छिंदवाड़ा में 22 बच्चों की मौत की 5 वजह, लापरवाही और लालच के दलदल की चार्जशीट
CHAKRESH | Feb 13, 2026, 12:34 IST
mp cough syrup deaths chain
छिंदवाड़ा में 22 बच्चों की मौत के मामले में एसआईटी ने 90 दिनों में कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी, लेकिन यह चार्जशीट आधी-अधूरी है। चार हजार पन्नों की चार्जशीट में कुछ जांच रिपोर्ट गायब थीं।
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड:मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुई 22 बच्चों की मौत के मामले में पुलिस ने पांच खामियों को उजागर किया है। ये पांचों खामियां दरअसर दवा के मार्केट का काला सच उजागर करती हैं।
जहां दवा बनाने से लेकर मरीज कर पहुंचने तक कदम-कदम पर किस तरह की धंधेबाजी चलती है। बता दें कि जिस कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई, उसका नाम ColdRif था।
यह सिरप श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स ने बनाया था और खासतौर पर छिंदवाड़ा जिले में डिस्ट्रीब्यूट किया गया था।
बच्चों की मौत के मामले में पुलिस अब जल्दी ही फाइनल चार्जशीट पेश करने का दावा कर रही है, लेकिन पीड़ित परिवारों ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पुलिस जानबूझकर मामले में ढिलाई कर रही है। उन्होंने परासिया में आंदोलन की अनुमति भी मांगी है। छिंदवाड़ा के एसपी अजय पांडे ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि रिपोर्ट्स में देरी के कारण फाइनल चार्जशीट अभी तक पेश नहीं हो सकी।
![chhindwara toxic syrup case 1]()
घातक सामग्री का उपयोग: कोल्ड्रिफ कफ सिरपमें फार्मास्युटिकल-ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकॉल की जगह सस्ते और खतरनाक औद्योगिक-ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल हुआ था।
सर्टिफिकेशन में खामी: कंपनी ने कच्चे माल की गुणवत्ता को लेकर कोई प्रमाणपत्र नहीं लिया और बगैर किसी जांच के सामान खरीदा।
वितरण नेटवर्क की गड़बड़ी: दवा के वितरण में पारदर्शिता की घोर कमी पाई गई। स्थानीय स्टॉकिस्ट ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के सीधे निर्माता से माल खरीदा।
डॉक्टरों को गिफ्ट बांटे: स्टीक कमीशन और उपहारों के जरिए डॉक्टरों को दवाएं लिखवाने के लिए लालच दिया गया।
चेतावनी की अनदेखी: एक विशेषज्ञ की चेतावनी के बावजूद, संबंधित डॉक्टर ने सही कदम नहीं उठाया और लापरवाही से बच्चों की मौत को बढ़ावा दिया।
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इस मामले के मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी ने नागपुर के डॉ. प्रवीण खापेकर से 11 सितंबर, 2025 को फोन पर बात की थी। इस बातचीत में डॉ. खापेकर ने 1998 की गुड़गांव त्रासदी का जिक्र किया था।
त्रासदी में DEG (डाइएथिलीन ग्लाइकोल) की वजह से 33 बच्चों की मौत हो गई थी। डॉ. खापेकर ने चेतावनी भी दी थी कि इस दवा को तुरंत जांचा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उनका इलाज कर रहे डॉ. सोनी ने इस चेतावनी को नजरअंदाज किया था। जब तक सरकार और स्थानीय प्रशासन जागता, तब तक छिंदवाड़ा में 15 बच्चों की मौत हो चुकी थी।
![chhindwara toxic syrup case]()
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि कफ सिरप का जो बैच छिंदवाड़ा पहुंचा था, उसे SR-13 कहा जाता है। यह सिरप एक आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से जिले में वितरित किया गया था, जो निचली गुणवत्ता वाली दवाओं में लिप्त था।
इधर श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स की जांच में यह भी पाया गया है कि उन्होंने कच्चे माल को बिना आवश्यक प्रमाणपत्र के खरीदा था। इसके अलावा, दवाओं में औद्योगिक-ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया गया था, जो फार्मास्यूटिकल-ग्रेड के मुकाबले बेहद खतरनाक होता है।
चार्जशीट के मुताबिक, श्रीसन फार्मा की दवाओं को छिंदवाड़ा भेजने के लिए एक सामान्य तीन-स्तरीय वितरण चैनल होना चाहिए था, लेकिन इसे बायपास कर दिया गया। इसके बजाय, "न्यू अपना फार्मा" नामक स्टॉकिस्ट ने सीधे श्रीसन फार्मा से दवाएं खरीदीं और इन्हें डॉ. प्रवीण सोनी के क्लिनिक से जुड़े मेडिकल स्टोर पर भेज दिया।
यहां से ये सिरप (जो नशीली कफ सिरप थी) बच्चों तक पहुंची, जिससे बच्चों को किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
