अमृत मिशन का खेल: जनता प्यासी, बस ऑपरेटरों की तिजोरी में बरसे 268 करोड़
Ravi Awasthi | Jan 17, 2026, 19:20 IST
Photograph: (the sootr)
अमृत मिशन की शहरी जल-सीवेज राशि मध्यप्रदेश में सूत्र परिवहन सेवा पर खर्च कर दी गई। 40% वीजीएफ के तहत 517 बसों को 268 करोड़ दिए गए। कई रूट पर बसें नहीं चलीं, निगरानी ढीली रही।
News In Short
- अमृत मिशन की राशि जल-सीवेज की बजाय बस सेवा पर कर दी खर्च
- घाटा भरने के नाम पर निजी ट्रांसपोर्टरों को भारी सब्सिडी
- बसें कागजों पर चलीं, कई रूट पर संचालन नहीं, बसें बेचकर मुनाफा
- निगरानी फेल, जुर्माने का अधिकार होते हुए भी कार्रवाई नहीं।
- एक कंपनी को लाभ, इंदौर-भोपाल में चार्टर्ड बस का सबसे ज्यादा अनुबंध।
NEWS IN DETAIL
इसके उलट शहरों में रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते रहे। इंदौर का भागीरथपुरा कांड इसी व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन गया। भागीरथपुरा में पेयजल लाइन में पानी और सीवेज साथ बहता रहा और 24 लोगों की जान चली गई।
नियमों के विपरीत किया प्रयोग
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ऐसे हुई ‘सूत्र परिवहन’ की एंट्री
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असल खेल: 40% सब्सिडी, नाम दिया वीजीएफ
वीजीएफ शब्द को शॉर्ट फॉर्म में इतना गोपनीय रखा गया कि आमतौर पर अनुबंध पढ़ने वाला भी सब्सिडी की पूरी तस्वीर न समझ पाए। अनुबंध के अनुसार बस की लागत का 40% वीजीएफ चार समान किस्तों में मिलना था। हर दो साल में 25% और वह भी तभी, जब बसें तय रूट पर चल रही हों। लेकिन हकीकत इससे उलट निकली।
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बसें चलीं कागजों पर, मुनाफा जमीन पर
एक कंपनी, सबसे ज्यादा फायदा
विज्ञापन और पास से भी कमाई
सवाल उठे तो परमिट सरेंडर
अफसर भी असमंजस में
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उप्र सरकार ने न शेयर दिया, न ठेका
राज्य सरकार ने शहरी परिवहन सेवा तो शुरू की, लेकिन पूरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश परिवहन निगम को ही सौंपी। खास बात यह रही कि बसों की खरीदी में किसी निजी कंपनी को न तो शेयर दिया गया और न ही कोई ठेका, बल्कि राज्यांश तक वहन नहीं किया गया, जिससे मॉडल पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहा।
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अमृत मिशन: सूत्र सेवा सब्सिडी और आय का विवरण
| विवरण / शहर | बसों की संख्या | वीजीएफ (सब्सिडी) / आय का विवरण |
| कुल लाभान्वित बसें | 517 | 268 करोड़ रुपए (कुल वीजीएफ राशि) |
| इंदौर | 310 | विज्ञापन आय: 5.36 करोड़ रुपए, बस पास आय:90 करोड़ रुपए |
| भोपाल | 153 | - |
| देवास | 38 | - |
| उज्जैन | 10 | - |
| खंडवा | 8 | - |
| बुरहानपुर | 8 | - |
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