MP की मानसिक सेहत पर संकट! हर 100 में 14 लोग प्रभावित, इलाज के लिए डॉक्टरों की कमी

Anshika Singh Chauhan | Oct 10, 2026, 13:33 IST
Share
मध्यप्रदेश में मानसिक बीमारियों का संकट, डिप्रेशन और चिंता से जूझ रहे लोग
मध्यप्रदेश में मानसिक बीमारियों का संकट, डिप्रेशन और चिंता से जूझ रहे लोग

मध्यप्रदेश में मानसिक बीमारियां एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही हैं। भोपाल समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लोग डिप्रेशन, डर, चिंता और दूसरी मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश की करीब 14 प्रतिशत आबादी किसी न किसी मानसिक बीमारी से प्रभावित है। यानी हर 100 में से लगभग 14 लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी का सामना कर रहे हैं।

आज 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इस मौके पर मानसिक सेहत से जुड़ी यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आखिर मध्यप्रदेश में कितने लोग मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं? आइए जानते हैं।

प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य की क्या स्थिति है?

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, मध्यप्रदेश की करीब 14 फीसदी आबादी मानसिक बीमारियों से प्रभावित है। वहीं प्रदेश में मानसिक रोगों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी बेहद कम बताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश में करीब 20 लाख लोगों पर सिर्फ एक मनोचिकित्सक (मानसिक बीमारियों का डॉक्टर) उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों को सही समय पर डॉक्टर की सलाह और इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में डिप्रेशन, फोबिया और ओसीडी जैसी बीमारियां शामिल हैं। इनका असर व्यक्ति की सोच, व्यवहार और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है।

डिप्रेशन के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

डिप्रेशन यानी अवसाद केवल कुछ दिनों की उदासी नहीं है। इसमें व्यक्ति लंबे समय तक परेशान या निराश महसूस कर सकता है। कई बार उसे उन कामों में भी खुशी नहीं मिलती, जो पहले अच्छे लगते थे।

नींद कम लेना, खाने पीने में बदलाव, लोगों से दूरी बनाना और काम में मन नहीं लगना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में व्यक्ति के मन में खुद को नुकसान पहुंचाने का विचार भी आ सकता है

डॉक्टरों का कहना है कि मानसिक परेशानी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर इलाज और काउंसलिंग से राहत मिल सकती है।

कैंसर के बाद डिप्रेशन में गए मरीज को मिली राहत

भोपाल में 50 साल के एक व्यक्ति कैंसर से जूझ रहे थे। उनके दो ऑपरेशन सफल नहीं हो पाए थे। इसके बाद वे गंभीर डिप्रेशन में चले गए। उनकी नींद लगभग खत्म हो गई थी। उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। यहां तक कि वे कैंसर का इलाज भी नहीं कराना चाहते थे। उनके मन में खुदकुशी के विचार आने लगे थे।

परिवार ने उन्हें मनोचिकित्सक को दिखाया। डॉक्टरों ने दवाइयों के साथ आरटीएमएस थेरेपी दी। यह डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक आधुनिक तकनीक है।

बताए गए मामले के मुताबिक करीब 15 से 20 दिनों में मरीज की मानसिक हालत में काफी सुधार आया। वे अपनी सामान्य दिनचर्या में लौटने लगे और पहले की तरह खुश रहने लगे।

रिटायर्ड आईएएस की हत्या: भोपाल में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर मंडरा रहा खतरा | Retired IAS Officer's Murder: Serious Questions on Senior Citizen Safety in Bhopal, Danger Looms Over Elderly Living Alone
एमपी में बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, अकेलेपन के साए और अपनों से दूर होने पर बढ़ रही मुसीबतें
01 Oct 2026 ,
By Aman Vaishnav
रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। राजधानी में 70 से अधिक उम्र का हर चौथा वरिष्ठ नागरिक अकेले रहता है। वहीं NCRB Report 2024 के अनुसार, बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर है। बच्चों के बाहर जाने से बुजुर्ग दंपति घरों में अकेले छूट रहे हैं।
रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। राजधानी में 70 से अधिक उम्र का हर चौथा वरिष्ठ नागरिक अकेले रहता है। वहीं NCRB Report 2024 के अनुसार, बुजुर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर है। बच्चों के बाहर जाने से बुजुर्ग दंपति घरों में अकेले छूट रहे हैं।

आठ साल से परेशान महिला को OCD से राहत

एक अन्य मामले में 47 साल की गृहिणी पिछले आठ वर्षों से अत्यधिक साफ-सफाई करने की आदत से परेशान थीं। वे दिन में करीब चार घंटे नहाने, बर्तन धोने और घर साफ करने में बिताती थीं।

बार-बार हाथ धोने के कारण उनके हाथों की चमड़ी तक खराब हो गई थी। उनकी इस परेशानी का असर परिवार और रिश्तों पर भी पड़ रहा था।

जांच में डॉक्टरों ने पाया कि महिला को ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर यानी OCD है। इस बीमारी में व्यक्ति के मन में बार-बार कुछ विचार आते हैं। उनसे होने वाली बेचैनी कम करने के लिए वह एक ही काम बार-बार करने लगता है।

महिला का इलाज शुरू किया गया। दवाइयों और काउंसलिंग से उनकी बार-बार हाथ धोने की आदत पर नियंत्रण आने लगा। इसके बाद उनके पारिवारिक जीवन में भी सुधार हुआ।

शराब की लत ने बढ़ाई मानसिक परेशानी

मानसिक बीमारी का एक और मामला 36 साल के व्यक्ति का सामने आया। वह पिछले सात साल से अत्यधिक शराब पी रहा था। जानकारी के मुताबिक शराब के अधिक सेवन के चलते वह गंभीर मानसिक वहम की समस्या से जूझने लगा। डॉक्टरों ने इसे पैरानॉयड साइकोसिस (Paranoid Psychosis) बताया।

इस स्थिति में व्यक्ति को दूसरों पर जरूरत से ज्यादा शक हो सकता है। उसे ऐसा भी लग सकता है कि कोई उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है। व्यक्ति का इलाज और परामर्श शुरू किया गया। इसके बाद उसकी मानसिक हालत में सुधार आने लगा। उसका जीवन भी धीरे-धीरे व्यवस्थित होने लगा है।

मेन्टल हेल्थ को लेकर क्या कहती हैं डॉक्टर?

