एक आईपीएस को बचाने के लिए चिट्ठियों का खेल, गृह विभाग और पीएचक्यू फिर आमने-सामने
Amresh Kushwaha | Feb 25, 2026, 15:22 IST
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हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में तत्कालीन एसपी संजीव कुमार कंचन के संदर्भ में आरोप पत्र को लेकर गृह विभाग व पीएचक्यू के बीच जून 2025 से लगभग हर महीने पत्राचार चल रहा है, लेकिन अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।
BHOPAL. हरदा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में जवाबदेही तय हो चुकी है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) एक आईपीएस अफसर को बचाने के लिए चिट्ठियों का खेल खेल रहे हैं।
गृह विभाग पीएचक्यू को पत्र भेजता है, और पीएचक्यू जवाब में दूसरा पत्र लिख देता है। फाइल आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूम रही है... नतीजा जीरो है। सवाल यह है कि जब जांच में जवाबदेही तय हो चुकी है तो कार्रवाई किसके आदेश का इंतजार कर रही है।
मामला 6 फरवरी 2024 के हरदा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट से जुड़ा है। हरदा के रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री बम की तरह फटी थी। महज 7 मिनट के भीतर दो भीषण धमाकों ने पूरे इलाके को तबाही में बदल दिया था।
करीब 60 घर मलबे में तब्दील हो गए थे, सड़कें लाशों से भर गई थीं। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे।
जांच में सामने आया कि फैक्ट्री खेती की जमीन पर बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रही थी। हादसे के बाद सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर ऋषि गर्ग और एसपी संजीव कुमार कंचन को हटाकर जिम्मेदारी तय करने का भरोसा दिया था।
घटना के बाद सरकार ने एसीएस संजय दुबे की अगुआई में उच्च स्तरीय जांच टीम बनाई थी। टीम ने पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन कलेक्टर ऋषि गर्ग और तत्कालीन एसपी संजीव कुमार कंचन की समान जवाबदेही तय की गई थी।
रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) और गृह विभाग को भेजी गई थी। इसके बाद जीएडी ने बिना देर किए तत्कालीन कलेक्टर ऋषि गर्ग को आरोप पत्र जारी कर दिया था।
वहीं, जैसे ही मामला आईपीएस संजीव कुमार कंचन तक पहुंचा, पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई। जून 2025 में गृह विभाग ने पीएचक्यू को पत्र लिखकर कंचन के खिलाफ आरोप पत्र का प्रारूप मांगा था।
पीएचक्यू ने जवाब दिया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया है। गृह विभाग ने फिर स्पष्ट निर्देश देते हुए लिखा कि जिस तरह कलेक्टर को आरोप पत्र जारी हुआ है, उसी तरह एसपी के खिलाफ भी आरोप पत्र जारी किया जाए। इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
जून 2025 से गृह विभाग लगभग हर महीने पीएचक्यू को पत्र भेज रहा है। हर बार जवाब में नई औपचारिकता का हवाला देकर मामला टाला जा रहा है। फाइलें आगे बढ़ने के बजाय विभागों के बीच घूम रही हैं। जांच समिति की रिपोर्ट के बावजूद आरोप पत्र जारी नहीं होना पूरे सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच में एक आईएएस और एक आईपीएस दोनों की समान जिम्मेदारी तय की गई थी, तो एक अफसर पर आरोप पत्र जारी हो गया और दूसरे के मामले में फाइल क्यों अटकी हुई है। क्या पुलिस मुख्यालय अपने ही अधिकारी पर कार्रवाई से बच रहा है या फिर किसी अदृश्य दबाव में पूरा तंत्र निष्क्रिय बना हुआ है।
द सूत्र ने इस मामले में निष्कर्ष जानने के लिए गृह विभाग के एसीएस (आईएएस शिव शेखर शुक्ला) से बात करनी चाही, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उन्हें मैसेज भी किया, लेकिन अब तक उनका पक्ष नहीं आया है। जैसे ही उनका पक्ष आएगा, द सूत्र उसे भी खबर में प्रमुखता से लेगा।
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गृह विभाग पीएचक्यू को पत्र भेजता है, और पीएचक्यू जवाब में दूसरा पत्र लिख देता है। फाइल आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूम रही है... नतीजा जीरो है। सवाल यह है कि जब जांच में जवाबदेही तय हो चुकी है तो कार्रवाई किसके आदेश का इंतजार कर रही है।
मामला 6 फरवरी 2024 के हरदा पटाखा फैक्ट्री विस्फोट से जुड़ा है। हरदा के रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री बम की तरह फटी थी। महज 7 मिनट के भीतर दो भीषण धमाकों ने पूरे इलाके को तबाही में बदल दिया था।
करीब 60 घर मलबे में तब्दील हो गए थे, सड़कें लाशों से भर गई थीं। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे।
जांच में सामने आया कि फैक्ट्री खेती की जमीन पर बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रही थी। हादसे के बाद सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर ऋषि गर्ग और एसपी संजीव कुमार कंचन को हटाकर जिम्मेदारी तय करने का भरोसा दिया था।
टीम ने की घटनाक्रम की पड़ताल
रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) और गृह विभाग को भेजी गई थी। इसके बाद जीएडी ने बिना देर किए तत्कालीन कलेक्टर ऋषि गर्ग को आरोप पत्र जारी कर दिया था।
वहीं, जैसे ही मामला आईपीएस संजीव कुमार कंचन तक पहुंचा, पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई। जून 2025 में गृह विभाग ने पीएचक्यू को पत्र लिखकर कंचन के खिलाफ आरोप पत्र का प्रारूप मांगा था।
पीएचक्यू ने जवाब दिया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया है। गृह विभाग ने फिर स्पष्ट निर्देश देते हुए लिखा कि जिस तरह कलेक्टर को आरोप पत्र जारी हुआ है, उसी तरह एसपी के खिलाफ भी आरोप पत्र जारी किया जाए। इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
मामले में ये हैं सुलगते सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच में एक आईएएस और एक आईपीएस दोनों की समान जिम्मेदारी तय की गई थी, तो एक अफसर पर आरोप पत्र जारी हो गया और दूसरे के मामले में फाइल क्यों अटकी हुई है। क्या पुलिस मुख्यालय अपने ही अधिकारी पर कार्रवाई से बच रहा है या फिर किसी अदृश्य दबाव में पूरा तंत्र निष्क्रिय बना हुआ है।
द सूत्र ने इस मामले में निष्कर्ष जानने के लिए गृह विभाग के एसीएस (आईएएस शिव शेखर शुक्ला) से बात करनी चाही, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उन्हें मैसेज भी किया, लेकिन अब तक उनका पक्ष नहीं आया है। जैसे ही उनका पक्ष आएगा, द सूत्र उसे भी खबर में प्रमुखता से लेगा।
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