कैश की कमी से जूझ रही मध्य प्रदेश सरकार को ‘गुल्लक’ से मिले 244 करोड़

मध्य प्रदेश सरकार को 1.28 लाख निष्क्रिय बैंक खातों में 244 करोड़ रुपए मिले हैं। अब वित्त विभाग इस रकम को वापस सरकारी खजाने में लाने का प्रयास कर रहा है।

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Sanjay Dhiman
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Madhya Pradesh government facing cash crunch got Rs 244 crore from Gullak

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • मध्य प्रदेश सरकार के 1.28 लाख बंद सरकारी खातों में 244.76 करोड़ रुपए मिले हैं।
  • इन खातों पर एक दशक से ज्यादा समय से किसी का ध्यान ही नहीं था।
  • वित्त विभाग ने इन फंड्स को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की है।
  • आरबीआई इन खातों का कस्टोडियन है और अब फंड रिकवरी की कोशिश कर रही है।
  • इस रकम की वसूली से राज्य सरकार को आर्थिक मदद मिल सकती है। 

News in Detail

अक्सर आपने सुनी होंगी, दादी- नानी की कहानियां, जहां वे घर वालों से छिपाकर थोड़े- थोड़े पैसे बचाती रहती थीं और वक्त आने पर किसी दिन यही छोटी बचत किसी खजाने की तरह सामने आती थी।

ऐसा ही कुछ मध्यप्रदेश सरकार के साथ हुआ है- सरकार के हाथ खजाना लगा है। करोड़- दो करोड़ का नहीं, पूरे ढाई सौ करोड़ का… उम्मीद है कर्ज से परेशान सरकार के लिए इतनी बड़ी रकम राहत का काम करेगी।

मगर ये खजाना मिला कैसे तो चलिए हम बताते हैं…

फाइलें खंगाली तो मिले 1.28 लाख सरकारी खाते

हाल ही में राज्य का बजट आने के पहले वित्त विभाग फाइलें खंगाल रहा था तो पता चला कि आदिवासी कल्याण विभाग ने आदिवासियों के कल्याण और विकास के लिए योजनाओं के लिए एक खाता खोला था। इस खाते में पैसों का ट्रांसफर किया गया था, लेकिन इसे कभी उपयोग में नहीं लाया गया।

बाद में यह खाता अधिकारियों की नजरों से ओझल हो गया और यह एक दशक से अधिक समय तक निष्क्रिय रहा। बस फिर क्या था, ऐसे ही दूसरे खातों को भी खोजा गया तो पता चला कि ऐसे तो 1.28 लाख सरकारी खाते और हैं, जिनके बारे में राज्य के वित्त विभाग को पता ही नहीं था। 

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244 करोड़ रुपए अकाउंट्स में पड़े हैं

इन 1.28 लाख सरकारी अकाउंट्स में करीब 244 करोड़ रुपए की राशि मिली है। अब, वित्त विभाग ने इस रकम को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन खातों को ‘अदायगी न की गई जमा राशि’ (unclaimed deposits) के तौर पर वर्गीकृत किया गया था, जिसके बाद इस पैसे को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पास ट्रांसफर कर दिया गया था।

अब, सरकार ने RBI से संपर्क किया है और उसे यह धन वापस लेने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। एक बार यह राशि वापस मिल गई, तो सरकार को इस समय के वित्तीय संकट से राहत मिल सकती है।

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस मनीष रस्तोगी ने बताया, “इन खातों का पता चलने के बाद एक जिला अधिकारियों से कहा गया है कि वे सत्यापन करें और फिर मानदंडों के अनुसार दावे प्रस्तुत करें।”

वसूली की प्रक्रिया में क्या होगा?

वित्त विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और ट्रेजरी अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे इन खाते से संबंधित दावे तीन चरणों में करें। पहले चरण में, सबसे बड़े 50 अकाउंट्स की राशि 25 फरवरी तक वसूल की जाएगी, फिर अगले 50 अकाउंट्स 5 मार्च तक और बाकी अकाउंट्स का दावा 10 मार्च तक किया जाएगा। हर दावे से पहले अकाउंट का री-केवाईसी (Know Your Customer) जरूरी होगा, और रिकवर की गई राशि राज्य के संचित कोष में जमा की जाएगी।

सरकारी फंड ट्रैक करने में आई गड़बड़ी

यह मामला दर्शाता है कि पिछले कुछ सालों में सरकारी फंड्स को सही तरीके से ट्रैक करने में कुछ खामियां रही हैं। अधिकारियों ने इस प्रक्रिया में सुधार करने के लिए अब डेली मॉनिटरिंग अनिवार्य कर दी है। कलेक्टरों को हर दिन प्रगति की समीक्षा करनी होगी और हर दिन वित्त विभाग को रिपोर्ट भेजनी होगी।

राज्य को मिल सकती है अप्रत्याशित राहत

अगर यह राशि सफलतापूर्वक वसूली जाती है, तो यह राज्य के खजाने के लिए एक अप्रत्याशित राहत होगी। यह वित्तीय वसूली की कहानी सरकारी लापरवाही को एक सफलता की कहानी में बदल सकती है, जो राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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FAQ

किस प्रकार से सरकार को 244 करोड़ रुपये मिले?
यह राशि मध्य प्रदेश के 1.28 लाख बंद सरकारी अकाउंट्स से मिली है, जिन्हें एक दशक से ज्यादा समय से ट्रैक नहीं किया गया था।
सरकार इस राशि को कैसे वसूल करेगी?
वित्त विभाग ने आरबीआई से संपर्क किया है और वसूली के लिए तीन चरणों में दावे किए जाएंगे, जिनमें री-केवाईसी भी किया जाएगा।
यह राशि राज्य को किस प्रकार मदद करेगी?
यह राशि राज्य के वित्तीय संकट से राहत प्रदान कर सकती है और सरकारी खजाने में अप्रत्याशित वृद्धि ला सकती है।

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