एमपी का फॉरेस्ट गार्ड बना नेशनल हीरो, औषधीय पौधों की जानकारी से बनाया रिकार्ड, पीएम ने मन की बात में किया जिक्र

Amresh Kushwaha | Jan 25, 2026, 13:14 IST
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mp forest guard jagdeep pratap ahirwar pm modi mann ki baat
mp forest guard jagdeep pratap ahirwar pm modi mann ki baat

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में मध्यप्रदेश के फॉरेस्ट गार्ड की सराहना की। फॉरेस्ट गार्ड जगदीप प्रताप अहिरवारने औषधीय पौधों की जानकारी इकट्ठा कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इसे अब एक किताब में प्रकाशित किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 25 जनवरी को मन की बात के 130वें एपिसोड में मतदाता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने लोकतंत्र की असली ताकत, यानी मतदाता को सलाम किया। प्रधानमंत्री ने पन्ना जिले के एक फॉरेस्ट गार्ड की तारीफ भी की है। जानें पीएम मोदी को क्यों भाया फॉरेस्ट गार्ड?

जानें कौन है एमपी का यह फॉरेस्ट गार्ड?

यह फॉरेस्ट गार्ड औषधीय पौधों के बारे में जानकारी जुटाकर एक नया रिकॉर्ड बना चुका है। उसने इन पौधों की पहचान, उपयोग और स्थान की जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद वन विभाग ने इस जानकारी को एक किताब में संकलित किया।

यह किताब अब रिसर्चर्स, छात्रों और अधिकारियों के लिए बहुत फायदेमंद हो रही है। प्रधानमंत्री ने उसकी इस कोशिश को सराहा और उसे एक राष्ट्रीय हीरो के रूप में प्रस्तुत किया है। बता दे की इनका नाम जगदीप प्रताप अहिरवार है।

जगदीप प्रताप अहिरवार का अनोखा कार्य

प्रधानमंत्री मोदी ने पन्ना के फॉरेस्ट गार्ड जगदीप प्रताप अहिरवार की सराहना की। उनका प्रयास पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के संरक्षण में क्रांतिकारी साबित हुआ है। पीएम मोदी ने बताया कि एक दिन गश्त के दौरान, जगदीप ने महसूस किया कि जंगल में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की जानकारी कहीं व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं है। इसे एक अहम कार्य के रूप में उन्होंने लिया और औषधीय पौधों की पहचान करना शुरू किया।

औषधीय पौधों की सूची बनाया और जानकारी जुटाई

पीएम मोदी ने आगे बताया कि जगदीप ने अपने कार्य को मिशन बना लिया और करीब सवा सौ औषधीय पौधों की पहचान की। उन्होंने इन पौधों की तस्वीरें, नाम, उपयोग और मिलने के स्थान की पूरी जानकारी जुटाई। उनका यह प्रयास सिर्फ व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर साबित हुआ है। उन्होंने जुटाई गई जानकारी को वन विभाग से संकलित कराया और इसे एक किताब के रूप में प्रकाशित किया है।

पीएम मोदी ने की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुस्तक के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि यह जानकारी अब शोधकर्ताओं, छात्रों और सरकारी अधिकारियों के लिए बेहद काम की है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मदद मिल रही है, बल्कि यह कार्य भारतीय वन विभाग की ओर से बड़े स्तर पर सराहा जा रहा है। जगदीप का यह कार्य पन्ना जिले के जंगलों और उनके आसपास के समुदायों के लिए बेहद अहम साबित हो रहा है।

नेशनल हीरो की कहानी

जगदीप प्रताप अहिरवार की कहानी अब पूरे देश में सुनी जा रही है। उनकी पहल ने यह साबित कर दिया कि जब जुनून और समर्पण हो, तो कुछ भी संभव है। पीएम मोदी ने मन की बात में उनकी तारीफ की। उनके काम को राष्ट्रीय पहचान मिली है। अब पन्ना के अलावा पूरे देश में लोग उनकी प्रेरणा ले रहे हैं।

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मन की बात इन भाषाओं में होता है प्रसारित

मन की बात कार्यक्रम 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के अलावा 11 विदेशी भाषाओं में प्रसारित होता है। इसमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी और स्वाहिली जैसी भाषाएं शामिल हैं। यह कार्यक्रम आकाशवाणी (All India Radio) के 500 से अधिक ब्रॉडकास्टिंग सेंटरों से प्रसारित किया जाता है।

पहले 14 और अब 30 मिनट का होता है कार्यक्रम

मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रेडियो कार्यक्रम है। से उन्होंने 3 अक्टूबर 2014 से शुरू किया था। मन की बात का पहला एपिसोड 14 मिनट का था, लेकिन जून 2015 में इसकी टाइम लिमिट बढ़ाकर 30 मिनट कर दी गई। इस बदलाव से पीएम मोदी को और अधिक समय मिल गया। इससे वे अपने विचार और योजनाओं को विस्तार से साझा करते हैं।

FAQ

  1. मन की बात कार्यक्रम क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
    मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक रेडियो शो है, जिसमें वे देशवासियों से सीधे संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को सरकार की योजनाओं, नीतियों और विकासात्मक कार्यक्रमों से अवगत कराना है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री जनता से उनकी समस्याओं और सुझावों पर भी बात करते हैं।
  2. मन की बात के कार्यक्रम की ब्रॉडकास्टिंग कैसे होती है?
    मन की बात कार्यक्रम आकाशवाणी के 500 से अधिक ब्रॉडकास्टिंग सेंटरों से प्रसारित होता है। इसे 22 भारतीय भाषाओं और 11 विदेशी भाषाओं में प्रसारित किया जाता है, जिससे यह कार्यक्रम देश-विदेश में लाखों श्रोताओं तक पहुंचता है।
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