डॉ. समीक्षा साहू का कहना है कि मानसिक बीमारी कोई शर्म या बदनामी की बात नहीं है। यह भी दूसरी बीमारियों की तरह एक स्वास्थ्य समस्या है।

उनके मुताबिक समय पर दवाइयां और थेरेपी मिलने से मरीज स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। कई बार परिवार मानसिक बीमारी (Mental health) के शुरुआती लक्षणों को समझ नहीं पाता। मरीज के व्यवहार में बदलाव आने पर उसे डांटने या दोष देने के बजाय उसकी परेशानी समझना जरूरी है।

मानसिक बीमारी होने पर क्या करें?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे जरूरी कदम है। लंबे समय से उदासी, डर, बेचैनी या बार-बार एक ही काम करने की परेशानी हो तो डॉक्टर से मिलें।

परिवार के लोगों को भी मरीज का साथ देना चाहिए। उसकी परेशानी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां बंद नहीं करनी चाहिए।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर यह समझना जरूरी है कि मानसिक बीमारी छिपाने की नहीं, इलाज कराने की जरूरत है। समय पर मदद मिलने से कई मरीजों की जिंदगी बेहतर हो सकती है।

FAQs:

  1. मध्यप्रदेश में कितने प्रतिशत लोग मानसिक बीमारियों से प्रभावित हैं?
    राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश की 13.9 प्रतिशत आबादी किसी न किसी मानसिक बीमारी से प्रभावित है।
  2. डिप्रेशन के मुख्य लक्षण क्या हैं?
    लगातार उदासी, नींद की परेशानी, भूख में बदलाव, किसी काम में मन नहीं लगना और लोगों से दूरी बनाना डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
  3. OCD क्या है और इसके क्या लक्षण हैं?
    OCD एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है। इसमें व्यक्ति को बार-बार अनचाहे विचार आ सकते हैं। वह हाथ धोने या चीजें जांचने जैसे काम बार-बार कर सकता है।
  4. मध्यप्रदेश में मानसिक रोगों के इलाज के लिए कितने मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं?
    खबर में दिए गए सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रति एक लाख आबादी पर केवल 0.05 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं।
  5. क्या डिप्रेशन और दूसरी मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है?
    हां, कई मानसिक बीमारियों का प्रभावी इलाज उपलब्ध है। डॉक्टर की सलाह से दवाइयों, काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार थेरेपी की मदद से मरीजों की हालत में सुधार हो सकता है।
Tags:
  • MP News
  • MP Mental Health
  • Depression in MP
  • मानसिक सेहत
  • विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
  • World Mental Health Day
  • OCD Treatment
  • मानसिक बीमारी
  • Mental health
जयपुर में अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, भर्ती से पहले नगर निगम में विवाद

By Raghvendra Singh Rathore

जयपुर में अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, भर्ती से पहले नगर निगम में विवाद
विधायक प्रीतम लोधी के प्रदर्शन में बवाल: समर्थकों ने युवक को पीटा, लगे भाजपा सरकार मुर्दाबाद के नारे

By Amresh Kushwaha

विधायक प्रीतम लोधी के प्रदर्शन में बवाल: समर्थकों ने युवक को पीटा, लगे भाजपा सरकार मुर्दाबाद के नारे
जल जीवन मिशन: इंजीनियर के 30 से ज्यादा बैंक खाते, तनख्वाह से 253 फीसदी ज्यादा प्रॉपर्टी

By Ashish Bhardwaj

जल जीवन मिशन: इंजीनियर के 30 से ज्यादा बैंक खाते, तनख्वाह से 253 फीसदी ज्यादा प्रॉपर्टी
मुंबई की करोड़ों की हेरिटेज प्रॉपर्टी बेचेगी MP सरकार, एक सौ सत्रह साल पुरानी इमारत भी शामिल

By Anshika Singh Chauhan

मुंबई की करोड़ों की हेरिटेज प्रॉपर्टी बेचेगी MP सरकार, एक सौ सत्रह साल पुरानी इमारत भी शामिल
राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस ने लगाए पार्षद खरीद-फरोख्त के आरोप, डीजीपी ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस ने लगाए पार्षद खरीद-फरोख्त के आरोप, डीजीपी ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश
छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती पर रोक, नए धर्मांतरण कानून पर पेंच, फिर आई नक्सली आहट, 9 महिला माओवादी बनेंगी हीरोइन

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती पर रोक, नए धर्मांतरण कानून पर पेंच, फिर आई नक्सली आहट, 9 महिला माओवादी बनेंगी हीरोइन
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, नाम भेजो, नियुक्तियां करनी हैं, आईडीए पर भी चर्चा

By Sanjay Gupta

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, नाम भेजो, नियुक्तियां करनी हैं, आईडीए पर भी चर्चा