CAG रिपोर्ट ने खोली एमपी शिक्षा विभाग में नियुक्ति और तबादला सिस्टम की पोल

CAG की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में करोड़ों की अनियमितताओं का खुलासा किया है। इसमें शिक्षकों की अयोग्य तैनाती और तबादलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

author-image
Ramanand Tiwari
New Update
mp education department cag report teacher transfer scam

BHOPAL.  Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट नेमध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट बताती है कि हजारों ऐसे स्कूल हैं जहां छात्रों की संख्या बेहद कम या शून्य है, फिर भी वहां शिक्षक पदस्थ हैं।

दूसरी ओर राज्य में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों की कमी बताई जाती है। ऐसे में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में तैनात 11 हजार 995 शिक्षकों पर एक साल में कई करोड़ों रुपए खर्च होना क्या महज लापरवाही है या करोड़ों का घोटाला?

CAG रिपोर्ट में बड़े खुलासे

  • छह हजार 954 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम या शून्य है।

  • ऐसे स्कूलों में 11 हजार 995 शिक्षक पदस्थ हैं।

  • राज्य में 1 लाख से अधिक शिक्षकों की कमी का दावा किया गया है।

  • भोपाल के शहरी क्षेत्रों में 108 प्रतिशत तक नियुक्ति की गई है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में 15 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में 8 प्रतिशत अतिरिक्त शिक्षक मौजूद हैं।

  • पिछले आठ वर्षों से पदों का व्यापक युक्तिकरण नहीं हुआ है।

कैसे बना करोड़ों का घोटाला?

CAG ऑडिट के अनुसार कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में तैनात शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजा जा सकता था। वहीं, एमपी शिक्षा विभाग ने समय रहते युक्तिकरण नहीं किया है।

यदि एक शिक्षक का औसत वेतन 70 हजार रुपए प्रतिमाह माना जाए, तो 11 हजार 995 शिक्षकों पर सालभर में करोड़ों रुपए का भुगतान हुआ है। रिपोर्ट इसे परिहार्य वित्तीय बोझ बताती है। यहीं से करोड़ों के घोटाले की चर्चा ने जोर पकड़ा है।

शहरी इलाकों में भरमार, गांवों में इंतजार

राजधानी भोपाल के शहरी क्षेत्रों में स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियां दर्ज की गई हैं। यानी जहां पहले से पर्याप्त शिक्षक थे, वहीं और पदस्थापना की गई है।

इसके उलट ग्रामीण क्षेत्रों में 15 प्रतिशत पद खाली रहे। सवाल उठता है कि जब कमी साफ दिख रही थी, तो संतुलन क्यों नहीं बनाया गया?

प्रोबेशन में तबादले: नियमों को किनारे?

नियमों के मुताबिक शिक्षकों को कम से कम तीन साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देना अनिवार्य है। वहीं, रिपोर्ट में सामने आया कि प्रोबेशन अवधि के दौरान ही स्वैच्छिक तबादले की अनुमति दी गई।

इस फैसले से शहरी स्कूलों में शिक्षकों का जमावड़ा बढ़ा और गांवों में कक्षाएं खाली रहीं। क्या यह प्रशासनिक दबाव था या सिस्टम की अनदेखी?

आठ साल से युक्तिकरण ठंडे बस्ते में

कैग रिपोर्ट बताती है कि पिछले आठ वर्षों से पदों का व्यापक युक्तिकरण नहीं हुआ है। अतिशेष शिक्षकों को समायोजित किए बिना नई भर्तियां जारी रहीं।

जब पुरानी तैनाती संतुलित नहीं थी, तब नई भर्ती ने वित्तीय भार और बढ़ाया। यही स्थिति कई करोड़ों के घोटाले की ओर इशारा करती है।

NO WORK NO PAY पर चुप्पी क्यों?

सरकार अन्य मामलों में NO WORK NO PAY का सिद्धांत लागू करने की बात करती है। वहीं, यहां ऐसा कोई कदम सामने नहीं आया है। जब शिक्षक जरूरत वाले स्कूलों में नहीं पहुंचे, तो वेतन भुगतान की समीक्षा क्यों नहीं हुई? यही बड़ा सवाल है।

मॉनिटरिंग के बावजूद क्यों नहीं रुका खेल?

विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग और बैठकें होती रही हैं। आदेश भी जारी हुए थे। वहीं, जमीनी हकीकत नहीं बदली। यदि समय रहते पदों का संतुलन बनाया जाता, तो करोड़ों का यह वित्तीय नुकसान टाला जा सकता था।

जवाबदेही तय होगी या मामला ठंडा पड़ेगा? CAG ने स्पष्ट सुझाव दिए हैं- वैज्ञानिक युक्तिकरण, ग्रामीण सेवा नियमों का पालन और अतिशेष शिक्षकों का समायोजन। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन सुझावों पर कितनी गंभीरता से अमल करती है। वरना शिक्षा विभाग में कई करोड़ों के घोटाले जैसे सवाल बार-बार उठते रहेंगे।

ये खबर भी पढ़िए...

CAG रिपोर्ट में खनिज विभाग पर सवाल : 2020–23 के बीच 1,400 करोड़ से ज्यादा की राजस्व हानि का खुलासा

MP News: एक चेसिस नंबर पर 16 हजार वाहन रजिस्टर्ड, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

CAG की रिपोर्ट में 6 साल पहले चेतावनी, इंदौर के पानी में बैक्टिरिया, 5.33 लाख घरों में दूषित जल जा रहा

मध्यप्रदेश गजब: क्रांतिसूर्य टंट्या भील यूनिवर्सिटी में 140 पद खाली, फिर भी चल रही पढ़ाई!

एमपी शिक्षा विभाग राजधानी भोपाल मध्यप्रदेश MP News स्कूल शिक्षा विभाग कैग रिपोर्ट CAG शिक्षा विभाग
Advertisment