मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते खाद के दाम बढ़े, किसानों पर बढ़ेगा खेती का बोझ

Amresh Kushwaha | May 29, 2026, 09:14 IST
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mp kharif 2026 fertilizer new rates npk
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मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने खरीफ सीजन 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों की नई दरें जारी की हैं। एनपीके (NPK) का 50 किलो बैग पिछले साल 1720 रुपए था, अब 2450 रुपए हो गया है। मिडिल ईस्ट संकट और आयात में रुकावट इसकी मुख्य वजह है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की नई दरें तय हुई हैं।
  • एनपीके (NPK) का 50 किलो बैग 1720 से बढ़कर 2450 रुपए हुआ।
  • पश्चिम एशिया में जारी तनाव से उर्वरक आयात प्रभावित है।
  • यूरिया और डीएपी (DAP) की कीमतें अभी स्थिर रखी गई हैं।
  • खाद महंगी होने से किसानों की खेती लागत बढ़ेगी।

खाद हुई महंगी, किसान परेशान

मध्यप्रदेश में इस साल खरीफ की बुआई से पहले ही किसानों को झटका लग गया है। राज्य सहकारी विपणन संघ ने खरीफ सीजन 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों की नई बिक्री दरें जारी कर दी हैं।

इन दरों के मुताबिक, कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर यानी एनपीके (NPK: Nitrogen Phosphorus Potassium) के दाम में जबरदस्त उछाल आया है। एनपीके (12:32:16) और एनपीके (10:26:26) का 50 किलोग्राम का बैग पिछले खरीफ सीजन में 1720 रुपए में मिलता था। अब यही बैग 2450 रुपए में मिलेगा। यानी एक बैग पर 730 रुपए की सीधी बढ़ोतरी की गई है।

क्यों बढ़े उर्वरकों के दाम

इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव है। ईरान युद्ध और इस क्षेत्र में बने संकट के चलते उर्वरकों और गैस के आयात में बाधाएं आ रही हैं। इससे देश में उर्वरक उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड की कमी की वजह से एनपीके का उत्पादन घट रहा है। इन्हीं हालात का फायदा उठाते हुए उर्वरक कंपनियों ने कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ ने उर्वरक कंपनियों से मिली निविदाओं के आधार पर ये दरें तय की हैं। पूरे खरीफ सीजन में किसानों को इन्हीं दरों पर खाद मिलेगी।

कौन सी खाद कितने में मिलेगी

एनपीके (16:16:16) का दाम पिछले साल 1475 रुपए प्रति बैग था, जो इस साल बढ़कर 2050 रुपए हो गया है। अमोनियम सल्फेट का बैग पिछले साल 950 रुपए में मिलता था। अब 1400 रुपए में मिलेगा। एमओपी (MOP: Muriate of Potash) यानी पोटाश का 50 किलो बैग पिछले साल 1535 रुपए था। इस साल 1975 रुपए हो गया है। सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP: Single Super Phosphate) दानेदार का रेट भी 505 रुपए से बढ़कर 605 रुपए प्रति बैग हो गया है।

एक और वेरिएंट एनपीके (20:20:0:13) की दर अभी तय नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, उर्वरक कंपनियों ने इसके लिए 2100 रुपए प्रति बैग की पेशकश की है। विपणन संघ इसे कम कराने की कोशिश में जुटा है।

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यूरिया और डीएपी पर नहीं पड़ा असर

राहत की बात यह है कि यूरिया की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यूरिया की बिक्री केंद्र सरकार के नियंत्रण में है, इसलिए उसके दाम स्थिर हैं। इसी तरह डीएपी (DAP: Diammonium Phosphate) की कीमत भी 1350 रुपए प्रति 50 किलो बैग पर टिकी हुई है। सरकार डीएपी पर अतिरिक्त सब्सिडी (Subsidy) दे रही है। इस वजह से इस साल कुल सब्सिडी का बोझ तीन लाख करोड़ रुपए से ऊपर जाने का अनुमान है।

देश में हर साल करीब 400 लाख टन यूरिया, करीब 100 लाख टन डीएपी और करीब 140 लाख टन कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खपत होती है। सरकार अभी यूरिया और डीएपी की उपलब्धता बनाए रखने पर फोकस कर रही है। इसके लिए एलएनजी (LNG: Liquified Natural Gas) और तैयार उर्वरकों की खरीद पर जोर दिया जा रहा है।

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प्राकृतिक खेती पर जोर

इस बीच, केंद्र सरकार रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया था। हालांकि, खरीफ सीजन शुरू हो चुका है। यदि किसानों को सही वक्त पर खाद नहीं मिली, तो इसका सीधा असर खरीफ उत्पादन पर पड़ेगा।

खेती की लागत पर असर

उर्वरकों की बढ़ी कीमतें और आपूर्ति में संभावित रुकावट, दोनों मिलकर किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। अन्य राज्यों में भी उर्वरकों के दाम कमोबेश इतने ही रहेंगे। यानी यह समस्या सिर्फ मध्यप्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों की है। खेती की बढ़ती लागत से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार और किसान संगठनों के सामने यह एक बड़ी चुनौती है।

सोर्स: मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ

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