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News In Short
- मध्य प्रदेश सरकार 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है।
- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल से कृषक कल्याण वर्ष की औपचारिक शुरुआत की।
- किसानों को अन्नदाता से उद्यमी, ऊर्जा दाता और एक्सपोर्टर बनाने का लक्ष्य है।
- डिंडौरी, ग्वालियर और उज्जैन में तीन नए बड़े कृषि अनुसंधान केंद्र बनेंगे।
- उद्यानिकी फसलों को भी अब मौसम आधारित बीमा योजना का लाभ मिलेगा।
News In Detail
समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश
सरकार का मुख्य लक्ष्य किसान को पारंपरिक अन्नदाता की छवि से निकालकर उद्यमी, ऊर्जा दाता और एक्सपोर्टर बनाना है। समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश थीम के तहत खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। इसमें 16 अलग-अलग विभाग मिलकर काम करेंगे ताकि न केवल उत्पादन बढ़े, बल्कि फूड प्रोसेसिंग, डेयरी और फिशरीज जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार हो।
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तीन बड़े अनुसंधान केंद्र की स्थापना
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत प्रदेश में तीन प्रमुख रिसर्च हब बनाए जा रहे हैं। ये केंद्र फसल की उत्पादकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का काम करेंगे।
डिंडौरी: यहां श्रीअन्न (मिलेट्स) अनुसंधान केंद्र बनेगा।
ग्वालियर: यहां सरसों अनुसंधान केंद्र की स्थापना होगी।
उज्जैन: यहां चना अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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वैश्विक तकनीकी और सटीक मौसम पूर्वानुमान
किसानों और अधिकारियों को दुनिया भर के कृषि नवाचारों से जोड़ने के लिए विदेश अध्ययन भ्रमण योजना शुरू की जाएगी। सिंचाई क्षमता सुधारने के लिए प्रेशराइज्ड वाटर माइक्रो इरीगेशन योजना लागू होगी। इसके साथ ही, सटीक मौसम की जानकारी और कृषि सलाह देने के लिए प्रदेशभर में WINDS (वेदर इंफॉर्मेशन नेटवर्क डाटा सिस्टम) नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
उद्यानिकी का विस्तार और बीमा सुरक्षा
खेती के जोखिम को कम करने के लिए अब उद्यानिकी फसलों को भी मौसम आधारित बीमा योजना में शामिल किया गया है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2026-27 तक उद्यानिकी का रकबा 28.39 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 29.89 लाख हेक्टेयर (1.5 लाख हेक्टेयर की वृद्धि) किया जाए। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र को भी 1 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा। जमीनी स्तर पर मदद के लिए कृषक मित्र–कृषक दीदी योजना फिर शुरू होगी।
संस्थागत मजबूती और रिक्त पदों पर भर्ती
कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्तियां होंगी। कृषि विभाग में द्वितीय और तृतीय श्रेणी के 1348 पद और मंडी बोर्ड में 386 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी संभागों की बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड कर NABL मान्यता दिलाई जाएगी। राज्य के 46 शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में से 5 को मॉडल प्रक्षेत्र बनाया जाएगा।
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आधुनिक मार्केटिंग, प्रोसेसिंग और वैकल्पिक आय
सरकार मार्केटिंग, प्रोसेसिंग और वैल्यू-एडिशन पर विशेष फोकस कर रही है। इसमें सरसों पर भावांतर योजना लागू करना, मृदा पोषण के लिए 3 माइक्रो न्यूट्रीएंट लैब बनाना और सब्जी मंडियों का आधुनिकीकरण शामिल है। पशुपालन विभाग एमपी गोबर उत्पादों की मार्केटिंग कर गोपालकों की आय बढ़ाएगा। मत्स्य पालन विभाग नई तकनीकों और नवाचारों से मछुआरों का कल्याण सुनिश्चित करेगा। नरवाई प्रबंधन के लिए एग्रीगेटर और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाए जाएंगे।
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Sootr Knowledge
किसानों को फसल अवशेष (नरवाई) जलाने के बजाय उसे एग्रीगेटर के माध्यम से बायोगैस प्लांट तक पहुंचाना चाहिए। इससे अतिरिक्त आय हो सके। साथ ही, कृषि पर्यटन को आय के नए स्रोत के रूप में अपनाने की सलाह दी गई है।
आगे क्या
इस अभियान से मध्य प्रदेश के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ेगी। नए भर्ती होने वाले कर्मचारी और आधुनिक लैब किसानों को बेहतर बीज और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे।
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