इस पूरे नेटवर्क में एक अहम भूमिका मेडिकल प्रतिनिधि सतीश वर्मा की थी। वर्मा ने श्रीसन फार्मा के लिए काम करते हुए डॉक्टरों को गिफ्ट्स और पैसे दिए, ताकि वे इस सिरप को लिखें। इसके बाद ही ये दवाएं बच्चों तक पहुंची।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी ने इस कफ सिरप (छिंदवाड़ा कफ सिरप न्यूज) के सेवन से प्रभावित बच्चों का इलाज किया। हालांकि, उन्हें बच्चों के किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं दिखीं, लेकिन उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस बारे में सूचित नहीं किया। इस कारण बच्चों की मौतों को समय रहते नहीं रोका जा सका।
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जहां दवा बनाने से लेकर मरीज कर पहुंचने तक कदम-कदम पर किस तरह की धंधेबाजी चलती है। बता दें कि जिस कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई, उसका नाम ColdRif था।
यह सिरप श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स ने बनाया था और खासतौर पर छिंदवाड़ा जिले में डिस्ट्रीब्यूट किया गया था।
बच्चों की मौत के मामले में पुलिस अब जल्दी ही फाइनल चार्जशीट पेश करने का दावा कर रही है, लेकिन पीड़ित परिवारों ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पुलिस जानबूझकर मामले में ढिलाई कर रही है। उन्होंने परासिया में आंदोलन की अनुमति भी मांगी है। छिंदवाड़ा के एसपी अजय पांडे ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि रिपोर्ट्स में देरी के कारण फाइनल चार्जशीट अभी तक पेश नहीं हो सकी।
chhindwara toxic syrup case 1
छिंदवाड़ा कांड में पांच बड़ी चूक
सर्टिफिकेशन में खामी: कंपनी ने कच्चे माल की गुणवत्ता को लेकर कोई प्रमाणपत्र नहीं लिया और बगैर किसी जांच के सामान खरीदा।
वितरण नेटवर्क की गड़बड़ी: दवा के वितरण में पारदर्शिता की घोर कमी पाई गई। स्थानीय स्टॉकिस्ट ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के सीधे निर्माता से माल खरीदा।
डॉक्टरों को गिफ्ट बांटे: स्टीक कमीशन और उपहारों के जरिए डॉक्टरों को दवाएं लिखवाने के लिए लालच दिया गया।
चेतावनी की अनदेखी: एक विशेषज्ञ की चेतावनी के बावजूद, संबंधित डॉक्टर ने सही कदम नहीं उठाया और लापरवाही से बच्चों की मौत को बढ़ावा दिया।
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नागपुर के डॉक्टर ने दी थी चेतावनी
त्रासदी में DEG (डाइएथिलीन ग्लाइकोल) की वजह से 33 बच्चों की मौत हो गई थी। डॉ. खापेकर ने चेतावनी भी दी थी कि इस दवा को तुरंत जांचा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उनका इलाज कर रहे डॉ. सोनी ने इस चेतावनी को नजरअंदाज किया था। जब तक सरकार और स्थानीय प्रशासन जागता, तब तक छिंदवाड़ा में 15 बच्चों की मौत हो चुकी थी।
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सारा खेल हुई बैच SR-13 से
इधर श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स की जांच में यह भी पाया गया है कि उन्होंने कच्चे माल को बिना आवश्यक प्रमाणपत्र के खरीदा था। इसके अलावा, दवाओं में औद्योगिक-ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया गया था, जो फार्मास्यूटिकल-ग्रेड के मुकाबले बेहद खतरनाक होता है।
ये भी ध्यान रखें...
- तमिलनाडु औषधि विभाग ने श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स के निरीक्षण में 325 प्रमुख कमियां पाईं।
- स्थानीय स्टॉकिस्ट न्यू अपना फार्मा ने राज्य वितरक कटारिया फार्मा को दरकिनार कर सीधे निर्माता से दवाएं मंगवाईं।
- न्यू अपना फार्मा का संचालन राजेश सोनी द्वारा किया जा रहा था, जो उपचार करने वाले डॉक्टर, डॉ. प्रवीण सोनी का भतीजे है। यह फार्मा कंपनी डॉक्टर के घर से ही संचालित हो रही थी।
- कोल्ड्रिफ की 330 बोतलों में से 87 बोतलें सीधे अपना मेडिकल स्टोर को भेजी गईं, जिसका संचालन डॉ. प्रवीण सोनी की पत्नी ज्योति सोनी करती थीं।
- 281 सेकंड की बातचीत में डॉ. खापेकर ने 1998 की गुड़गांव त्रासदी का संदर्भ देते हुए चेतावनी दी कि यह Drug-induced toxicity हो सकती है।
- मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट में कुल 11 व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया है।
डिस्ट्रीब्यूशन में भी गड़बड़ी
यहां से ये सिरप (जो नशीली कफ सिरप थी) बच्चों तक पहुंची, जिससे बच्चों को किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
मेडिकल प्रतिनिधि और गिफ्ट सिस्टम
डॉ. सोनी की भूमिका
कफ सिरप कांड से जुड़ी खबरें पढ़ें...
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