एमपी में 10% महंगी होगी बिजली, जनता की जेब पर पड़ेगा भारी बोझ

मध्य प्रदेश में बिजली की कीमतें 10% तक बढ़ने की संभावना है। एक अप्रैल से उपभोक्ताओं को 300 रुपए तक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है। जानें पूरी खबर!

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Sanjay Dhiman
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Electricity will become expensive by 10% in MP, it will be a heavy burden on public pockets

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • मध्य प्रदेश में बिजली बिल दरों में 10% बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से लागू हो सकता है।
  • उपभोक्ताओं को हर महीने 300 रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
  • बिजली कंपनियां 6000 करोड़ रुपए के घाटे को पूरा करने के लिए दरें बढ़ाने की मांग कर रही हैं।
  • कोयले पर जीएसटी सेस हटाने का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिला, दरें बढ़ाने का दबाव।
  • बिजली नियामक आयोग में सोमवार से शुरू हुई सुनवाई, उपभोक्ताओं को आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। 

News in Detail

मध्य प्रदेश में बिजली के बिलों में वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में बिजली की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी की योजना बनाई जा रही है। सोमवार से बिजली नियामक आयोग में इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू हो गई है। यह सुनवाई 'ट्रू-अप' याचिका पर आधारित है, जिसमें बिजली दरों में 10.2% की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

6000 करोड़ से अधिक का घाटा

बिजली वितरण कंपनियों ने 2026-27 के लिए 6000 करोड़ रुपए से अधिक के राजस्व घाटे का हवाला दिया है। इन कंपनियों का कहना है कि घाटे को पूरा करने के लिए दरें बढ़ानी जरूरी हैं। इससे राज्य के एक करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को सालाना 3600 रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। यह बढ़ोतरी हर महीने लगभग 300 रुपए तक हो सकती है। 

उपभोक्ता समूहों का विरोध

बिजली के बिलों में बढ़ोतरी के खिलाफ उपभोक्ता समूह और बिजली विशेषज्ञ लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से ही मध्य प्रदेश के बिजली दरें पड़ोसी राज्यों से महंगी हैं, और अब एक और बढ़ोतरी से आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

कोयले पर जीएसटी हटाने का असर नहीं

पिछले साल, केंद्र सरकार ने बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले कोयले पर लगने वाला जीएसटी सेस (कंपेंसेशन सेस) पूरी तरह हटा लिया था। इससे बिजली उत्पादन की लागत में प्रति यूनिट 17 से 18 पैसे की कमी आने की संभावना थी। लेकिन, बिजली कंपनियां इसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की बजाय 10.19% की बढ़ोतरी मांग रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि बचत का फायदा उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुंच रहा।

सुनवाई की प्रक्रिया

यह सुनवाई हाइब्रिड मोड में हो रही है, यानी उपभोक्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए या भोपाल स्थित आयोग के कोर्ट हॉल में जाकर अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बातें रखने का पूरा मौका मिलेगा।

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