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News In Short
एमपी के 30 लाख श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
श्रमायुक्त ने सरकारी विभागों और निजी कंपनियों को आदेश जारी किए हैं।
वेतन वृद्धि से कर्मचारियों को 1625 से 2434 रुपए का फायदा होगा।
निजी क्षेत्र के लाखों मजदूरों को अब तक एरियर नहीं मिला है।
News In Detail
एमपी के 30 लाख से ज्यादा सरकारी और निजी श्रमिकों और आउटसोर्स कर्मियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। एक अप्रैल 2024 से बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन और अब तक का एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
श्रमायुक्त ने आदेश जारी किए हैं कि, सभी सरकारी विभाग और निकायों के श्रमिकों और आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ा हुआ वेतन दिया जाए। साथ ही कोई एरियर है तो उसका भी भुगतान किया जाए।
श्रम संगठनों का आरोप
वहीं अप्रैल 2024 के आदेश को लेकर श्रम संगठनों ने एक आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आदेश का पालन बड़े पैमाने पर सरकारी विभागों और लगभग सभी निजी कंपनियों ने नहीं किया है।
वेतनवृद्धि को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती
न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड ने नवंबर 2019 में श्रमिकों के वेतन में 25% की बढ़ोतरी करने की सिफारिश की थी। सरकार ने इस सिफारिश को 1 अप्रैल 2024 से लागू कर दिया था।अप्रैल महीने में श्रमिकों को उनका बढ़ा हुआ वेतन मिला था। इसके बाद मध्यप्रदेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने इस वेतनवृद्धि को इंदौर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने इस पर स्टे दे दिया था। लगातार सुनवाई के बाद 3 दिसंबर 2024 को इस स्टे को हटा लिया गया था। इसके बावजूद बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन और एरियर नहीं दिया जा रहा था। अब श्रमायुक्त ने इस मामले में निर्देश जारी कर दिए हैं। इस बढ़े हुए न्यूनतम वेतन से कर्मचारियों को 1625 रुपए प्रति महीने से 2434 रुपए तक का फायदा होगा।
कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष क्या बोले?
मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने इस मामले पर अपनी बात रखी है। कहा है कि राज्य सरकार में करीब डेढ़ लाख आउटसोर्स कर्मचारी हैं। निगम मंडलों में 35 हजार और 54 विभागों में 65 हजार दैनिक वेतनभोगी काम कर रहे हैं।
अब इन कर्मचारियों को बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन और एरियर मिलने का रास्ता साफ हो चुका है। आदेश का पालन नहीं हुआ तो जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
निजी क्षेत्र में न सैलरी बढ़ी न एरियर मिला
अस्थाई, आउटसोर्स और अंशकालीन कर्मचारी मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने भी अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि राज्य में सरकारी क्षेत्र में करीब 1 लाख आउटसोर्स कर्मचारी और मजदूरों को फायदा हुआ है। वहीं निजी क्षेत्र में न तो उनकी सैलरी बढ़ी और न ही उन्हें एरियर मिला।
वासुदेव शर्मा ने कहा कि सीमेंट, बिजली बनाने और कई कामों में 50 से 60 % लोग अब ठेका मजदूर हैं। इन्हें कोई भी फायदे नहीं मिल रहे हैं। वासुदेव का कहना था कि श्रम विभाग ने पहले भी इस बारे में आदेश दिए थे। वे उन्हें लागू नहीं करवा पा रहे हैं। शर्मा के अनुसार सरकारी सेक्टर में 10 लाख आउटसोर्स और अस्थाई कर्मचारी हैं। वहीं निजी सेक्टर में 25 से 30 लाख ठेका मजदूर काम कर रहे हैं।
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