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Photograph: (THESOOTR)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने तय किया है कि आदिम जाति कल्याण और स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख योजनाएं अगले पांच साल यानी 2030-31 तक लगातार चलती रहेंगी। इस फैसले से छात्रों को छात्रवृत्ति, साइकिल, मेधावी पुरस्कार और छात्रावास सुविधाएं मिलती रहेंगी। वहीं आदिवासी इलाकों में विकास कार्य भी जारी रहेंगे। कैबिनेट ने इन योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
क्या है कैबिनेट का मुख्य निर्णय?
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को मंजूरी देते हुए कई प्रमुख योजनाओं की निरंतरता तय की है। आदिवासी और अनुसूचित जाति क्षेत्रों का विकास छात्रों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन, शैक्षणिक संस्थाओं का उन्नयन. ग्रामीण और जनजातीय बस्तियों में आधारभूत ढांचा मजबूत करना है।
शिक्षा और छात्र हित की योजनाएं 2030-31 तक जारी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (11वीं, 12वीं और कॉलेज),सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक योजना जारी रखने के लिए 4,230 करोड़ 82 लाख रुपए मंजूर किए हैं। इससे लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (कक्षा 9वीं-10वीं) इस योजना के लिए 690 करोड़ 69 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
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साइकिल वितरण और मेधावी छात्र पुरस्कार
साइकिल प्रदाय और मेधावी छात्र पुरस्कार योजना भी अगले पांच साल तक जारी रहेगी। छात्रावास और उत्कृष्टता पुरस्कार आश्रम, छात्रावास और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार योजना भी जारी रहेगी। इन सभी योजनाओं के लिए 519 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय निरंतरता को मंजूरी दी गई है।
आदिवासी क्षेत्रों में विकास के लिए बड़ा बजट
क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन इकाइयों और जनजातीय विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए 53 करोड़ 97 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। बस्तियों और भवन निर्माण कार्य 1032 कार्यालय भवनों का निर्माण विद्युतीकरण कार्य
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टंट्या भील मंदिर का जीर्णोद्धार
ग्रामीण स्कूलों का उन्नयन और संधारण इन कार्यों के लिए कुल 583 करोड़ 75 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान इस अभियान के संचालन के लिए 847 करोड़ 89 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।
जनजातीय युवाओं के लिए रोजगार
सरकार ने जनजातीय युवाओं को रोजगारमूलक आर्थिक सहायता, नेतृत्व विकास, भारत दर्शन, संस्कृति संरक्षण और देवस्थान विकास जैसी योजनाओं को भी जारी रखने का फैसला किया है। साथ ही विशेष पिछड़े जनजाति समूह अभिकरण और कोल जनजाति विकास अभिकरण के संचालन के लिए 59 करोड़ 6 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
सरकार का 5 साल का रोडमैप क्या बताता है? कैबिनेट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकार शिक्षा, छात्रवृत्ति और आदिवासी विकास को दीर्घकालिक प्राथमिकता दे रही है। 2030-31 तक योजनाओं की निरंतरता का मतलब है कि छात्र और जनजातीय समुदाय आने वाले वर्षों में भी आर्थिक और शैक्षणिक सहायता से जुड़े रहेंगे। संक्षेप में समझिए पूरा फैसला
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प्रमुख योजनाएं 2030-31 तक जारी
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 4,230 करोड़ से अधिक की मंजूरी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 690 करोड़ से अधिक का प्रावधान बस्तियों और भवन निर्माण के लिए 583 करोड़ से अधिक की स्वीकृति धरती आबा अभियान के लिए 847 करोड़ से अधिक मंजूर सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर छात्रों, आदिवासी परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़ा हुआ है। आने वाले पांच साल में इन योजनाओं का असर जमीन पर दिखने की उम्मीद है।
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