एमपी सरकार 3 लाख पद करेगी समाप्त, आदेश का विरोध कर रहा कर्मचारी संगठन, काम बंद करने की दी धमकी
Amresh Kushwaha | Dec 29, 2025, 10:46 IST
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मध्य प्रदेश सरकार ने 3 लाख पदों को समाप्त करने का आदेश जारी किया था। वहीं, कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए काम बंद करने की धमकी दी। उनका कहना है कि यह आदेश कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन है और इसे वापस लिया जाए।
पूरी खबर को पांच पॉइंट में समझें-
- 22 दिसंबर 2025 को मप्र सरकार ने तीन लाख पदों को सांख्येत्तर (Non-Statistical) घोषित किया। इससे दैनिक वेतनभोगी, स्थायी और अंशकालिक कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया।
- कर्मचारियों ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन किया। इसमें दैनिक वेतनभोगी, स्थायी, और अंशकालिक कर्मचारी शामिल हुए।
- मांगों में कर्मचारियों का नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति, चिकित्सा सुविधा, और पेंशन लाभ शामिल हैं।
- कर्मचारी मंच ने कहा कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे 15 दिनों में संयुक्त हड़ताल करेंगे।
- कर्मचारी संगठनों ने आदेश को कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन बताया और इसे कर्मचारियों के भविष्य के लिए खतरे के रूप में देखा।
इस विरोध प्रदर्शन में दैनिक वेतनभोगी, स्थायी कर्मचारी और अंशकालिक कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार का यह आदेश कर्मचारियों के खिलाफ है और इसे तत्काल वापस लिया जाए।
जानें क्या है सरकार का आदेश?
22 दिसंबर 2025 को जारी एमपी वित्त विभाग के आदेश के तहत, सरकार ने तीन लाख पदों को सांख्येत्तर (Non-Statistical) घोषित करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि इन पदों का अस्तित्व सिर्फ रिटायरमेंट तक होगा और इन कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो जाएगा। सरकार के इस कदम से कर्मचारियों के नियमितीकरण (regularization) का रास्ता भी बंद हो जाएगा। साथ ही, वे न्यायालय (court) की शरण नहीं ले पाएंगे।
कर्मचारी मंच की पांच सूत्रीय मांगें
इसके बाद ही पदों को सांख्येत्तर घोषित किया जाए। इसके अलावा, कर्मचारियों ने अनुकंपा नियुक्ति (compassionate appointment) की पात्रता, आयुष्मान कार्ड के तहत 5 लाख रुपए तक की चिकित्सा सुविधा, और पेंशन लाभ देने की मांग की है।
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कर्मचारी संगठन की चेतावनी
यह हड़ताल काम बंद करने की होगी। कर्मचारी मंच का कहना है कि आदेश कर्मचारियों के अधिकारों के खिलाफ है। वे इसे वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। इससे राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
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कर्मचारियों के अधिकारों का है उल्लंघन
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है। साथ ही, क्या कर्मचारियों की मांगों पर विचार किया जाता है या नहीं।
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