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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री के पद पर बदलाव की संभावना बढ़ी।
- अजय जामवाल को संगठन महामंत्री बनाए जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में है।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी मैदान में है।
- संगठन में सख्ती बढ़ी, कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बेचैनी देखी जा रही है।
- भाजपा की रणनीति अब चुनावों के बाद स्थिरता और वोट शेयर को बढ़ाने पर है।
NEWS IN DETAIL
BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री को लेकर हलचल तेज है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी कोई बड़ा प्रयोग कर सकती है-या तो नए चेहरे को जिम्मेदारी दे, या फिर अजय जामवाल को ही प्रभावी कमांड सौंप दे। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन में कसावट शुरू हो चुकी है। ऐसे में सवाल यही है- क्या जामवाल ही प्रदेश के “रेगुलर” संगठन महामंत्री की भूमिका निभाते रहेंगे?
क्या बदल रहा है मप्र भाजपा में?
प्रदेश में सत्ता और संगठन का पावर सेंटर बदल चुका है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी मैदान में है। ऐसे में संगठन महामंत्री की भूमिका सबसे अहम कड़ी बन गई है जो सरकार, संगठन और संघ के बीच संतुलन साधे।
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क्या अजय जामवाल ही संभालेंगे कमान?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी फिलहाल कोई नया प्रयोग न करे। संभावना यह भी है कि अलग से संगठन महामंत्री नियुक्त न किया जाए और अजय जामवाल को ही रणनीतिक तौर पर कमान दी जाए। छत्तीसगढ़ में सीमित सीटें हैं, लेकिन मध्य प्रदेश भाजपा के लिए बड़ा रणक्षेत्र है। ऐसे में चुनाव तक एक अनुभवी चेहरे के जरिए संगठन को धार देने की रणनीति बन सकती है।
कसावट शुरू: जामवाल के आते ही बदला अंदाज
सूत्र बताते हैं कि जामवाल के सक्रिय होते ही कई स्तरों पर सख्ती बढ़ी है। मंडल और निगम नियुक्तियों पर रोक,जिला स्तर पर नए प्रयोग, संगठनात्मक समीक्षा तेज मैसेज साफ है-चुनाव से पहले ढील नहीं, सिर्फ अनुशासन।
कार्यकर्ता इंतजार में, नाराजगी भी दबे स्वर में
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में बेचैनी है। कई लंबे समय से पद और जिम्मेदारी की प्रतीक्षा में हैं। नाराजगी खुलकर सामने नहीं आ रही, लेकिन सवाल उठ रहा है-क्या नया संगठन नेतृत्व कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर पाएगा?
नया समीकरण: मोहन यादव + खंडेलवाल + संगठन
भाजपा में संगठन महामंत्री संघ और पार्टी के बीच सबसे मजबूत कड़ी होता है। अब देखना होगा कि नया या मौजूदा चेहरा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रशासनिक फैसलों और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सांगठनिक रणनीति में कितना तालमेल बैठा पाता है। यही तालमेल 2028 की राह तय करेगा।
तीन नाम चर्चा में, फैसला जल्द
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार तीन नामों पर मंथन चल रहा है। अनुभव और ऊर्जा के संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है। कयास है कि एक महीने के भीतर दिल्ली और नागपुर की सहमति से अंतिम मुहर लग सकती है।
क्यों अहम है यह फैसला?
भाजपा की रणनीति अब सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। पार्टी चाहती है कि उसका वोट शेयर 50 प्रतिशत से ऊपर स्थिर रहे। सरकार के खिलाफ संभावित असंतोष को संगठन के जरिए संभालना नए“सारथी” की पहली परीक्षा होगी।
हितानंद शर्मा की विरासत बड़ी चुनौती
पूर्व संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने मजबूत आधार तैयार किया। 2023 विधानसभा में 163 सीटों की जीत, 2024 लोकसभा में सभी 29 सीटों पर विजय। बूथ विजय संकल्प और पन्ना प्रमुख मॉडल को डिजिटल मजबूती,अब सवाल है-क्या नया संगठन शिल्पी इस लकीर को और आगे बढ़ा पाएगा?
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बड़ा सवाल: प्रयोग या स्थिरता?
मध्य प्रदेश भाजपा एक मोड़ पर खड़ी है। क्या पार्टी नया चेहरा लाकर संगठन में नई ऊर्जा भरेगी? या फिर अजय जामवाल पर भरोसा जारी रखकर स्थिरता को प्राथमिकता देगी? आने वाले कुछ हफ्तों में इसका जवाब मिल जाएगा। फिलहाल इतना तय है कि मप्र भाजपा में संगठन की बिसात नए अंदाज में बिछ रही है।
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