एमपी के खजाने पर बढ़ रहा बोझ: सरकार आज फिर लेगी 3600 करोड़ का कर्ज
Amresh Kushwaha | Sept 01, 2026, 09:18 IST
एमपी के खजाने पर बढ़ रहा बोझ
मध्यप्रदेश सरकार आज RBI के जरिए 3600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेगी। दो सरकारी सिक्योरिटी की नीलामी 02 सितंबर को होगी। नए कर्ज के बाद राज्य पर कुल कर्ज 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
- राज्य सरकार आज 3600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेगी।
- यह कर्ज RBI के जरिए दो सिक्योरिटी की नीलामी से आएगा।
- पहला कर्ज 1600 करोड़ का 18 साल के लिए होगा।
- दूसरा कर्ज 2000 करोड़ का 30 साल के लिए होगा।
- नए कर्ज के बाद कुल कर्ज 5.40 लाख करोड़ पार करेगा।
एमपी सरकार का नया कर्ज
सरकार इस नीलामी में दो अलग अलग सरकारी सिक्योरिटी बेचेगी। इन सिक्योरिटी को बेचकर सरकार निवेशकों से पैसा जुटाएगी। यह कर्ज किसी एक बैंक से सीधे नहीं लिया जा रहा है। सरकार की ओर से इस बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
दोनों कर्ज की पूरी शर्तें
सरकार इस राशि पर जुलाई 2044 तक 7.61 प्रतिशत सालाना ब्याज चुकाएगी। ब्याज का भुगतान हर साल 8 जनवरी और 8 जुलाई को किया जाएगा। दूसरा कर्ज 2000 करोड़ रुपए का होगा। यह कर्ज 30 साल के लिए लिया जा रहा है।
इसकी मूलधन वापसी सितंबर 2056 तक होगी। इस कर्ज पर ब्याज दर नीलामी में तय होने वाली कट-ऑफ यील्ड से तय होगी। इसका भुगतान हर साल 2 मार्च और 2 सितंबर को किया जाएगा।
किन लोगों से जुटाया जाएगा पैसा
इस श्रेणी में पात्र लोगों और संस्थाओं को कुल राशि का 10 प्रतिशत तक सिक्योरिटी दी जा सकती है। हालांकि एक बोलीदाता को अधिकतम 1 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकेगा। सरकार को इस कर्ज की पूरी राशि का भुगतान 2 सितंबर 2026 को करना होगा।
इस साल अब तक कितना कर्ज लिया गया
इससे पहले 4 अगस्त को भी सरकार ने कर्ज लिया था। उस दिन 1600 करोड़ और 2000 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए थे। यानी अगस्त महीने में ही सरकार ने कई बार कर्ज उठाया है। आज होने वाली नीलामी के बाद इस वित्त वर्ष में लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 51 हजार 400 करोड़ रुपए हो जाएगा।
कितना बढ़ जाएगा राज्य पर कुल कर्ज
यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। हर महीने नई नीलामी के जरिए सरकार बाजार से पैसा जुटा रही है। यह पैसा विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में खर्च किया जाता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
कर्ज का बढ़ता आंकड़ा भविष्य में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के लिए जरूरी मानी जाती है। यह खबर पाठकों को राज्य की आर्थिक सेहत समझने में मदद करती है।
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