एमपी के 8 हजार 842 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र ही गायब, कैग रिपोर्ट में खुलासा

Manya Jain | Jul 24, 2026, 12:30 IST
Share
mp anganwadi cag report 2025
mp anganwadi cag report 2025

मध्यप्रदेश की कैग रिपोर्ट में खुलासा 8 हजार 842 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं। जहां हैं वहां बिजली-पानी और सुविधाओं की कमी। पोषण आहार और आश्रय गृहों में भी करोड़ों की अनियमितता मिली।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश हुई है।
  • रिपोर्ट में आंगनबाड़ी केंद्रों की बड़ी कमी सामने आई है।
  • राज्य के 8,842 गांवों में जनसंख्या के हिसाब से भी केंद्र नहीं बने।
  • जहां केंद्र चल रहे हैं, वहां पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।
  • पोषण आहार और आश्रय गृहों के भुगतान में भी गड़बड़ी मिली है।

आंगनबाड़ी केंद्रों की कमी

विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग (CAG – Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट ने प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 54 हजार 903 गांवों और वार्डों में से 8 हजार 842 यानी करीब 16 प्रतिशत जगहों पर आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं हैं। यह स्थिति तब है जब वहां जनसंख्या के मानक इसकी जरूरत बताते हैं।

बच्चों और महिलाओं तक पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का यह मुख्य जरिया माना जाता है। इतनी बड़ी संख्या में केंद्रों का न होना बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है।

सुविधाओं का अभाव

जो आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, उनकी हालत भी ठीक नहीं मिली। कई केंद्रों में उपयुक्त भवन नहीं है। पीने का पानी, शौचालय, खेल मैदान, रसोईघर और स्टोर रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद मिलीं।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्र दूसरे भवनों के बीच ही संचालित हो रहे हैं। वहीं करीब 10 केंद्र ऐसे मिले, जहां पहुंचने के लिए ठीक से रास्ता तक उपलब्ध नहीं है। इससे छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को केंद्र तक पहुंचने में परेशानी होती है।

बाल संरक्षण पर सवाल

कैग ने बाल संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बच्चों के लिए खुले आश्रय गृह केवल भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और सागर में ही मौजूद हैं। बाकी जिलों के बच्चों के लिए यह सुविधा पर्याप्त नहीं मानी गई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2019 से 2022 के बीच भोपाल के एक आश्रय गृह को 1.11 करोड़ रुपए का अतिरिक्त अनुदान दिया गया। इसके अलावा बिना सतर्कता एजेंसी के आवंटन के ही 1.29 करोड़ रुपए और जारी कर दिए गए। कैग ने इसे नियमों के विपरीत बताया है।

पोषण आहार में गड़बड़ी

रिपोर्ट में पूरक पोषण आहार व्यवस्था की गड़बड़ियां भी उजागर हुई हैं। चार जिलों में 13 स्व-सहायता समूहों के सत्यापन के दौरान पता चला कि दर्ज पते पर उनका कोई कार्यालय मौजूद ही नहीं था।

जांच में यह भी सामने आया कि आहार तैयार करने के काम में ऐसे लोग भी शामिल थे, जो संबंधित समूहों के सदस्य ही नहीं थे। नियमों के विपरीत समितियों को कुल 2.04 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। यह भुगतान बालाघाट, अनूपपुर, मंडला, छतरपुर, राजगढ़ और टीकमगढ़ जैसे जिलों से जुड़ा बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि भोपाल के एक ही केंद्र को 2.30 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। विभागीय नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों और समूहों से वसूली होनी चाहिए थी।

टेलीमानस सेवा की हकीकत

कैग रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को भी असंतोषजनक बताया गया है। मानसिक समस्याओं में फोन पर सलाह देने के लिए शुरू की गई टेलीमानस सेवा में 16 प्रतिशत कॉल का जवाब ही नहीं मिला। इसके अलावा फॉलोअप की कोई व्यवस्था नहीं पाई गई।

रिपोर्ट के अनुसार इस सेवा के लिए न तो पर्याप्त विशेषज्ञ और स्टाफ नियुक्त किए गए, न ही जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए। कैग ने यह भी बताया कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों की निगरानी के लिए बनने वाला प्राधिकरण भी करीब सात साल की देरी से गठित हुआ। विशेषज्ञों की नियुक्ति न होने और फंड की कमी के चलते यह प्राधिकरण ठीक से काम नहीं कर सका।

समग्र रूप से देखें तो कैग की यह रिपोर्ट प्रदेश की आंगनबाड़ी, बाल संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में गहरी खामियां उजागर करती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन सिफारिशों पर कितनी तेजी से अमल करती है।

FAQ

  1. मध्यप्रदेश में कितने गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं?
    कैग रिपोर्ट के अनुसार 54,903 गांवों में से 8,842 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। यह कुल गांवों का करीब 16 प्रतिशत है। यह जनसंख्या मानकों के बावजूद है।
  2. आंगनबाड़ी केंद्रों में किन सुविधाओं की कमी पाई गई?
    कई केंद्रों में पीने का पानी, शौचालय, खेल मैदान और रसोईघर जैसी सुविधाएं नहीं हैं। कुछ केंद्रों तक पहुंचने के लिए रास्ता भी नहीं है। कैग ने इसे गंभीर खामी बताया है।
  3. पोषण आहार में कितनी राशि की गड़बड़ी सामने आई?
    रिपोर्ट के अनुसार नियमों के विपरीत समितियों को 2.04 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। भोपाल के एक केंद्र को अकेले 2.30 करोड़ रुपए दिए गए। यह भुगतान कई जिलों में हुआ।
ये भी पढ़ें...

शिशुकुंज स्कूल ने पानी और फूड के सैंपल खुद जांचे, रिपोर्ट प्रशासन ने की खारिज, किचन बंद रहेगा

चॉकलेट-चिप्स बच्चों के लिए खतरा, एमपी में 35 लाख से ज्यादा बच्चे एनीमिया पीड़ित

ई साक्ष्य जुटाने में पिछड़ी मध्यप्रदेश पुलिस, भोपाल-इंदौर भी जांच में फिसड्डी

तंत्र-मंत्र के बहकावे में एमपी सबसे आगे, धन-दौलत के लालच अपनों की ले रहे जान

Tags:
  • मध्यप्रदेश विधानसभा
  • मानसिक स्वास्थ्य
  • CAG
  • पोषण आहार
  • आंगनबाड़ी केंद्र
  • कैग रिपोर्ट
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा