभावित रूप से टाले जा सकने वाला बताया है।

सरकारी खरीद में जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और कीमत का आकलन अहम होता है। किसी भी नई मशीन की खरीद से पहले उसकी वास्तविक जरूरत देखी जाती है।

ऐसे मामलों में तकनीकी रिपोर्ट और बजट संबंधी दस्तावेज काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इन दस्तावेजों से खरीद प्रक्रिया की जरूरत और नियमों का पालन जांचा जाएगा।

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आरोप पत्र के साथ आठ गवाहों की सूची भी जारी

विभाग ने आरोप पत्र के साथ आठ व्यक्तियों की गवाह सूची भी जारी की है। इनमें मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टर और दूसरे कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं।

गवाह सूची में टीएस बघेल और डॉ. सचिन शर्मा का नाम दर्ज है। डॉ. मनीष पुरोहित और डॉ. शैलेश राय भी इस सूची में शामिल हैं।

इसके अलावा डॉ. पूजा प्रपन्ना और डॉ. अक्षरादित्य शुक्ला का नाम भी है। बायोमेडिकल इंजीनियर प्रेरक बंसोड़ और फार्मासिस्ट संजय उपाध्याय भी सूची में शामिल हैं।

इन लोगों की जानकारी विभागीय जांच में संबंधित तथ्यों को समझने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि सूची में नाम होने का मतलब किसी व्यक्ति पर आरोप लगना नहीं है।

EOW में भी चल रही NGS मशीन खरीद मामले की जांच

MGM मेडिकल कॉलेज का यह मामला केवल विभागीय आरोप पत्र तक सीमित नहीं है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW भी खरीद प्रक्रिया की जांच कर रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार EOW ने वर्ष 2025 में एक प्रकरण दर्ज किया था। इसमें डॉ. अरविंद घनघोरिया और अन्य संबंधित लोगों के नाम सामने आए थे।

बताया गया है कि 5 अक्टूबर 2026 को मामले में पूछताछ भी हुई थी। संबंधित व्यक्तियों से करीब पांच घंटे तक सवाल-जवाब किए जाने की जानकारी दी गई है।

इस पूछताछ में मशीन खरीद से जुड़े रिकॉर्ड और फैसलों पर सवाल हुए होंगे। हालांकि पूछे गए वास्तविक सवालों की आधिकारिक सूची अभी उपलब्ध नहीं है।

मामले में शासन द्वारा गठित जांच समिति के पांच सदस्यों को भी बुलाया गया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक उन्हें नोटिस जारी करके बयान दर्ज कराने को कहा गया है।

हाईकोर्ट में पहुंचा विवाद, 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई

मशीन खरीद का विवाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक भी पहुंच चुका है। इस मामले में शिकायतकर्ता राकेश भाबर ने जनहित याचिका दायर की है।

याचिका में डीन और टेंडर समिति की अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई मांगी गई है। इसमें उपकरण खरीद की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने शासन और EOW को नोटिस जारी किए हैं। दोनों से मामले के संबंधित पहलुओं पर जवाब देने को कहा गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित बताई गई है।

टेंडर में 30 प्रतिशत अधिक दर का आरोप क्या है?

जनहित याचिका में उपकरण की कीमत को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया गया है। आरोप है कि करीब 30 प्रतिशत अधिक दर पर अनुबंध कराया गया था।

यह दावा याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए आरोपों का हिस्सा बताया गया है। अभी इसे अदालत से साबित हुई अनियमितता मानना सही नहीं होगा।

इस आरोप की जांच में टेंडर दस्तावेज और बाजार कीमत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। तकनीकी शर्तों और उपकरण की वास्तविक विशेषताओं की तुलना भी जरूरी होगी।

मामले का अंतिम नतीजा दस्तावेजों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगा।

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अब आगे क्या होगा?

इस मामले में सबसे पहले डॉ. घनघोरिया को आरोप पत्र का जवाब देना होगा। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।

जवाब मिलने के बाद विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अगला फैसला करेगा। जरूरत पड़ने पर विभागीय जांच की अगली प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

दूसरी तरफ EOW अपने स्तर पर मामले की जांच आगे बढ़ा रहा है। हाईकोर्ट में भी 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई निर्धारित होने की जानकारी है।

  1. MGM मेडिकल कॉलेज में NGS मशीन खरीद का मामला क्यों चर्चा में है?
    NGS मशीन खरीद की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने के कारण यह मामला चर्चा में है। लगभग 8 करोड़ रुपए की इस मशीन की खरीद पर आरोप है कि पुरानी मशीन की उपयोगिता की जांच नहीं की गई और सरकारी वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं किया गया।
  2. डॉ. अरविंद घनघोरिया को आरोप पत्र क्यों जारी किया गया है?
    डॉ. अरविंद घनघोरिया को आरोप पत्र इसलिए जारी किया गया है क्योंकि विभाग ने मशीन खरीद से जुड़े तीन प्रमुख आरोपों का उल्लेख किया है, जिनमें पुरानी मशीन की स्थिति की जांच न करना और सरकारी धन का अनुचित उपयोग शामिल है।
  3. EOW और हाईकोर्ट में इस मामले की स्थिति क्या है?
    इस मामले की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा की जा रही है और इसमें संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की गई है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें मामले के संबंध में सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
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