एमपी में JEE, NEET की तैयारी में एसटी छात्रों से खिलवाड़, 20 करोड़ में ऐसे शिक्षक जिन्हें स्पेंलिंग ही नहीं पता

मध्य प्रदेश में एसटी वर्ग के बच्चों के लिए आकांक्षा योजना को लेकर बुरा हाल है। सरकार ने 20.52 करोड़ रुपए का बजट रखा है, लेकिन बच्चों को गुणवत्ता से रहित शिक्षा मिल रही है। इंदौर में बच्चों ने कलेक्टर के सामने कोचिंग और टीचर्स की शिकायत की है।

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Sanjay Gupta
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mp akanksha scheme impact students coaching issues

एमपी में एसटी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग के मेधावी बच्चों JEE/ NEET/ CLAT की निशुल्क तैयारी के लिए एमपी शासन की एक बढ़िया योजना (आकांक्षा) में पलीता लग रहा है। बच्चों को परीक्षा की तैयारी के लिए टेंडर लेने वाली कंपनी ने इसका जिम्मा अन्य कोचिंग से समझौता कर उन्हें दे दिया। उनके ऐसे टीचर बच्चों को पढ़ा रहे हैं जिन्हें स्पेलिंग तक का ज्ञान नहीं है। योजना के लिए एमपी सरकार ने 20.52 करोड़ का बजट रखा हुआ है।

क्या है आकांक्षा योजना

यह योजना तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने चुनावी साल 2023 में लॉन्च की थी। इसके तहत एमपी के मूल मेधावी एसटी वर्ग के बच्चों का 10वीं के अंकों और एक चयन परीक्षा के आधार पर चयन किया जाता है।

इसमें JEE/ NEET/ CLAT की तैयारी के लिए इन्हें चुना जाता है। JEE की तैयारी भोपाल में, नीट की इंदौर में और क्लेट की जबलपुर में कराई जाती है

इसमें बच्चों के 11वीं, 12वीं की पढ़ाई के साथ ही रहने-खाने का खर्च, इन परीक्षा की तैयारी के लिए पूरा खर्च सरकार उठाती है। इसमें कुल 200 बच्चों का चयन होता है।

एमपी सरकार ने टेंडर कर कंपनी को इनके पढ़ाने की व्यवस्था का जिम्मा दिया है। उदयपुर एसेंट कोचिंग एकेडमी को यह ठेका मिला है। 

टेंडर पाने वाली कंपनी कोचिंग के जरिए इन बच्चों को JEE/ NEET/ CLAT की तैयारी की व्यवस्था करती है। इसके लिए शिक्षक नियुक्त करना और संसाधन उपलब्ध कराने का जिम्मा कंपनी का है।

इसके तहत बच्चों को तैयारी के लिए टेबलेट व अन्य संसाधनों की भी व्यवस्था की जाती है।

इंदौर में बच्चों ने खोल दी योजना की पोल

इंदौर में नीट की तैयारी करने वाले इस योजना के लिए चयनित मेधावी एसटी वर्ग के बच्चों ने इसकी पोल कलेक्टर शिवम वर्मा के सामने खोल दी है। यह बच्चे भंवरकुआं चौराहे से इंदौर कलेक्टोरेट तक पैदल पहुंचे और फिर रात को कलेक्टर से मिले। 

बच्चों ने बताया कि जो टीचर हमे पढ़ाते हैं उन्हें स्पेंलिंग तक नहीं पता। 

फिजिक्स के टीचर हो या मैथ्स के वह मुख्य विषय की स्पेलिंग तक नहीं जानते। एडिशन को एडिक्शन लिखते हैं। 

जब यह बात मैनेजमेंट को बोलते हैं तो वह टीसी देने की धमकी देते हैं। कहते हैं कि जो हम टीचर लाएंगे उनसे ही पढ़ना होगा।

फरवरी आ गई है और अभी तक क्लास व्यवस्थित नहीं चल रही है। 

बच्चों ने टीचर को हटाकर अच्छे टीचर देने की मांग की है। 

इंदौर कलेक्टर ने दिया जांच का आदेश

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि बच्चों ने शिकायत की है कि टीचर नहीं पढ़ा पा रहे हैं और वह उनके डाउट भी साफ नहीं करते हैं। इस मामले में एडीएम और एसी ट्राइबल की टीम जाकर जांच करेगी। इसमें शासन काफी मदद करती है और टीचर नहीं पढ़ा रहे हैं तो उन्हें हटाया जाएगा। यह सभी नीट के विद्यार्थी थे, बच्चों की मांग सही है यदि टीचर क्वालिटी के नहीं है तो उन्हें बदला जाएगा। 

एसी ट्राइबल यह बोले

एसी ट्राइबल (सहायक संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग) इंदौर में नरेंद्र भिड़े ने कहा कि कोचिंग कंपनी और विभाग के बीच में करार हुआ है। इसी के तहत वह शिक्षकों व अन्य संसाधन की व्यवस्था करती है और भुगतान भी भोपाल स्तर से होता है। यहां कोचिंग मैनेजमेंट का कहना है कि जो पहले शिक्षक थे उन्होंने कांट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया क्योंकि उन्हें प्राइवेट संस्थान अधिक दाम पर ले लेते हैं। ऐसे में जो नए शिक्षक आए हैं. उनसे बच्चे खुश नहीं है। कलेक्टर ने जांच के लिए कहा है, वह की जा रही है। 

एसेंट कोचिंग एकेडमी क्या बोली

यह एसेंट कोचिंग एकेडमी उदयपुर राजस्थान की है। इसके डायरेक्टर मनोज बिसार्ती व मुकेश बिसार्ती है। द सूत्र ने उनके नंबर पर बात की तो मंगला राय मैनेजर ने बात की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभी इंदौर से कोई शिकायत नहीं मिली है। इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। एक अन्य मैनेजर ने भी फिर फोन करके कहा कि वह इस मामले की जानकारी निकाल रहे हैं कि क्या हुआ है, बच्चों की समस्या दूर की जाएगी। 

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कंपनी ने पेटी कांट्रेक्ट किया है

जानकारी के अनुसार टेंडर लेने वाली एसेंट कोचिंग ने इसमें अन्य के साथ करार किया है जो बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था देखती है। इंदौर में माइलस्टोन आइडियल के पास काम है जिनके प्रमुख मुकेश बंसल है। इन्हें भी 'द सूत्र' ने कई बार फोन किए और मैसेज किए लेकिन जवाब नहीं आया।

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