पुरुषों को पीछे कर आगे निकलीं महिलाएं, एमपी सरकार की नई रिपोर्ट ने चौंकाया

आर्थिक सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, एमपी के सरकारी विभागों में क्लास 1 से 3 तक महिलाओं की संख्या 30% पार कर गई है। हालांकि, 2024 के मुकाबले 2025 में कुल नौकरियों में गिरावट आई है।

author-image
Anjali Dwivedi
New Update
mp-govt-jobs-women-share-increases-report-2025

News in Short

  • पिछले तीन सालों में सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या 2.5% बढ़ी, जबकि पुरुषों का % कम हुआ।
  • क्लास-वन, टू और थ्री श्रेणियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 30% से ऊपर पहुंची है।
  • 2024 के मुकाबले 2025 में प्रदेश में कुल 16 हजार 396 नौकरियां कम हुई हैं।
  • प्रदेश के कुल नियमित कर्मचारियों में से 37.66% अकेले स्कूल शिक्षा विभाग में हैं।
  • सरकारी विभागों के उलट, प्रदेश के बड़े विश्वविद्यालयों में महिलाओं की संख्या में कमी आई है।

News In Detail

भोपाल. मध्य प्रदेश के सरकारी गलियारों में अब आधी दुनिया की धमक पहले से कहीं ज्यादा सुनाई दे रही है। आर्थिक सांख्यिकी विभाग की ताजा रिपोर्ट, जिसे हाल ही में बजट सत्र के दौरान विधानसभा (एमपी विधानसभा) में पेश किया गया। यह एक सुखद बदलाव की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

अफसरों की कतार में महिलाएं सबसे आगे

बीते तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी सेवाओं (सरकारी नौकरी) में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 2.5% बढ़ी है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां महिलाओं का ग्राफ ऊपर गया है, वहीं पुरुषों का प्रतिशत घटा है। 

सबसे खास बात यह है कि क्लास-वन, क्लास-टू और क्लास-थ्री जैसी प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी की नौकरियों में महिलाओं की उपस्थिति 30% से अधिक हो गई है। क्लास-टू ऑफिसर के पदों पर तो यह आंकड़ा 33% को भी पार कर गया है, जो महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत तस्वीर पेश करता है।

विश्वविद्यालयों में महिलाओं की संख्या ने चिंता बढ़ाई

एक तरफ जहां शासन के मुख्य विभागों में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। वहीं प्रदेश के 22 विश्वविद्यालयों में उनकी स्थिति थोड़ी कमजोर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत विवि और उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत विवि में अब केवल एक-एक महिला कर्मचारी ही बची है। 

वहीं, भोपाल के प्रतिष्ठित NLIU में महिलाओं की संख्या 10 फीसदी से भी कम है। हालांकि, भोपाल का हिंदी विश्वविद्यालय इस मामले में अव्वल है, जहां 37% से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं।

एक साल में घटीं 16 हजार नौकरियां

रिपोर्ट का दूसरा पहलू थोड़ा चिंताजनक है। साल 2024 के मुकाबले 2025 में प्रदेश में कुल 16 हजार 396 नौकरियां कम हुई हैं। एक मार्च 2024 से एक मार्च 2025 के बीच 54 सरकारी विभागों में केवल 282 नए नियमित पद ही बढ़े हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोत्तरी महज 0.05% है। वहीं, सार्वजनिक उपक्रमों और अर्द्धशासकीय संस्थाओं में पिछले 5 सालों (2021 से 2025) में 15 हजार लोगों की नौकरियां कम हुई हैं। नगरीय निकायों और विकास प्राधिकरणों में भी पदों की संख्या में गिरावट देखी गई है।

भोपाल और स्कूल शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा कर्मचारी

मध्य प्रदेश के कुल नियमित कर्मचारियों में से लगभग 39.8% जिलों में तैनात हैं। राजधानी भोपाल इस मामले में सबसे आगे है, जहां कुल नियमित कर्मचारियों का 6.65% हिस्सा काम करता है। इसके बाद इंदौर (4.47%) और ग्वालियर (3.50%) का नंबर आता है।

विभागों की बात करें तो स्कूल शिक्षा विभाग सबसे बड़ा नियोक्ता (Employer) बना हुआ है, जहां प्रदेश के 37.66% सरकारी कर्मचारी पदस्थ हैं। इसके बाद गृह विभाग 15.18% के साथ दूसरे स्थान पर है।

ये खबरें भी पढ़ें...

कैश की कमी से जूझ रही मध्य प्रदेश सरकार को ‘गुल्लक’ से मिले 244 करोड़

भोजशाला पर ASI की रिपोर्ट तो पहले ही खुल चुकी, हाईकोर्ट चौंका, दो सप्ताह में आपत्ति-सुझाव मांगे

MPRDC Toll Scam: अधिसूचना से पहले ही टोल वसूली, विधानसभा में PWD मंत्री के जवाब से खुलासा

भोपाल में बनेगा हाईटेक सेंट्रल विस्टा, एक हजार करोड़ और 12 नए टॉवर से बदलेगी प्रशासनिक व्यवस्था

बजट सत्र सरकारी नौकरी एमपी विधानसभा भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश
Advertisment