MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आपराधिक रिकॉर्ड वालों को नहीं मिलेगा मीसा बंदी लाभ

Neel Tiwari | Feb 09, 2026, 21:46 IST
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Those with criminal records will not get MISA Bandi honor
Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल आपातकाल के दौरान जेल में रहने वाले ही मीसा बंदी की पेंशन योजना के हकदार होंगे, बशर्ते उनका आपराधिक इतिहास न हो।

News In Short

  • हाईकोर्ट ने मीसा बंदी सम्मान निधि से जुड़ी याचिका खारिज की
  • कोर्ट बोला: आपराधिक रिकॉर्ड वालों को पेंशन का हक नहीं
  • याचिकाकर्ता पर दंगा और मारपीट जैसे कई केस दर्ज थे
  • सिर्फ आपातकाल में जेल जाना पर्याप्त नहीं माना गया
  • परिवार को सरकार के सामने अंतिम प्रतिनिधित्व का मौका

Intro

मीसा बंदी होने के नाम पर सम्मान निधि लेने वालों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा और साफ संदेश दिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ आपातकाल में जेल जाना ही पेंशन का आधार नहीं बन सकता। अगर गिरफ्तारी राजनीतिक नहीं बल्कि आपराधिक कारणों से हुई है, तो सम्मान निधि नहीं मिलेगी।

News in detail

रीवा जिले के उमाकांत सिंह उर्फ दद्दू सिंह ने दावा किया था कि उन्हें आपातकाल के दौरान मीसा के तहत जेल में रखा गया था, इसलिए वे वर्ष 2008 की सम्मान निधि योजना के पात्र हैं। उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने यह कानूनी लड़ाई जारी रखी और हाईकोर्ट में याचिका दायर की।



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प्रशासन ने क्यों कहा- नहीं मिलेगा लाभ

राज्य सरकार और कलेक्टर रीवा की रिपोर्ट में बताया गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 1976 में दंगा, मारपीट और धमकी जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बाद भी 1988 और 1997 में उनके खिलाफ आपराधिक केस सामने आए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक नहीं बल्कि आपराधिक कारणों से हुई थी।

नियमों ने खोल दी सच्चाई

कोर्ट ने सम्मान निधि नियम, 2008 के नियम-6 का हवाला देते हुए कहा कि यह योजना केवल उन्हीं के लिए है जिनका कोई आपराधिक या असामाजिक इतिहास न हो। अगर किसी व्यक्ति ने जेल से छूटने के बाद या पहले भी अपराध किए हैं, तो वह मीसा बंदी होने का फायदा नहीं ले सकता।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

माननीय न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि रिकॉर्ड यह साबित करता है कि याचिकाकर्ता को राजनीतिक संघर्ष के कारण नहीं, बल्कि आपराधिक मामलों के चलते जेल भेजा गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पहले भी प्रशासन ने सम्मान निधि देने से इनकार किया है, इसलिए किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ।

क्या है ‘मीसा बंदी सम्मान निधि’ योजना

‘लोकनायक जय प्रकाश सम्मान निधि’ योजना उन मीसा बंदियों और उनके परिवारों के लिए बनाई गई है, जिन्हें आपातकाल (1975-77) के दौरान राजनीतिक या सामाजिक कारणों से जेल भेजा गया था। हाईकोर्ट के अनुसार इसका मकसद लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वालों को सम्मान देना है, न कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को लाभ पहुंचाना।

परिवार को अंतिम मौका

हालांकि कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए परिवार को एक अंतिम अवसर दिया गया है। यदि चार सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रतिनिधित्व किया जाता है, तो सरकार को नियमों के अनुसार उस पर विचार करना होगा।

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फैसले का असली संदेश

इस फैसले से हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि मीसा बंदी होने का प्रमाण तभी मान्य होगा, जब व्यक्ति का जीवन आपराधिक गतिविधियों से मुक्त रहा हो। जिन लोगों ने बाद में या पहले अपराध किए हैं, उन्हें लोकतंत्र सेनानी या मीसा बंदी होने का लाभ नहीं मिलेगा।

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