एमपी निकाय चुनाव: महापौर-नपा अध्यक्ष आरक्षण पर बड़ा फैसला, आरक्षण अधिकारी नियुक्त
Sanjay Dhiman | Jun 14, 2026, 17:48 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश सरकार ने 2027 नगर निकाय चुनाव के लिए महापौर और नपा अध्यक्ष पद के आरक्षण हेतु नगरीय विकास आयुक्त को अधिकृत अफसर घोषित किया। 12 जून को आदेश जारी।
मोहन यादव सरकार ने 2027 नगर निकाय चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। महापौर और नपा अध्यक्ष के पद के आरक्षण के लिए जिम्मेदार अफसर तय हो गया है। नगरीय विकास आयुक्त को यह काम सौंपा गया है। सरकार ने 12 जून को इसका आदेश जारी किया। राज्य निर्वाचन आयोग भी मतदाता सूची तैयार करने में जुट गया है।
चुनाव में अभी डेढ़ साल का वक्त बचा है। फिर भी मध्यप्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। नगरीय विकास और आवास विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश में साफ कहा गया है कि आयुक्त नगरीय प्रशासन और विकास विभाग को आरक्षण की प्रक्रिया चलाने का अधिकार होगा।
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पिछली बार 2022 में चुनाव बहुत आनन-फानन में हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार को जल्दबाजी में चुनाव कराने पड़े थे।
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यह पूरी प्रक्रिया मध्यप्रदेश नगरपालिका (महापौर और अध्यक्ष) पद का आरक्षण नियम 1999 के तहत होगी। इसमें तीन तरह के आरक्षण का प्रावधान है।
मध्यप्रदेश में कुल 16 नगर निगम हैं। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। हर चुनाव से पहले लॉटरी निकाली जाती है। इसी से तय होता है कि किस निगम में मेयर की सीट किस वर्ग के लिए रहेगी।
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सिर्फ सरकारी विभाग ही नहीं, राज्य निर्वाचन आयोग भी सक्रिय हो गया है। वह नगरीय निकायों के लिए मतदाता सूची तैयार करने के काम में जुट गया है। यह काम चुनाव की नींव होता है।
यह खबर सीधे मध्यप्रदेश से जुड़ी है। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों और दर्जनों नगरपालिकाओं में आरक्षण प्रक्रिया का असर पड़ेगा। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम, सागर, रीवा, सतना, मुरैना, कटनी, देवास, बुरहानपुर, खंडवा, सिंगरौली और छिंदवाड़ा, इन सभी शहरों के मतदाताओं को यह जानना जरूरी है कि 2027 में उनके यहां मेयर की सीट किस वर्ग के लिए होगी।
पिछली बार के चुनाव में किस शहर की सीट किस वर्ग के खाते में गई थी, उसकी पूरी सूची यहाँ दी गई है:
अनारक्षित (General): इंदौर, जबलपुर, रीवा, सिंगरौली
अनारक्षित महिला: ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर, कटनी
ओबीसी महिला: भोपाल, खंडवा
ओबीसी (OBC): रतलाम, सतना
एससी (SC): उज्जैन
एससी महिला: मुरैना
एसटी (ST): छिंदवाड़ा
साल 2014 के चुनावों में बड़े शहरों की राजनीतिक स्थिति बिल्कुल अलग प्रकार की थी:
अनारक्षित (General): भोपाल, ग्वालियर, खंडवा, देवास और कटनी
अनारक्षित महिला: जबलपुर, रतलाम, रीवा और सतना
ओबीसी महिला: इंदौर, छिंदवाड़ा
ओबीसी (OBC): बुरहानपुर, सागर
एससी (SC): मुरैना
एससी महिला: उज्जैन
एसटी (ST): सिंगरौली
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2027 के लिए अभी से क्यों हो रही है तैयारी?
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पिछली बार 2022 में चुनाव बहुत आनन-फानन में हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार को जल्दबाजी में चुनाव कराने पड़े थे।
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कौन से नियम के तहत होगा आरक्षण?
- पहला, महिला आरक्षण। कुल सीटों में से 50 फीसदी पद महिलाओं के लिए रखे जाते हैं।
- दूसरा, एससी और एसटी वर्ग के लिए आरक्षण। यह उस इलाके की जनसंख्या के अनुपात पर निर्भर करता है।
- तीसरा, ओबीसी (OBC – Other Backward Class) के लिए 27 फीसदी आरक्षण। इसका रोटेशन इस तरह होता है कि जो निकाय पिछली बार आरक्षित था, उसे इस बार छोड़ा जाए।
लॉटरी से तय होती है किसकी बारी
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पिछले 12 साल में क्या-क्या हुआ
- 2014 में नगर निगम और नगरपालिका चुनाव हुए थे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी और 2019 में होने वाले चुनाव टाल दिए गए।
- 2020 में कांग्रेस की सरकार गिरी और बीजेपी सत्ता में आई। लेकिन उसी वक्त कोविड आ गया। इस वजह से चुनाव फिर टलते रहे।
- 2022 में ओबीसी आरक्षण का मसला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट की सख्ती के बाद आनन-फानन में चुनाव हुए। अब 2022 में हुई इस देरी से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार पहले से तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य निर्वाचन आयोग भी मैदान में
एमपी के 16 नगर निगमों पर असर
साल 2022 के मेयर चुनाव में ऐसी थी आरक्षण की स्थिति
अनारक्षित (General): इंदौर, जबलपुर, रीवा, सिंगरौली
अनारक्षित महिला: ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर, कटनी
ओबीसी महिला: भोपाल, खंडवा
ओबीसी (OBC): रतलाम, सतना
एससी (SC): उज्जैन
एससी महिला: मुरैना
एसटी (ST): छिंदवाड़ा
साल 2014 के स्थानीय चुनाव में आरक्षण का समीकरण
अनारक्षित (General): भोपाल, ग्वालियर, खंडवा, देवास और कटनी
अनारक्षित महिला: जबलपुर, रतलाम, रीवा और सतना
ओबीसी महिला: इंदौर, छिंदवाड़ा
ओबीसी (OBC): बुरहानपुर, सागर
एससी (SC): मुरैना
एससी महिला: उज्जैन
एसटी (ST): सिंगरौली
FAQ
- 2027 नगर निकाय चुनाव में महापौर पद का आरक्षण कौन तय करेगा?
मध्यप्रदेश सरकार ने आयुक्त नगरीय प्रशासन और विकास विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी है। यह आदेश 12 जून 2025 को जारी किया गया। यह प्रक्रिया नगरपालिका आरक्षण नियम 1999 के तहत होगी। - MP के नगर निगमों में मेयर सीट का आरक्षण कैसे तय होता है?
16 नगर निगमों के लिए लॉटरी के जरिए यह तय किया जाता है कि किस निगम की मेयर सीट किस वर्ग को मिलेगी। ओबीसी आरक्षण का रोटेशन होता है ताकि पिछली बार आरक्षित निगम को इस बार बाहर रखा जाए। महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित रहती हैं।
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