MP में चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में इंदौर सबसे आगे, दूसरे नंबर पर राजधानी भोपाल
Aman Vaishnav | Sept 17, 2026, 08:30 IST
मध्यप्रदेश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी
मध्य प्रदेश में 1 जनवरी से 31 अगस्त 2026 तक महिलाओं व बच्चों से जुड़े साइबर अपराध की 2600 टिपलाइन आईं। वहीं चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने के मामले में इंदौर सबसे आगे रहा।
मध्य प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े अपराधों की संख्या लगातार सामने आ रही है। राज्य साइबर सेल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 अगस्त 2026 तक प्रदेश में महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की कुल 2600 साइबर टिपलाइन मिली हैं।
बच्चों के यौन शोषण वाला डिजिटल कंटेंट देखने के मामले में इंदौर पूरे प्रदेश में सबसे आगे चल रहा है।
कुल मामलों में से करीब 450 टिपलाइन इंदौर और लगभग 400 टिपलाइन राजधानी भोपाल से जुड़ी हैं। इनके बाद ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और उज्जैन जैसे शहरों के नाम आते हैं। अकेले भोपाल शहर में ऐसे मामलों को लेकर 6 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घिनौनी गतिविधि सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर, देवास, धार और रतलाम के ग्रामीण इलाकों तक फैल चुकी है।
अमेरिका की संस्था एनसीएमईसी से भारत को 69 लाख से ज्यादा साइबर टिपलाइन मिली थीं। इनमें से 1% मामलों में भी चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई थी।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की रिपोर्टिंग व्यवस्था से यह जानकारी एनसीएमईसी टिपलाइन तक पहुंचती है। इसके बाद वहां से भारतीय जांच एजेंसियों व पुलिस तक आती है।
जांच के दौरान पुलिस और साइबर सेल के सामने चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं...
इंदौर में 14 टिपलाइन का एक ही कनेक्शन
दिसंबर 2025 में राज्य साइबर सेल इंदौर को जांच के लिए 14 साइबर टिपलाइन मिली थीं। तकनीकी जांच और सीडीआर विश्लेषण में सामने आया कि सभी 14 रिपोर्टों में एक ही मोबाइल नंबर था।
घटना के समय मोबाइल की लोकेशन देवास क्षेत्र में पाई गई। इसी नंबर से कई अलग-अलग खातों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा की गई थी।
पश्चिम बंगाल में पंजीकृत सिम और देवास में इस्तेमाल
खातेगांव क्षेत्र के एक मामले में इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड था, लेकिन उसकी लोकेशन संदलपुर में मिली।
पुलिस जांच में एक एनजीओ के छात्रावास में काम करने वाले दो व्यक्ति सामने आए, जिन्हें अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार कर मोबाइल जब्त किए गए। हालांकि वीडियो डिलीट कर दिए गए थे, लेकिन यूजर आईडी और तकनीकी रिकॉर्ड से सबूत मिले।
राज्य साइबर सेल के एसपी प्रणय नागवंशी ने बताया कि जांच में डिजिटल सुराग ही कार्रवाई की दिशा तय करते हैं। पुलिस किसी एक संकेत के आधार पर सीधी कार्रवाई नहीं करती, बल्कि सभी तकनीकी जानकारियों को जोड़कर उनका सत्यापन करने के बाद ही कानूनी कदम उठाती है।
गृह मंत्रालय ने 24 मार्च 2026 को लोकसभा में एनसीआरबी की क्राइम इन इंडिया 2023 रिपोर्ट (एनसीआरबी रिपोर्ट) के आधार पर राज्यों के आंकड़े पेश किए थे।
मध्य प्रदेश में पिछले 3 वर्षों का रिकॉर्ड
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जहां संस्कार सिखाए जाते थे, उसी NGO के हॉस्टल में चल रहा था चाइल्ड पोर्नोग्राफी गैंग का अड्डा
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बच्चों के यौन शोषण वाला डिजिटल कंटेंट देखने के मामले में इंदौर पूरे प्रदेश में सबसे आगे चल रहा है।
कुल मामलों में से करीब 450 टिपलाइन इंदौर और लगभग 400 टिपलाइन राजधानी भोपाल से जुड़ी हैं। इनके बाद ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और उज्जैन जैसे शहरों के नाम आते हैं। अकेले भोपाल शहर में ऐसे मामलों को लेकर 6 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
गांवों तक पहुंचा डिजिटल कंटेंट
अमेरिका की संस्था एनसीएमईसी से भारत को 69 लाख से ज्यादा साइबर टिपलाइन मिली थीं। इनमें से 1% मामलों में भी चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई थी।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की रिपोर्टिंग व्यवस्था से यह जानकारी एनसीएमईसी टिपलाइन तक पहुंचती है। इसके बाद वहां से भारतीय जांच एजेंसियों व पुलिस तक आती है।
इंदौर और देवास के मामले
इंदौर में 14 टिपलाइन का एक ही कनेक्शन
दिसंबर 2025 में राज्य साइबर सेल इंदौर को जांच के लिए 14 साइबर टिपलाइन मिली थीं। तकनीकी जांच और सीडीआर विश्लेषण में सामने आया कि सभी 14 रिपोर्टों में एक ही मोबाइल नंबर था।
घटना के समय मोबाइल की लोकेशन देवास क्षेत्र में पाई गई। इसी नंबर से कई अलग-अलग खातों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा की गई थी।
पश्चिम बंगाल में पंजीकृत सिम और देवास में इस्तेमाल
खातेगांव क्षेत्र के एक मामले में इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड था, लेकिन उसकी लोकेशन संदलपुर में मिली।
पुलिस जांच में एक एनजीओ के छात्रावास में काम करने वाले दो व्यक्ति सामने आए, जिन्हें अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार कर मोबाइल जब्त किए गए। हालांकि वीडियो डिलीट कर दिए गए थे, लेकिन यूजर आईडी और तकनीकी रिकॉर्ड से सबूत मिले।
डिजिटल सुराग के आधार पर कार्रवाई
3 साल के आंकड़े और राज्यों की स्थिति
मध्य प्रदेश में पिछले 3 वर्षों का रिकॉर्ड
- साल 2021 में कुल 45 मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें अपराध दर प्रति लाख 0.2 रही।
- साल 2022 में कुल 176 मामले दर्ज हुए थे, जिसमें अपराध दर प्रति लाख 0.6 रही।
- साल 2023 में कुल 43 मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें अपराध दर प्रति लाख 0.1 रही।
- केरल (Kerala): 443 दर्ज मामले
- कर्नाटक (Karnataka): 363 दर्ज मामले
- राजस्थान (Rajasthan): 306 दर्ज मामले
- छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh): 193 दर्ज मामले
- आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh): 83 दर्ज मामले
- मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh): 43 दर्ज मामले
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