MP में UCC को कैबिनेट की मंजूरी, अब दूसरी शादी का लड्डू होगा मुश्किल
Ramanand Tiwari | Jul 19, 2026, 14:45 IST
mp cabinet approves ucc marriage rule
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब राज्य में सभी नागरिकों के लिए विवाह और तलाक से जुड़े कानून एक समान होंगे, जिससे समानता बढ़ेगी।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने UCC के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सरकार का दावा है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान वैवाहिक नियमों की दिशा में व्यवस्था मजबूत होगी और कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत और प्रभावी बनेगा। जिसमें बहुविवाह, लिव-इन रिलेशनशिप और तलाक से जुड़े नियम शामिल हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने UCC लागू करने की दिशा में कैबिनेट से मंजूरी दी है। सभी नागरिकों के लिए समान वैवाहिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।
एक से अधिक विवाह पर कानूनी रोक के प्रावधान को मजबूत करने की पहल की जाएगी। सरकार का दावा है कि समान कानून से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट होगी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलने की बात कही जा रही है। सरकार इसे समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
सरकार के अनुसार, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। इससे विवाह, परिवार और संबंधित मामलों में एकरूपता लाने की कोशिश की जाएगी।
सरकार का कहना है कि UCC लागू होने के बाद एक से अधिक विवाह से जुड़े मामलों में समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे। इससे वैवाहिक व्यवस्था को एक समान नियमों के दायरे में लाने का प्रयास किया जाएगा।
प्रस्तावित नियमों में लिव-इन रिलेशनशिप यानी बिना विवाह साथ रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीयन की व्यवस्था शामिल की जा सकती है। इसका उद्देश्य ऐसे रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास "लिव-इन रिलेशनशिप का बयान" जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए।
यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।
लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है।
बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10 हजार जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25 हजार जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25 हजार का जुर्माना हो सकता है।
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार पूरी तरह लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित कानून लाना चाहती है। इसके तहत सभी समुदायों के पुरुषों और महिलाओं के लिए एक जैसा पारिवारिक कानून लागू होगा। संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों जितना ही अधिकार मिलेगा।
इसके साथ ही एकतरफा या भेदभावपूर्ण तलाक कानूनों को खत्म करने की तैयारी है। अब किसी भी तलाक का सरकारी पोर्टल या कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा, तभी वह वैध माना जाएगा। तलाक के बाद महिला और बच्चों के गुजारा भत्ते के नियम सभी धर्मों के लिए एक जैसे रहेंगे।
जानकारी के अनुसार, नया कानून लागू होते ही सभी धर्मों के पर्सनल लॉ जैसे हिंदू कोड बिल या मुस्लिम पर्सनल लॉ का असर खत्म हो जाएगा। विवाह, गोद लेने और संपत्ति के अधिकार में सबके लिए एक जैसे नियम होंगे। यूसीसी को इस तरह बनाया गया है कि किसी की धार्मिक आजादी छीने बिना समानता के अधिकार और संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन बना रहे।
सरकार ने इस निर्णय को राज्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। सरकार का दावा है कि इससे कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत और मजबूत होगा तथा प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी।
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सरकार का दावा है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान वैवाहिक नियमों की दिशा में व्यवस्था मजबूत होगी और कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत और प्रभावी बनेगा। जिसमें बहुविवाह, लिव-इन रिलेशनशिप और तलाक से जुड़े नियम शामिल हैं।
क्या है इस फैसले की बड़ी बातें?
एक से अधिक विवाह पर कानूनी रोक के प्रावधान को मजबूत करने की पहल की जाएगी। सरकार का दावा है कि समान कानून से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट होगी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलने की बात कही जा रही है। सरकार इसे समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
UCC का उद्देश्य क्या है?
बहुविवाह पर क्या असर पड़ेगा?
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी प्रस्ताव
लिव-इन रिलेशनशिप
पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए।
यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।
महिला पार्टनर और बच्चों को सुरक्षा
बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10 हजार जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25 हजार जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25 हजार का जुर्माना हो सकता है।
सभी धर्मों के लिए समान कानून
इसके साथ ही एकतरफा या भेदभावपूर्ण तलाक कानूनों को खत्म करने की तैयारी है। अब किसी भी तलाक का सरकारी पोर्टल या कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा, तभी वह वैध माना जाएगा। तलाक के बाद महिला और बच्चों के गुजारा भत्ते के नियम सभी धर्मों के लिए एक जैसे रहेंगे।
पर्सनल लॉ की जगह लेगा नया कानून
सरकार का क्या कहना है?
FAQ
- मध्यप्रदेश में UCC को लेकर क्या फैसला हुआ है?
राज्य मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार इसे समान वैवाहिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। अभी यह मंजूरी के स्तर पर है, कानून बनने में और प्रक्रिया बाकी है। - UCC लागू होने से बहुविवाह पर क्या असर होगा?
सरकार के अनुसार एक से अधिक विवाह से जुड़े मामलों में सभी के लिए समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे। यह अभी के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से अलग व्यवस्था होगी। हालांकि इसका ब्योरा आगे स्पष्ट होगा। - सरकार इस फैसले को कैसे देख रही है?
सरकार ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया है। उसका दावा है कि इससे कानून के सामने समानता मजबूत होगी। सरकार का यह भी कहना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट होगी।
मोहन कैबिनेट बैठक में आज UCC और मेडिकल यूनिवर्सिटी समेत कई विधेयकों पर लगी मुहर
सीएम मोहन यादव फिर बोले इसी सत्र में आएगा UCC, रामचंद्र की एक शादी तो रहीम से भी यही उम्मीद
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