मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू, चार दिन के सत्र में 1497 प्रश्न

मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है। विधायकों ने कुल 1497 सवाल सरकार के सामने रखे हैं। सत्र छोटा होने के बावजूद मुद्दों की लंबी फेहरिस्त है। विपक्ष ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है।

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Ramanand Tiwari
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BHOPAL. मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है। इसी के साथ विधायकों ने कुल 1497 सवाल सरकार के सामने रख दिए हैं। कम समय के सत्र में प्रतिदिन 374 सवालों का औसत है। यह दिखाता है कि विधायकों के पास मुद्दों की लंबी फेहरिस्त है।

ऑनलाइन-ऑफलाइन मिलाकर रिकॉर्ड प्रश्न

इस बार विधायकों ने 907 सवाल ऑनलाइन और 590 सवाल ऑफलाइन दाखिल किए हैं। सभी सवालों के जवाब सरकार द्वारा विधानसभा सचिवालय को भेजे जा चुके हैं। इसके साथ ही ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी मांगे गए हैं। इससे साफ है कि विपक्ष-सत्ता पक्ष-दोनों इस सत्र में मुद्दों को लेकर आक्रामक हैं।

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सदन की तैयारियों का अंतिम रिहर्सल पूरा

विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने सत्र की तैयारियों का निरीक्षण किया। पिछले सत्र में परिसर में नारेबाजी और धरने पर रोक थी। इस बार विधायकों के लिए गाइडलाइन में यह प्रतिबंध हटा दिया गया है। सदन और परिसर दोनों में माहौल ज्यादा गर्म रहेगा।

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विपक्ष का आरोप सत्र छोटा

कांग्रेस विधायकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि चार दिनों में जनता की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा संभव नहीं है। विपक्ष का तर्क है जब सवाल हजारों में हों, तो समय भी पर्याप्त होना चाहिए।

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किसानों और जनता की उम्मीदें भी जुड़ी

किसानों और नागरिकों की अपेक्षा है कि उनके मुद्दे उठाए जाएं। कई विधायक चाहते हैं कि सत्र की अवधि बढ़ाई जाए। ताकि जनहित मामलों पर ठोस बहस और समाधान हो सके।

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चार दिन जनता के मुद्दों के लिए बहुत कम

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र की चार दिन की अवधि नाकाफी है। यह 8 करोड़ जनता के मुद्दों के लिए पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस विधायक दल लगातार सत्र अवधि बढ़ाने की मांग कर रहा है।

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जनता की आवाज कभी नहीं रुकेगी

उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस पहले भी सवाल उठाती रही है। आगे भी सड़क से लेकर सदन तक जनता की हर आवाज को बुलंद करती रहेगी। उनका कहना है कि जनहित के मुद्दे कभी नहीं रुकेंगे। यह सत्र छोटा हो या बड़ा, मुद्दे लगातार उठेंगे।

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