कागजों में खाद भरपूर, इधर किसान बेबस: रिकॉर्ड सप्लाई के दावों के बीच सिस्टम फेल?

Ramanand Tiwari | Aug 02, 2026, 23:19 IST
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कागजों में खाद भरपूर, जमीन पर किसान बेबस
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. मूंग खरीदी विवाद के बाद अब यूरिया संकट ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है। स्टॉक होने के दावों के बावजूद किसान कतारों में, ई-टोकन भी नहीं सुलझा पाया समस्या।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • प्रदेश में रिकॉर्ड खाद वितरण का सरकारी दावा।
  • कई जिलों में किसान यूरिया के लिए लंबी कतारों में।
  • ई-टोकन व्यवस्था भी किसानों की राहत नहीं बन सकी।
  • सरकार के अनुसार 3.60 लाख टन खाद अभी भी स्टॉक में।
  • मूंग खरीदी के बाद अब खाद संकट ने किसानों की चिंता बढ़ाई।
मध्य प्रदेश में एक तरफ सरकार रिकॉर्ड खाद वितरण का दावा कर रही है, दूसरी तरफ किसान यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मूंग खरीदी को लेकर पहले से नाराज किसानों के सामने अब खाद का संकट भी खड़ा हो गया है।

सवाल यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में लाखों टन खाद उपलब्ध है, तब खेत तक पहुंचने से पहले सिस्टम आखिर कहां दम तोड़ रहा है? यही सवाल अब सरकार के दावों पर भी खड़े होने लगे हैं।

रिकॉर्ड वितरण के बावजूद नहीं पहुंच रही खाद?

मार्कफेड के आंकड़ों के अनुसार 28 जुलाई तक प्रदेश में 10.95 लाख टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। यह पिछले साल की तुलना में अधिक बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया था, लेकिन जमीनी हालात इन दावों से मेल खाते नहीं दिख रहे।

सरकारी रिकॉर्ड कुछ और, किसानों का अनुभव कुछ और

प्रदेश के कई जिलों में किसान सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। कहीं घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिल रही, तो कहीं स्टॉक खत्म होने की जानकारी देकर किसानों को वापस लौटा दिया जा रहा है। यही वजह है कि सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

स्टॉक बचा है, फिर किल्लत क्यों?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अभी करीब 3.60 लाख टन उर्वरक उपलब्ध है। इनमें लगभग 1.82 लाख टन यूरिया भी शामिल है। इसके बावजूद कई जिलों में यूरिया की कमी बनी हुई है।

विशेषज्ञ इसे मांग और आपूर्ति के असंतुलन का नतीजा मानते हैं। जहां एक साथ टॉप ड्रेसिंग का समय आया, वहां मांग अचानक बढ़ गई, लेकिन आपूर्ति उसी गति से नहीं पहुंच सकी।

ई-टोकन व्यवस्था भी नहीं दे सकी राहत

खाद वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई ई-टोकन व्यवस्था कई जगह किसानों के लिए नई परेशानी बन गई। तकनीकी दिक्कत, टोकन मिलने में देरी और वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था के कारण किसानों को समय पर खाद नहीं मिल सकी।

शिकायतें बढ़ने के बाद सरकार को फिलहाल ई-टोकन व्यवस्था स्थगित करनी पड़ी, लेकिन जमीनी हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

क्या सिर्फ यूरिया पर निर्भर हो गए हैं किसान?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा 6.22 लाख टन यूरिया का वितरण हुआ है। इसके मुकाबले एनपीके, डीएपी, टीएसपी, एसएसपी और पोटाश का उपयोग काफी कम रहा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया पर बढ़ती निर्भरता लंबे समय में मिट्टी की उर्वरता और पोषक संतुलन के लिए भी चुनौती बन सकती है।

मूंग खरीदी के बाद अब खाद का मोर्चा

मूंग खरीदी, ई-टोकन विवाद और अब यूरिया की किल्लत ने किसानों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, तो किसान समय पर खाद के लिए परेशान क्यों हैं?

जब फसल के लिए सबसे अहम समय चल रहा है, तब वितरण व्यवस्था की हर देरी सीधे किसानों की लागत और उत्पादन पर असर डाल सकती है।

सरकार का पक्ष

जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और जिन जिलों में मांग अधिक है, वहां लगातार अतिरिक्त रैक भेजे जा रहे हैं। हालांकि किसान कहते हैं कि कागजों पर दर्ज स्टॉक से खेती नहीं होती, खाद समय पर केंद्र तक पहुंचना ही सबसे बड़ी जरूरत है।

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