जनसंपर्क विभाग में बगावत: बाहरी दखल के खिलाफ कलमबंद हड़ताल, सरकार की मुश्किलें बढ़ीं

मध्यप्रदेश के जनसंपर्क विभाग में पदस्थापना को लेकर बगावत हो गई है। अधिकारियों ने कलमबंद हड़ताल का ऐलान किया है। विरोध सीपीआर दीपक सक्सेना के बयान से बढ़ा। कर्मचारी विभाग में बाहरी दखल और विवादित तबादलों को लेकर नाराज हैं।

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Ramanand Tiwari
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Photograph: (THESOOTR)

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BHOPAL. मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग में लंबे समय से हो रहा विवाद अब खुले टकराव में बदल गया है। राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी गणेश जायसवाल की पदस्थापना के बाद विभाग में असंतोष इतना बढ़ गया कि अधिकारी-कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल का ऐलान कर दिया।

सीपीआर से मुलाकात बनी चिंगारी

गुरुवार को विभागीय प्रतिनिधिमंडल सीपीआर दीपक सक्सेना से विरोध दर्ज कराने पहुंचा। चर्चा के दौरान सक्सेना द्वारा यह कहे जाने पर कि “डायरेक्टर के पद पर IPS की पोस्टिंग होने वाली है”, माहौल गर्म हो गया।

डर दिखाकर खत्म करना चाहते हैं अधिकारी

आप हमें बड़ा डर दिखाकर विरोध खत्म करवाना चाहते हैं, हम इसे नहीं मानेंगे। इस टकराव के बाद जनसंपर्क अधिकारी-कर्मचारियों ने भवन में मौके पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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प्रदेशभर के दफ्तरों पर ‘काला झंडा’

डायरेक्टरेट में हुए विरोध का असर राज्यभर में दिखा। जिले-जिले में जनसंपर्क दफ्तरों पर काले झंडे लगाए गए और सभी कर्मचारी लामबंद हो गए। सूत्रों के अनुसार, दबाव बढ़ने के बाद सीपीआर सक्सेना ने गणेश जायसवाल से कहा कि अभी रिलीव न हों, अगर कोई रिलीव करे तो पहले मुझे बताना।

सरकार का दांव उलटा पड़ गया? 

दो साल पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड की तैयारी झटके में सरकार के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं और विभाग पर रिपोर्ट-कार्ड तैयार करने की जिम्मेदारी है। योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों का डेटा संकलन शुरू भी हो चुका है। ऐसे समय में RAS अधिकारी की पोस्टिंग पर उठी बगावत से सरकार उलझन में है।

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विशेषज्ञता आधारित विभाग में बाहरी दखल

क्या सरकार विशेषज्ञ विभाग में ‘बाहरी अधिकारी’ लाकर प्रयोग करना चाह रही थी, लेकिन विरोध ने इसे उलटा असरदार साबित कर दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनसंपर्क लेखन, मीडिया-मैनेजमेंट, रणनीति और क्रिएटिव संचार पर आधारित विभाग है।

अधिकारियों का कहना है कि यह राजस्व या प्रशासनिक शैली का विभाग नहीं। बाहर से आए अफसर विशेषज्ञता और कार्यप्रवाह को बाधित करते हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि अनुभवी PR-कैडर अधिकारियों को नजरअंदाज कर मनपसंद प्रशासनिक अधिकारियों की पोस्टिंग से विभागीय संरचना कमजोर हो रही है।

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बार-बार के विवादित तबादले ने बढ़ाई नाराजगी

नाराजगी की एक बड़ी वजह ताजा पदस्थापना ही नहीं, बल्कि पहले हुए तबादले भी हैं। कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष का पहले भिंड और कुछ दिनों बाद उज्जैन तबादला किया गया, जिसे कर्मचारी “पॉलिसी के खिलाफ” और “स्पष्ट प्रताड़ना” बता रहे हैं।

जनसंपर्क कर्मचारी बोले- हम सरकार का संदेश पहुंचाते हैं, हमें ही बेगाना किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे दिन-रात सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाते हैं, लेकिन जब विभाग में अनपेक्षित पोस्टिंग होती है तो उनकी योग्यता और स्वायत्तता पर सवाल खड़ा हो जाता है।

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मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

आदेश निरस्त होने तक हड़ताल जारी अधिकारी-कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि  सीएम डॉ.मोहन यादव, जो स्वयं जनसंपर्क विभाग के मंत्री भी हैं तुरंत आदेश वापस लें। कर्मचारियों का स्पष्ट मत है कि जायसवाल की पोस्टिंग रद्द होना ही विभाग की गरिमा बचाने का एकमात्र रास्ता है।

प्रदेश की सरकारी सूचना प्रणाली ठप होने की कगार पर कलमबंद हड़ताल के चलते प्रेस नोट, कवरेज, सरकारी विज्ञापन, मीडिया संवाद, प्रचार गतिविधियां और योजनाओं की रिपोर्टिंग बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। यदि स्थिति लंबी चली तो सरकार का संचार तंत्र ठप होने का खतरा है। राज्यभर की निगाहें अब सरकार और सामान्य प्रशासन विभाग पर टिकी हैं।

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