एमपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30.77 लाख करोड़ का दावा, राष्ट्रीय हिस्सेदारी सिर्फ 3.2%

भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के बाद सरकार ने कहा था कि मध्य प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। दावा किया गया कि यह राज्य के लिए अब तक का सबसे बड़ा निवेश है, लेकिन...

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Aman Vaishnav
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पूरी खबर को 5 पॉइंट में समझें...

  • भोपाल जीआईएस 2025 में 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश का दावा हुआ था।

  • देश में वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 26.6 लाख करोड़ के प्रस्ताव आए।

  • राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की निवेश हिस्सेदारी घटकर 3.2% रह गई।

  • आंध्र प्रदेश 25.3% निवेश के साथ देश के अन्य राज्यों में सबसे आगे रहा।

  • मध्य प्रदेश एआई, डेटा सेंटर और पोर्ट जैसे हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स में पिछड़ा।

फरवरी 2025 में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) हुई। इसमें सरकार ने 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश का दावा किया था। इसे राज्य की बड़ी औद्योगिक सफलता के रूप में देखा गया।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट अलग आंकड़े पेश करती है। यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2025-26 के नौ महीनों की है। इसमें यह दिखाया गया है कि निवेश के मामले में देश के अलग-अलग राज्य एक-दूसरे के मुकाबले कहां खड़े हैं।

राष्ट्रीय निवेश में मध्य प्रदेश की स्थिति

अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान पूरे देश में करीब 26.6 लाख करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव आए। इतने बड़े निवेश में मध्य प्रदेश का हिस्सा बहुत छोटा है, सिर्फ 3.2%। वैसे तो सरकार ने 30.77 लाख करोड़ के निवेश का दावा किया था, पर असली आंकड़े देखकर चिंता होती है। मध्य प्रदेश निवेश की दौड़ में बाकी राज्यों से काफी पिछड़ गया है।

मध्य प्रदेश के पिछड़ने के कारण

देश में पावर और मेटल्स सेक्टर में निवेश बढ़ा है। पावर सेक्टर में 22.6% और मेटल्स में 17.3% निवेश बढ़ा। लेकिन अफसोस की बात ये है कि मध्य प्रदेश को AI, डेटा सेंटर और बड़े एनर्जी प्रोजेक्ट्स का कोई खास फायदा नहीं मिला। जीआईएस के आंकड़े एमओयू और निवेश रुचि पर आधारित थे।  नेशनल रिपोर्ट में केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स को गिना गया है जो सच में जमीन पर उतरने वाले हैं।

आंध्र प्रदेश ने मारी बाजी

रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश निवेश में सबसे आगे रहा। देश के कुल निवेश का 25.3% हिस्सा आंध्र को मिला। यानी देश का हर चौथा रुपया आंध्र प्रदेश में लगा। इसके बाद ओडिशा को 13.1 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव मिले। महाराष्ट्र 12.8 प्रतिशत निवेश के साथ तीसरे स्थान पर रहा। तेलंगाना को 9.5% और गुजरात को 7.1% निवेश मिला।

आंध्र प्रदेश के आगे निकलने का कारण

आंध्र प्रदेश को हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स का बड़ा लाभ मिला। वहां 1.3 लाख करोड़ का एआई डेटा सेंटर प्रोजेक्ट लगा। 98 हजार करोड़ की 1 गीगावाट डेटा सेंटर योजना शुरू हुई। स्वच्छ ऊर्जा में 1.1 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा में 82 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ। इन बड़े प्रोजेक्ट्स ने आंध्र प्रदेश की ताकत बढ़ाई।

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