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Indore. मध्य प्रदेश के जूनियर वकीलों के हित में स्टायपेंड नीति लागू करने की मांग की गई है। इसे लेकर इंदौर हाईकोर्ट बेंच में जनहित याचिका दायर की गई है। साथ ही सीएम वेलफेयर स्कीम 2012 के तहत नए रजिस्टर्ड वकीलों को 12 हजार रुपए की राशि साल 2019 में कोविड के बाद नहीं मिली है। इसे भी जारी करने की मांगी की गई है।
यह लगी है याचिका
इंदौर के अधिवक्ता निमेष पाठक ने यह याचिका दायर की है। इसमें मध्य प्रदेश शासन, विधि विभाग मध्य प्रदेश, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ मध्य प्रदेश को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में जूनियर वकील के हित में कई मुद्दे
याचिका में जूनियर वकील के हित में स्टायपेंड नीति लागू करने की मांग की है। पाठक ने कहा कि यह शहरी सीमा में 20 हजार और ग्रामीण एरिया में कम से कम 15 हजार होना चाहिए। जूनियर वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता, ला फर्म में कई तरह के काम करते हैं। वह केस की ड्राफ्टिंग, कोर्ट में पेश होना, क्लर्किकल मदद सभी करते हैं। लेकिन उन्हें कितना कम से कम वेतन मिले यह तय नहीं है। केरल, तमिलनाड़ु जैसे कई राज्यों यह नीति है और हाल ही में केंद्रीय ला विभाग ने भी इस संबंध में प्रेस नोट जारी किया था। सभी बार काउंसिल को एडवोकेट एक्ट के तहत इसे लागू कर जूनियर वकील का हित सुरक्षित करना चाहिए। इसके लिए एक फ्रेमवर्क और नीति तैयार होना चाहिए।
साल 2019 से रुकी राशि दिलवाई जाए
जूनियर वकील के लिए मुख्यमंत्री एडवोकेट वेलफेयर स्कीम 2012 लांच हुई थी। इसमें साल 2013 से प्रावधान है कि पहली बार रजिस्टर्ड होने वाले जूनियर वकील को टेबल-कुर्सी व अन्य आफिस खर्च के लिए 12 हजार की राशि दी जाएगी। लेकिन कोविड के दौरान साल 2019 से इसे बंद कर दिया गया। अभी तक यह राशि नहीं दी गई है। ऐसे में इसे भी जारी करने के लिए आदेश देने की मांग की गई है।
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