केन-बेतवा लिंक परियोजना की मंजूरी पर सवाल, अधूरा पुनर्वास बना बड़ी वजह
Sanjay Dhiman | Jul 03, 2026, 18:45 IST
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45,000 करोड़ के केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट की फॉरेस्ट क्लीयरेंस शर्तें अधूरी हैं। पुनर्वास, जमीन हस्तांतरण और पावर प्लांट रोक जैसी शर्तें पूरी नहीं हुईं, जिससे प्रोजेक्ट की वैधता पर सवाल उठे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- शर्तें अधूरी: वन विभाग की जरूरी शर्तें पूरी न होने से केन-बेतवा प्रोजेक्ट कानूनी संकट में है।
- अनुमति समाप्त: तय समयसीमा में काम न होने से 45,000 करोड़ के प्रोजेक्ट की क्लीयरेंस खत्म।
- जंगल को खतरा: दौधन बांध बनने से पन्ना टाइगर रिजर्व का 6,000 हेक्टेयर कोर क्षेत्र डूबेगा।
- नियमों का उल्लंघन: कोर जंगल में सख्त पाबंदी के बावजूद 78 मेगावाट का पावर प्लांट प्रस्तावित है।
- पुनर्वास बाकी: प्रभावित परिवारों का पूरा पुनर्वास न होने से वन विभाग को जमीन नहीं मिली।
देश की पहली नदी जोड़ो योजना इन दिनों सुर्खियों में है। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के दस्तावेजों की पड़ताल से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कई अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं हुआ। इनमें प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की शर्त सबसे अहम है।
नियम कहते हैं कि शर्तें पूरी न होने पर दोबारा क्लीयरेंस लेना जरूरी होता है। जिला प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि पुनर्वास अब भी अधूरा है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की सिफारिशें भी पूरी तरह लागू नहीं हुईं।
करीब 45 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट की वैधता अब सवालों के घेरे में है।
6,000 हेक्टेयर जंगल डूबेगा
मई 2017 में स्टेज-1 और अक्टूबर 2023 में स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिली। दोनों में पर्यावरण संरक्षण और पुनर्वास से जुड़ी कई शर्तें रखी गईं। दस्तावेजों के मुताबिक इनका पूरा पालन नहीं हुआ।
जमीन का कागजी हस्तांतरण
सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिए। लेकिन जुलाई 2024 की समीक्षा बैठक में तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि रिकॉर्ड में हस्तांतरण हुआ, मगर भौतिक कब्जा अब तक नहीं मिला। पुनर्वास अधूरा होने से लोग जमीन खाली नहीं कर पाए।
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पावर प्लांट पर रोक बेअसर
पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर के मुताबिक प्रोजेक्ट के नक्शे में अब भी पावर प्लांट दर्ज है। जुलाई 2024 की बैठक में इस पर अलग स्टडी कराने का फैसला हुआ, जो शर्तों के खिलाफ है।
पेड़ों की गिनती भी नहीं हुई
राष्ट्रीय संस्थाओं की सिफारिशें अधूरी
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पुनर्वास अब भी अधूरा
छतरपुर जिले के आंकड़े बताते हैं कि कई परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। अगस्त 2017 की पर्यावरणीय स्वीकृति में भी शर्त थी कि निर्माण से पहले शत-प्रतिशत पुनर्वास हो, जो अब तक अधूरा है।
मंजूरी खत्म होने का प्रावधान
हिमांशु ठक्कर का कहना है कि केन नदी का पानी यमुना में मिलता है, इसलिए डाउनस्ट्रीम की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी था। उनके मुताबिक यह आकलन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
वन विभाग ने नहीं दिया जवाब
सरकार का पक्ष
FAQ
- केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट क्यों विवादों में है?
फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कई जरूरी शर्तें पूरी नहीं हुईं। पुनर्वास और जमीन हस्तांतरण अधूरा है। इससे प्रोजेक्ट की वैधता पर सवाल उठे हैं। - केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट की लागत कितनी है?
यह करीब 45,000 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। यह देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। - पन्ना टाइगर रिजर्व पर क्या असर पड़ेगा?
दौधन बांध बनने से रिजर्व का 6,000 हेक्टेयर से ज्यादा कोर एरिया डूब जाएगा। इससे वन्यजीवों पर बड़ा असर पड़ेगा।
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