समान काम पर वेतन अलग-अलग! हॉस्पिटल मैनेजमेंट केडर को HC से राहत की उम्मीद

मध्यप्रदेश के अस्पताल प्रबंधन संवर्ग के अधिकारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन की उम्मीद जगी है। जबलपुर हाईकोर्ट ने वेतनमान में भेदभाव को लेकर नोटिस जारी किया है।

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Neel Tiwari
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Hospital management cadre hopes for relief from HC

Photograph: (the sootr)

NEWS IN SHORT

  • मेडिकल कॉलेजों के अस्पताल प्रबंधन संवर्ग के वेतनमान का मामला पहुंचा हाईकोर्ट।
  • अस्पताल प्रबंधन संवर्ग के वेतनमान (ग्रेड पे) को लेकर हाईकोर्ट का नोटिस।
  • नियमित उप-रजिस्ट्रार, अस्पताल प्रबंधक और बायोमेडिकल इंजीनियर शामिल।
  • “समान कार्य–समान वेतन” के सिद्धांत पर सरकार से जवाब तलब।
  • याचिका क्रमांक 261/2026 पर जस्टिस विशाल धगत की सिंगल बेंच में सुनवाई।

NEWS IN DETAIL

JABALPUR.मध्यप्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत अस्पताल प्रबंधन संवर्ग के अधिकारियों को लेकर बड़ी कानूनी राहत की उम्मीद जगी है। समान पद और समान कार्य के बावजूद अलग-अलग वेतनमान देने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई तय की है। यह नोटिस नियमित उप-रजिस्ट्रार, अस्पताल प्रबंधक, सहायक अस्पताल प्रबंधक और बायोमेडिकल इंजीनियर जैसे पदों पर कार्यरत अधिकारियों के ग्रेड पे को लेकर दिया गया है। 

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मामला क्या है?

इस मामले में अस्पताल प्रबंधन संवर्ग के विभिन्न अधिकारियों के वेतनमान में भेदभाव को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विलय के बाद भी एक ही विभाग में समान पदों पर कार्यरत अधिकारियों को अलग-अलग वेतनमान दिया जा रहा है। यह स्थिति संवैधानिक सिद्धांत "समान कार्य के लिए समान वेतन" के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

समान पद, समान काम... फिर वेतन में भेदभाव क्यों?

याचिका में साफ कहा गया है कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विलय के बाद भी एक ही विभाग में समान पदों पर कार्यरत अधिकारियों को अलग-अलग वेतनमान दिया जा रहा है। यह स्थिति “समान कार्य के लिए समान वेतन” के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है, जिसे लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका क्रमांक 261/2026 दायर की गई है, जिस पर सिंगल बेंच में जस्टिस विशाल धगत ने सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद 4 मार्च को तय की है।

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संवर्ग समिति में जगी नई उम्मीद

अस्पताल प्रबंधन संवर्ग समिति ने हाईकोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। समिति के सदस्य रविन्द्र कुशवाहा ने कहा कि इस फैसले से संवर्ग के अधिकारियों में एक नई उम्मीद जगी है, क्योंकि लंबे समय से वेतनमान विसंगति को लेकर सरकार से गुहार लगाई जा रही थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

संवर्ग समिति से जुड़े महेंद्र सोनी और उनके साथियों ने भी हाईकोर्ट के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब अस्पताल प्रबंधन संवर्ग को न्याय मिलने की वास्तविक उम्मीद दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल संवर्ग के हित में है, बल्कि प्रशासनिक समानता और पारदर्शिता की दिशा में भी एक अहम कदम है।

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