मोहन कैबिनेट के फैसले: जबलपुर से इंदौर तक बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, 7 जिलों में लगेंगे उद्योग, 6 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार!

Sourabh Bhatnagar | Oct 15, 2026, 13:29 IST
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MP में बनेगा जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर, 7 जिलों में लगेंगे उद्योग, 6 लाख से ज्यादा रोजगार की उम्मीद<br>
MP में बनेगा जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर, 7 जिलों में लगेंगे उद्योग, 6 लाख से ज्यादा रोजगार की उम्मीद

MP Cabinet Decisions: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए। इनमें सबसे अहम फैसला जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने का है। इसके लिए सरकार 100 करोड़ रुपए की पूंजी से नई कंपनी बनाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि अगले तीन साल में इस कॉरिडोर से 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश मिलने की उम्मीद है।

मोहन कैबिनेट के फैसले

मोहन कैबिनेट में स्कूलों, सिंचाई परियोजनाओं, जनजातीय क्षेत्रों में बसों और आयुष मिशन के लिए भी राशि मंजूर की गई है।

बता दें कि बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन याादव ने खुद प्रेस ब्रीफिंग की। उन्होंने बताया कि जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर से तीन साल में 6 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होने की संभावना है। इस परियोजना के तहत जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर में नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे।

सरकार की योजना है कि उद्योगों को एक ही जगह जमीन, बिजली, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिलें। इससे कंपनियों को अपना काम शुरू करने में आसानी होगी।

साथ ही सीएम मोहन यादव ने बताया कि इस परियोजना से महाकौशल, मध्य भारत और मालवा क्षेत्र में उद्योगों का विकास होगा। जबलपुर से भोपाल और देवास होते हुए इंदौर तक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।

नई कंपनी के लिए सरकार देगी 100 करोड़

इस कॉरिडोर के विकास के लिए राज्य सरकार एक नई कंपनी बनाएगी। इसका नाम जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड रखा गया है।

यह कंपनी पूरी तरह मध्यप्रदेश सरकार के नियंत्रण में रहेगी। सरकार इसे शुरुआत में 100 करोड़ रुपए की पूंजी देगी। इसके अलावा कंपनी को शुरुआती कामकाज के लिए 20 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त कर्ज देने का प्रस्ताव भी है।

इस कंपनी का मुख्य काम औद्योगिक क्षेत्रों की योजना बनाना, निवेश लाना और जरूरी सुविधाएं विकसित करना होगा। हालांकि मुख्य सड़कों का निर्माण संबंधित सरकारी एजेंसियां ही करेंगी।

तीन साल में 3 लाख करोड़ निवेश की उम्मीद

सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना से बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और रोजगार के नए मौके बनेंगे। मार्च 2028 तक इस कॉरिडोर में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश आने का अनुमान है।

इससे करीब एक लाख लोगों को सीधे नौकरी मिल सकती है। वहीं, दो लाख से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है।

सरकार का अनुमान है कि तीन साल में पूरी परियोजना विकसित होने पर निवेश तीन लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। इससे छह लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

हालांकि, ये सभी शुरुआती अनुमान हैं। निवेशकों से बातचीत और विस्तृत अध्ययन के बाद ही सही आंकड़े सामने आएंगे।


पहले चरण में बनेंगे 3 से 5 औद्योगिक हब

सरकार पहले चरण में तीन से पांच बड़े औद्योगिक हब विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र का शुरुआती अनुमान रखा गया है।

इन हब में उद्योग लगाने वाली कंपनियों को पहले से जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

यहां बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी व्यवस्थाएं होंगी। साथ ही कर्मचारियों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल विकास केंद्र भी बनाए जाने की योजना है।

इस व्यवस्था को प्लग एंड प्ले (Plug and Play) मॉडल कहा जाता है। यानी कंपनियों को उद्योग लगाने के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027: सीएम मोहन यादव ने पीएम मोदी को दिया न्योता, मध्य प्रदेश में निवेश और रोजगार बढ़ाने का रोडमैप साझा | Global Investors Summit 2027: CM Mohan Yadav Invites PM Modi, Shares Roadmap to Boost Investment and Employment in Madhya Pradesh
Global Investors Summit 2027: सीएम मोहन यादव ने पीएम मोदी को बताया निवेश और रोजगार पर प्लान
01 Oct 2026 ,
By Jitendra Shrivastava
BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 की तैयारी बढ़ा दी है। राज्य सरकार का फोकस औद्योगिक निवेश आकर्षित करने पर है। इसके साथ नए रोजगार अवसर तैयार करने पर जोर है। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी को समिट का औपचारिक निमंत्रण दिया। मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार बढ़ाने का रोडमैप साझा किया।
BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 की तैयारी बढ़ा दी है। राज्य सरकार का फोकस औद्योगिक निवेश आकर्षित करने पर है। इसके साथ नए रोजगार अवसर तैयार करने पर जोर है। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी को समिट का औपचारिक निमंत्रण दिया। मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार बढ़ाने का रोडमैप साझा किया।

सात जिलों में किस तरह के उद्योग लगेंगे?

सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी जरूरत और संभावनाओं के अनुसार उद्योग विकसित करने की योजना बनाई है।

जबलपुर: यहां इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और एयरोस्पेस से जुड़े सहायक उद्योगों पर जोर रहेगा। फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स की भी संभावनाएं देखी जाएंगी।

नरसिंहपुर और रायसेन: इन जिलों में कृषि आधारित उद्योग, फूड पार्क और वेयरहाउस विकसित करने की योजना है। इससे किसानों की उपज के लिए नए बाजार बनने की उम्मीद है।

भोपाल: राजधानी में आईटी, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नॉलेज सर्विसेज से जुड़े उद्योग विकसित किए जाएंगे।

सीहोर और देवास: यहां फूड प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग पर जोर दिया जाएगा।

इंदौर: यहां आईटी, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। इसे देवास और पीथमपुर के मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र से भी जोड़ा जाएगा।

हालांकि, इन उद्योगों के लिए जमीन और अंतिम स्थान का चयन अभी बाकी है।

किसानों की जमीन का क्या होगा?

इतनी बड़ी परियोजना में जमीन की जरूरत भी पड़ेगी। ऐसे में किसानों की जमीन को लेकर भी सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। बता दें कि औद्योगिक हब बनाने के लिए सबसे पहले सरकारी जमीन को प्राथमिकता दी जाएगी।

निजी जमीन की जरूरत पड़ने पर उसे आपसी सहमति से खरीदा जाएगा या फिर कानून के अनुसार अधिग्रहित किया जाएगा। ऐसी स्थिति में मुआवजे और पुनर्वास के नियमों का पालन करना होगा।

वहीं वन भूमि का इस्तेमाल केंद्र सरकार की जरूरी अनुमति और वन संरक्षण कानून की शर्तों के तहत ही किया जा सकेगा। हर औद्योगिक हब बनाने से पहले पर्यावरण और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन भी किया जाएगा।

जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर: 7 जिलों में लगेंगे उद्योग, 6 लाख से ज्यादा रोजगार की उम्मीद | Jabalpur-Bhopal-Indore Economic Corridor: Industries to be set up in 7 districts, over 6 lakh jobs expected
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15 Oct 2026 ,
By Sourabh Bhatnagar
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जनजातीय क्षेत्रों में बसों के लिए 241 करोड़ मंजूर

इसके अलावा कैबिनेट बैठक में स्कूलों से जुड़ी परिवहन व्यवस्था पर भी फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों सहित संबंधित इलाकों में स्कूल बसों की व्यवस्था के लिए करीब 241 करोड़ रुपए की योजना मंजूर की गई है।

कुछ जिलों में बसों की व्यवस्था और संचालन से जुड़े अधिकार कलेक्टरों को दिए गए हैं। इससे स्थानीय जरूरत के अनुसार व्यवस्था करने में आसानी होगी।

स्कूल और छात्रावासों के लिए 3000 करोड़

स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, स्कूल भवनों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, आवासीय सुविधाओं और खेलकूद भवनों के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है।

सरकार का लक्ष्य अगले दो साल में स्कूलों की जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। खासकर जर्जर स्कूल भवनों की समस्या दूर करने पर जोर दिया जाएगा। इस काम में सांसद, विधायक और जनभागीदारी से मिलने वाली राशि को भी जोड़ा जा सकेगा।

चार नए जिलों में खुलेंगे महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय

कैबिनेट बैठक में चार नए जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खोलने का भी फैसला लिया गया। ये कार्यालय निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि नए जिलों में सरकारी विभागों के कार्यालय खोलने का काम लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

कैबिनेट (MP Cabinet Decision) ने प्रदेश की कई सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी है। इनमें बुरहानपुर और नेपानगर क्षेत्र से जुड़ी झिरमरी सिंचाई परियोजना शामिल है।

रायसेन जिले की बारना सिंचाई परियोजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इससे उदयपुरा, भोजपुर, सांची और सिलवानी क्षेत्र लाभान्वित होंगे।

इसके अलावा कयामपुर-सीतामऊ बांध परियोजना की करीब 750 करोड़ रुपए की योजना को जारी रखने की मंजूरी दी गई है। सिंगरौली जिले की चित्रंगी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए भी करीब 1320 करोड़ रुपए की पांच वर्षीय योजना को मंजूरी दी गई है।

आयुष मिशन के लिए करीब 1698 करोड़

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन को जारी रखने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इसके लिए करीब 1698 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पहले सात आयुर्वेदिक कॉलेज थे। पिछले ढाई साल में नौ नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मंजूरी दी गई है। इन कॉलेजों को शुरू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

बिजली की मांग पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों से मदद

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बारिश और धान की खेती के समय में बदलाव के कारण कुछ इलाकों में बिजली की मांग बढ़ी है।

इस जरूरत को पूरा करने के लिए गुजरात के सरदार सरोवर से 800 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी बिजली लेकर स्थिति संभालने का प्रयास किया गया है।

राज्य के संसाधनों से आगे बढ़ेगी परियोजना

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार फिलहाल अपने वित्तीय संसाधनों के आधार पर इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी जरूरतों के अनुसार निवेश बढ़ाया जा रहा है। ग्वालियर में टेलीकॉम, महाकौशल में उद्योग और विंध्य क्षेत्र में खनन व पर्यटन की संभावनाओं पर काम हो रहा है।

सरकार का उद्देश्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में उद्योगों को बढ़ावा देना है, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें।

फिलहाल इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए नई कंपनी बनाने की मंजूरी मिल गई है। अब जमीन की पहचान, औद्योगिक हब की योजना और निवेशकों को जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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