भाजपा संगठन पर ‘दोहरी नीति’ के आरोप : छोटे कार्यकर्ता पर कार्रवाई, बड़े नेताओं पर खामोशी क्यों?
Ramanand Tiwari | Mar 11, 2026, 17:45 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश भाजपा में अनुशासन के दोहरे पैमाने पर बवाल। छोटे कार्यकर्ताओं पर तुरंत एक्शन, जबकि बड़े नेताओं के विवादित बयानों पर संगठन की चुप्पी ने खड़े किए सवाल।
News in Short
- भाजपा संगठन पर अनुशासन की नीति में भेदभाव का आरोप, छोटे कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई।
- बड़े नेताओं पर विवादित बयानों के बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाए जाते।
- उज्जैन विधायक अनिल जैन को हिदायत देकर मामले को शांत कर दिया गया।
- सागर के भाजपा कार्यकर्ता देवेंद्र कटारे को सोशल मीडिया पोस्ट के कारण पद से हटाया गया।
- कार्यकर्ताओं में नाराजगी, आरोप है कि प्रभावशाली नेताओं को संरक्षण मिलता है।
News in Detail
मुख्य सवाल: क्या कार्रवाई के दो पैमाने हैं?
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उज्जैन मामला: विधायक को सिर्फ हिदायत-
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। हालांकि मामला सुर्खियों में आने के बाद भाजपा संगठन ने उन्हें तलब जरूर किया, लेकिन बातचीत के बाद केवल हिदायत देकर मामला खत्म कर दिया गया।
सागर का मामला: कार्यकर्ता पर कड़ी कार्रवाई
कार्यकर्ताओं में बढ़ी नाराजगी
कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि अनुभव और लंबे समय से संगठन के लिए काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान या अवसर नहीं मिल पाता। इसके उलट प्रभावशाली नेताओं को अक्सर विवादित बयानों के बावजूद संगठनात्मक संरक्षण मिल जाता है।
मंत्रियों की बयानबाजी पर भी उठते रहे सवाल
जमीनी कार्यकर्ता ही क्यों बनते हैं निशाना?
सत्ता में बैठे लोगों का प्रभाव संगठन पर भी दिखाई देता है। नतीजा यह होता है कि सख्ती का असर अक्सर नीचे के स्तर पर ही दिखता है।
सबसे बड़ा सवाल: अनुशासन या चयनात्मक कार्रवाई?
बीते दिनों में हुई कुछ चर्चित घटनाएं
कुछ समय पूर्व मऊगंज के भाजपा विधायक प्रदीप पटेल को पार्टी संगठन ने भोपाल तलब किया था। पटेल एक मामले में खुद “गिरफ्तारी देने” थाने पहुंच गए थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने उनसे बंद कमरे में चर्चा की।
इसी तरह भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को भी संगठन ने भोपाल बुलाया था। कलेक्टर के साथ तीखी बहस और हाथापाई जैसे विवाद का वीडियो सामने आने के बाद उनसे प्रदेश प्रभारी और संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने सवाल-जवाब कर समझाइश दी।
वहीं पिछोर विधायक प्रीतम लोधी को भी उनके बयानों को लेकर पार्टी संगठन ने भोपाल तलब किया था। लोधी के कई बयान पहले भी विवाद का कारण बने हैं, जिस पर संगठन को दखल देना पड़ा।
इन घटनाओं के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि भाजपा में अनुशासन को लेकर दोहरा पैमाना अपनाया जा रहा है। छोटे कार्यकर्ताओं पर जहां तुरंत नोटिस और कार्रवाई हो जाती है, वहीं विधायकों और प्रभावशाली नेताओं के मामलों में अक्सर कार्रवाई तलब और समझाइश तक सीमित रह जाती है।
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