एमपी हाईकोर्ट ने भविष्य के डॉक्टर का करियर बचाया, वकीलों की खुले कोर्ट में तारीफ
Neel Tiwari | Jul 27, 2026, 20:21 IST
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डीएनबी बाल रोग सीट विवाद में डॉ. शिवानी पंडित को बड़ी राहत दी। तकनीकी गलती से सीट खतरे में पड़ गई थी। कोर्ट ने सीट सुरक्षित रखने का आदेश दिया और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन व अपर महाधिवक्ता जाह्नवी पंडित की कोर्ट में सराहना की।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला
- डॉ. शिवानी पंडित को डीएनबी बाल रोग की सीट पहले राउंड में मिली थी।
- समय पर ज्वाइनिंग हुई, लेकिन पोर्टल पर जानकारी अपलोड नहीं हो सकी।
- तकनीकी गलती से सीट खाली दिखाई देने लगी।
- दूसरे उम्मीदवार को सीट मिलने का खतरा पैदा हो गया।
- हाईकोर्ट ने सीट बचाई और समाधान निकालने वाले वकीलों की खुले कोर्ट में तारीफ की।
हाई कोर्ट ने किस मामले में सुनाया यह अहम फैसला
इसके बाद एक तकनीकी गलती सामने आई। अस्पताल और संबंधित अधिकारियों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसलिए ऑनलाइन पोर्टल पर उनकी ज्वाइनिंग दर्ज नहीं हुई। सिस्टम में सीट खाली दिखने लगी।
तकनीकी चूक से दूसरे उम्मीदवार को मिल सकती थी सीट
जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिविजनल बेंच में हुई मामले की सुनवाई
कोर्ट ने उन्हें 28 जुलाई 2026 सुबह 10 बजे तक दोबारा संस्थान में ज्वाइन करने का निर्देश दिया। साथ ही पोर्टल पर जरूरी जानकारी 29 जुलाई 2026 सुबह 10 बजे तक अपलोड करने का आदेश भी दिया।
कोर्ट ने तकनीकी गलती पर दिखाई मानवीय सोच
राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता जाह्नवी पंडित भी अदालत में मौजूद रहीं। सभी पक्षों ने माना कि यह तकनीकी समस्या थी। इसे मानवीय नजरिए से सुलझाया जाना चाहिए। अदालत ने भी माना कि केवल तकनीकी कारण से किसी मेहनती छात्र का भविष्य खराब नहीं होना चाहिए।
खुले कोर्ट सहित आदेश में हुई वकीलों की तारीफ
कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और अपर महाधिवक्ता जाह्नवी पंडित ने सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास किया। उनके सहयोग से एक उभरते छात्र और देश के भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टर का करियर सुरक्षित हो सका।
आमतौर पर कोर्ट के आदेशों में ऐसी खुली प्रशंसा कम देखने को मिलती है। इसलिए यह टिप्पणी भी खास मानी जा रही है।
मेडिकल छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला
हाईकोर्ट ने साफ किया कि यदि वास्तविक ज्वाइनिंग हो चुकी है, तो केवल पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण किसी छात्र का अधिकार नहीं छीना जा सकता। यह आदेश प्रशासनिक संस्थानों को भी सतर्क रहने का संदेश देता है। समय पर ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करना उनकी जिम्मेदारी है।
फैसले में छिपी है गहरी सीख
यही कारण है कि यह आदेश मेडिकल शिक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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